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नब्बे डिग्री का मोड़: अमर उजाला संवाद में सीएम ने कहा- खामियां सुधारेंगे; ऐशबाग ब्रिज मामले में अब आगे क्या
Fri, 27 Jun 2025 02:45 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 27 Jun 2025 02:45 PM IST
सार
Bhopal’s 90-Degree Bridge: भोपाल के ऐशबाग ओवरब्रिज का मामला पिछले दिनों देशभर में सुर्खियों में रहा। गुरुवार को भोपाल में अमर उजाला संवाद के मंच से हमने यह मुद्दा सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया। उन्होंने पहली बार इस मुद्दे पर जो बयान दिया है, उसके बाद नजर आगे की कार्रवाई पर है...
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भोपाल के चर्चित 90 डिग्री वाले आरओबी पर बोले सीएम डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में बने 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का उद्घाटन टाल दिया गया है। गुरुवार को अमर उजाला संवाद - मध्य प्रदेश के मंच पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस ओवरब्रिज के बारे में सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ब्रिज के निर्माण में हुई खामियों को सुधारा जाएगा। गलत डिजाइन के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट संकेत भी दे दिए कि तकनीकी खामियां जब तक दूर नहीं होंगी, तब तक उद्घाटन नहीं होगा।
18 करोड़ का पुल, जो खराब इंजीनियरिंग की वजह से सुर्खियों में आया
दरअसल, मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने 18 करोड़ की लागत से इस आरओबी का निर्माण किया है। डिजाइन में खामियों की वजह से यह सोशल मीडिया पर देशभर में चर्चा में आया। इसके बाद जिम्मेदारों की तरफ इसका ध्यान गया। विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने मामले में एक समिति गठित की। इसमें दो मुख्य अभियंता, दो कार्यकारी अभियंता और एक सहायक यंत्री शामिल थे। इन्होंने स्थल निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट सौंप दी है।
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ये भी पढ़ें- MP Samwad: '90 डिग्री वाले पुल की गलती को सुधारेंगे, दोषियों पर कार्रवाई होगी', 'संवाद' के मंच से सीएम का एलान
मुख्यमंत्री ने इस ओवरब्रिज के बारे में आखिर क्या कहा?
मुख्यमंत्री यादव ने इस विषय पर पहली प्रतिक्रिया अमर उजाला के मंच से दी। उन्होंने कहा, ''यह 2022 से बन रहा था। मेरे आने के बाद तो उसका लोकार्पण भी नहीं हुआ। निर्माण कार्य में कोई भी गलती होती है तो दुरुस्त की जा सकती है। हमने तो कहा है कि दुरुस्त करो। गलती हुई है तो सुधार देंगे। यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती है कि गलत हो गया तो समाज ने बता दिया। समाज ने बताया तो सुधार देंगे। ...इंजीनियर से, रेलवे से या ठेकेदार से गलती हुई होगी। जिसने गलती की, उसे सजा भी दे देंगे।''
ब्रिज बनाना जरूरी क्यों?
बरखेड़ी फाटक से पांच लाख की आबादी के लिए आवागमन सुविधाजनक नहीं था। रेलवे को भी ऑपरेशनल दिक्कतें आ रही थीं। यहां हादसे भी बढ़ रहे थे। इसी वजह से यहां ओवरब्रिज बनाने को लेकर रिपोर्ट दी गई थी। 2018 में पहली बार इसकी डिजाइन बनी थी, लेकिन कुछ कारणों से उस पर सहमति नहीं बन पाई। इसकी जमीन की कम उपलब्धता को देखते हुए वहीं पर ओवरब्रिज बनाने का निर्णय लिया गया।
ये भी पढ़ें- भोपाल का 90 डिग्री मोड़ वाला ब्रिज बना सेल्फी स्पॉट, देखने पहुंच रहे लोग, अब PWD करेगा री-डिजाइन
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18 करोड़ का पुल, जो खराब इंजीनियरिंग की वजह से सुर्खियों में आया
दरअसल, मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने 18 करोड़ की लागत से इस आरओबी का निर्माण किया है। डिजाइन में खामियों की वजह से यह सोशल मीडिया पर देशभर में चर्चा में आया। इसके बाद जिम्मेदारों की तरफ इसका ध्यान गया। विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने मामले में एक समिति गठित की। इसमें दो मुख्य अभियंता, दो कार्यकारी अभियंता और एक सहायक यंत्री शामिल थे। इन्होंने स्थल निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट सौंप दी है।
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मुख्यमंत्री ने इस ओवरब्रिज के बारे में आखिर क्या कहा?
मुख्यमंत्री यादव ने इस विषय पर पहली प्रतिक्रिया अमर उजाला के मंच से दी। उन्होंने कहा, ''यह 2022 से बन रहा था। मेरे आने के बाद तो उसका लोकार्पण भी नहीं हुआ। निर्माण कार्य में कोई भी गलती होती है तो दुरुस्त की जा सकती है। हमने तो कहा है कि दुरुस्त करो। गलती हुई है तो सुधार देंगे। यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती है कि गलत हो गया तो समाज ने बता दिया। समाज ने बताया तो सुधार देंगे। ...इंजीनियर से, रेलवे से या ठेकेदार से गलती हुई होगी। जिसने गलती की, उसे सजा भी दे देंगे।''
ब्रिज बनाना जरूरी क्यों?
