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शाहपुरा तालाब पर विभागों की खींचतान: एनजीटी नाराज, दस दिन में तय करना होगा एफटीएल-बफर जोन, फिर कार्रवाई
Mon, 05 Oct 2026 07:54 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 05 Oct 2026 07:54 PM IST
सार
शाहपुरा तालाब की सीमा को लेकर विभागों की खींचतान पर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। 10 दिन में एफटीएल और 50 मीटर बफर जोन तय करना होगा। इसके बाद कैचमेंट क्षेत्र के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होगी।
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एनजीटी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शाहपुरा तालाब के संरक्षण के मामले में सरकारी विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर चल रही खींचतान पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकरण ने कहा कि विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालना बंद करें और मिलकर काम करें। एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और भोपाल नगर निगम को गठित समिति के साथ मिलकर 10 दिन में तालाब का वास्तविक एफटीएल और बफर जोन तय करने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट किया कि मामले में अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकरण ने कहा कि अदालत का समय विभागीय समन्वय की कमी के कारण बर्बाद नहीं होना चाहिए।
एफटीएल तय होते ही अतिक्रमण पर कार्रवाई
एनजीटी ने निर्देश दिए हैं कि एफटीएल और बफर जोन का सीमांकन पूरा होने के बाद शाहपुरा तालाब के कैचमेंट और 50 मीटर बफर क्षेत्र में मौजूद अवैध और अस्थायी निर्माणों को हटाने की कार्रवाई तत्काल शुरू की जाए। यानी सीमांकन पूरा होते ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
ड्रोन सर्वे में पहले ही चिन्हित हो चुके निर्माण
मामले में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, शाहपुरा तालाब क्षेत्र का ड्रोन सर्वे 24 जुलाई को कराया गया था। इसमें कैचमेंट क्षेत्र में कई स्थायी और अस्थायी निर्माण तथा अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। सर्वे मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से कराया गया था। तालाब की सीमा को लेकर भोपाल मास्टर प्लान में 33 मीटर और वेटलैंड नियमों में 50 मीटर के प्रावधान का उल्लेख सामने आया है। अब एनजीटी ने वास्तविक एफटीएल और बफर क्षेत्र का सीमांकन कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
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बिना तैयारी पहुंचे एसडीएम को फटकार
सुनवाई के दौरान एसडीएम कोलार पीसी पांडे के पूरी जानकारी और तैयारी के बिना उपस्थित होने पर भी अधिकरण ने नाराजगी जताई। उन्हें भविष्य में मामले से संबंधित पूरी जानकारी के साथ ही सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। वहीं, भोपाल नगर निगम द्वारा अब तक विस्तृत जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर भी एनजीटी ने नाराजगी जताई। निगम को अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह भी पढ़े-पढ़ाई छोड़ सड़क पर उतरे विद्यार्थी: शिक्षिका पर लगाए मारपीट-धमकी के आरोप,3 घंटे प्रदर्शन के बाद विभाग ने हटाया
गंदे पानी की निकासी का मुद्दा भी उठाया
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया कि शाहपुरा तालाब अधिसूचित वेटलैंड है। इसके बावजूद तालाब में बिना उपचारित गंदा पानी पहुंचने और बफर क्षेत्र में अतिक्रमण होने की शिकायत है। उनका कहना है कि यह वेटलैंड संरक्षण और प्रबंधन नियम, 2017 के प्रावधानों का उल्लंघन है। अब प्रशासन को 30 अक्टूबर की अगली सुनवाई में कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी। इससे पहले 10 दिन में एफटीएल और बफर जोन का सीमांकन पूरा करना होगा।
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एफटीएल तय होते ही अतिक्रमण पर कार्रवाई
एनजीटी ने निर्देश दिए हैं कि एफटीएल और बफर जोन का सीमांकन पूरा होने के बाद शाहपुरा तालाब के कैचमेंट और 50 मीटर बफर क्षेत्र में मौजूद अवैध और अस्थायी निर्माणों को हटाने की कार्रवाई तत्काल शुरू की जाए। यानी सीमांकन पूरा होते ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
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ड्रोन सर्वे में पहले ही चिन्हित हो चुके निर्माण
मामले में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, शाहपुरा तालाब क्षेत्र का ड्रोन सर्वे 24 जुलाई को कराया गया था। इसमें कैचमेंट क्षेत्र में कई स्थायी और अस्थायी निर्माण तथा अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। सर्वे मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से कराया गया था। तालाब की सीमा को लेकर भोपाल मास्टर प्लान में 33 मीटर और वेटलैंड नियमों में 50 मीटर के प्रावधान का उल्लेख सामने आया है। अब एनजीटी ने वास्तविक एफटीएल और बफर क्षेत्र का सीमांकन कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
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बिना तैयारी पहुंचे एसडीएम को फटकार
सुनवाई के दौरान एसडीएम कोलार पीसी पांडे के पूरी जानकारी और तैयारी के बिना उपस्थित होने पर भी अधिकरण ने नाराजगी जताई। उन्हें भविष्य में मामले से संबंधित पूरी जानकारी के साथ ही सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। वहीं, भोपाल नगर निगम द्वारा अब तक विस्तृत जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर भी एनजीटी ने नाराजगी जताई। निगम को अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
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गंदे पानी की निकासी का मुद्दा भी उठाया
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया कि शाहपुरा तालाब अधिसूचित वेटलैंड है। इसके बावजूद तालाब में बिना उपचारित गंदा पानी पहुंचने और बफर क्षेत्र में अतिक्रमण होने की शिकायत है। उनका कहना है कि यह वेटलैंड संरक्षण और प्रबंधन नियम, 2017 के प्रावधानों का उल्लंघन है। अब प्रशासन को 30 अक्टूबर की अगली सुनवाई में कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी। इससे पहले 10 दिन में एफटीएल और बफर जोन का सीमांकन पूरा करना होगा।
