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स्वच्छ सर्वे से पहले भोपाल की बढ़ी चिंता: स्लॉटर हाउस बंदी से मांस अपशिष्ट बढ़ा,अगले हफ्ते आ सकती है सर्वे टीम
Thu, 05 Feb 2026 04:54 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Thu, 05 Feb 2026 04:54 PM IST
सार
स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 से पहले भोपाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आधुनिक स्लॉटर हाउस बंद होने से मांस अपशिष्ट का निपटान प्रभावित हुआ है, जिससे स्वच्छता रैंकिंग पर असर पड़ सकता है। अगले हफ्ते सर्वे टीम के आने की संभावना है और इस बार रैंकिंग जमीनी हकीकत पर आधारित होगी।
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बीएमसी भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 से ठीक पहले राजधानी भोपाल के लिए सबसे बड़ी मुश्किल जिंसी स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस की बंदी बनकर सामने आई है। गोकशी प्रकरण के बाद लगे तालों से मांस अपशिष्ट का वैज्ञानिक निपटान ठप हो गया है, जिसका सीधा असर स्वच्छता रैंकिंग पर पड़ सकता है। इसी बीच अगले हफ्ते स्वच्छ सर्वेक्षण टीम के भोपाल पहुंचने की संभावना है, जिससे नगर निगम की चिंता और बढ़ गई है।
अब पोर्टल नहीं, जमीन पर दिखेगी हकीकत
इस बार का स्वच्छ सर्वे पहले से बिल्कुल अलग है। अब रैंकिंग ऑनलाइन फीडबैक या फाइलों से नहीं, बल्कि सड़क, दीवार और सार्वजनिक स्थानों की वास्तविक स्थिति से तय होगी। टीम बिना सूचना शहर के किसी भी हिस्से में पहुंचकर फोटो-वीडियो के जरिए हालात दर्ज करेगी।
येलो-रेड स्पॉट बने सबसे बड़ा खतरा
कुल 12,500 अंकों में से 10,500 अंक सीधे स्थल निरीक्षण पर आधारित हैं। दीवारों पर गंदगी, खुले में कचरा या येलो-रेड स्पॉट मिलने पर भोपाल के खाते से सीधे 150 अंक कट सकते हैं, जिससे टॉप रैंक पाना मुश्किल हो जाएगा।
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यह भी पढ़ें-MP में 5वीं-8वीं की बोर्ड तर्ज पर परीक्षा, 20 फरवरी से इम्तिहान का आगाज, 25 लाख बच्चे देंगे परीक्षा
दूसरे नंबर से फिसलने का डर
पिछले साल देश में दूसरा स्थान पाने वाला भोपाल इस बार कमजोर नजर आ रहा है। शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर, टूटे फुटपाथ, बदहाल सार्वजनिक शौचालय और उड़ती धूल साफ देखी जा सकती है। तालाबों और स्कूलों में स्वच्छता भी पूरी कसौटी पर खरी नहीं उतर रही।
यह भी पढ़ें-कांग्रेस का सख्त फॉर्मूला, जिला संगठन होगा छोटा, मध्य प्रदेश में कटेगी पदाधिकारियों की लंबी लिस्ट
नगर निगम का दावा-सुधार में तेजी
नगर निगम का कहना है कि येलो और रेड स्पॉट हटाने का अभियान शुरू किया जा रहा है। शौचालयों की सफाई पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और सफाई व्यवस्था को और दुरुस्त किया जा रहा है। अब सवाल यही है कि सर्वे टीम के आने से पहले भोपाल जमीनी स्तर पर खुद को कितना सुधार पाता
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अब पोर्टल नहीं, जमीन पर दिखेगी हकीकत
इस बार का स्वच्छ सर्वे पहले से बिल्कुल अलग है। अब रैंकिंग ऑनलाइन फीडबैक या फाइलों से नहीं, बल्कि सड़क, दीवार और सार्वजनिक स्थानों की वास्तविक स्थिति से तय होगी। टीम बिना सूचना शहर के किसी भी हिस्से में पहुंचकर फोटो-वीडियो के जरिए हालात दर्ज करेगी।
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येलो-रेड स्पॉट बने सबसे बड़ा खतरा
कुल 12,500 अंकों में से 10,500 अंक सीधे स्थल निरीक्षण पर आधारित हैं। दीवारों पर गंदगी, खुले में कचरा या येलो-रेड स्पॉट मिलने पर भोपाल के खाते से सीधे 150 अंक कट सकते हैं, जिससे टॉप रैंक पाना मुश्किल हो जाएगा।
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दूसरे नंबर से फिसलने का डर
पिछले साल देश में दूसरा स्थान पाने वाला भोपाल इस बार कमजोर नजर आ रहा है। शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर, टूटे फुटपाथ, बदहाल सार्वजनिक शौचालय और उड़ती धूल साफ देखी जा सकती है। तालाबों और स्कूलों में स्वच्छता भी पूरी कसौटी पर खरी नहीं उतर रही।
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नगर निगम का दावा-सुधार में तेजी
नगर निगम का कहना है कि येलो और रेड स्पॉट हटाने का अभियान शुरू किया जा रहा है। शौचालयों की सफाई पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और सफाई व्यवस्था को और दुरुस्त किया जा रहा है। अब सवाल यही है कि सर्वे टीम के आने से पहले भोपाल जमीनी स्तर पर खुद को कितना सुधार पाता