बरखेड़ी फाटक से पांच लाख की आबादी के लिए आवागमन सुविधाजनक नहीं था। रेलवे को भी ऑपरेशनल दिक्कतें आ रही थीं। यहां हादसे भी बढ़ रहे थे। इसी वजह से यहां ओवरब्रिज बनाने को लेकर रिपोर्ट दी गई थी। 2018 में पहली बार इसकी डिजाइन बनी थी, लेकिन कुछ कारणों से उस पर सहमति नहीं बन पाई। इसकी जमीन की कम उपलब्धता को देखते हुए वहीं पर ओवरब्रिज बनाने का निर्णय लिया गया।
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भोपाल का ये रेलवे ओवरब्रिज अपने मोड़ के कारण चर्चा में है।
- फोटो : अमर उजाला
कौन-से दो विभाग हैं आमने-सामने?
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि 2018 में पहली बार पेश किए गए डिजाइन को रेलवे ने नकार दिया था। फिर 120 डिग्री की निर्माण संचरना पर सहमति बनी। इसमें सर्कुलर पिलर का प्रावधान था। उनका कहना है कि रेलवे ने अपनी जगह पर दीवारनुमा पिलर बना दिए। स्पान पर कैप जैसा डिजाइन भी नहीं बना। इसके चलते कम जगह में ब्रिज का निर्माण करवाना पड़ा। दूसरी तरफ रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी को ब्रिज की डिजाइन के बारे में पहले ही आगाह कर दिया था।
क्या कहता है आईआरसी-38?
अधिकारियों के अनुसार इंडियन रोड कांग्रेस के 38 कोड में प्रावधान है कि यदि कहीं पर जमीन की समस्या हो तो शहरी इलाकों में न्यूनतम 30 किमी प्रति घंटे रफ्तार से आवागमन लायक ब्रिज का निर्माण कराया जा सकता है।
ये भी पढ़ें- 90 डिग्री मोड़ वाला ऐशबाग पुल सभी की सहमति से बना, अब फुटपाथ तोड़ चौड़ा होगा
अब आगे क्या?
अधिकारियों ने बताया कि जमीन की कमी और आसपास मेट्रो स्टेशन की मौजूदगी के कारण तीखा मोड़ बनाया गया था। अब थोड़ी और जमीन लेकर मोड़ की गोलाई बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। इसे लेकर पीडब्ल्यूडी और रेलवे के अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है। रेलवे के अधिकारियों ने डिजाइन का नया प्रस्ताव मांगा है। इसकी फिजिबिलिटी जांचने के बाद स्वीकृति पर फैसला हो सकेगा।
क्या विकल्प मौजूद हैं?
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि 2018 में पहली बार पेश किए गए डिजाइन को रेलवे ने नकार दिया था। फिर 120 डिग्री की निर्माण संचरना पर सहमति बनी। इसमें सर्कुलर पिलर का प्रावधान था। उनका कहना है कि रेलवे ने अपनी जगह पर दीवारनुमा पिलर बना दिए। स्पान पर कैप जैसा डिजाइन भी नहीं बना। इसके चलते कम जगह में ब्रिज का निर्माण करवाना पड़ा। दूसरी तरफ रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी को ब्रिज की डिजाइन के बारे में पहले ही आगाह कर दिया था।
क्या कहता है आईआरसी-38?
अधिकारियों के अनुसार इंडियन रोड कांग्रेस के 38 कोड में प्रावधान है कि यदि कहीं पर जमीन की समस्या हो तो शहरी इलाकों में न्यूनतम 30 किमी प्रति घंटे रफ्तार से आवागमन लायक ब्रिज का निर्माण कराया जा सकता है।
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अब आगे क्या?
अधिकारियों ने बताया कि जमीन की कमी और आसपास मेट्रो स्टेशन की मौजूदगी के कारण तीखा मोड़ बनाया गया था। अब थोड़ी और जमीन लेकर मोड़ की गोलाई बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। इसे लेकर पीडब्ल्यूडी और रेलवे के अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है। रेलवे के अधिकारियों ने डिजाइन का नया प्रस्ताव मांगा है। इसकी फिजिबिलिटी जांचने के बाद स्वीकृति पर फैसला हो सकेगा।
क्या विकल्प मौजूद हैं?
- एनएचएआई के निदेशक ने निरीक्षण के बाद शासन को मौखिक रूप से बताया है कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार स्थल पर उपलब्ध भूमि के आधार पर निर्माण कार्य के लिए अन्य कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था।
- वहीं, एनएचएआई के कंसल्टेंट ने भी अपना मत दिया है कि ओवरब्रिज पर वाहनों की रफ्तार कम रखते हुए यातायात संचालित किया जा सकता है।
- दो विकल्प खुद मुख्यमंत्री ने बता दिए हैं। पहला- इसे दुरुस्त किया जाएगा। दूसरा- ज्यादा समस्या आएगी तो इसे दोबारा बनवाया जा सकता है।
