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Bhopal: एम्स में दवा खरीदी में गड़बड़ी का आरोप, सांसद बोले- जनता से मिली थी जानकारी,दिल्ली की टीम ने की जांच
Sat, 21 Jun 2025 09:41 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 21 Jun 2025 09:41 PM IST
सार
एम्स में कैंसर की दवा खरीदी में रबड़ी का मामला सामने आया है। भोपाल सांसद के शिकायत के बाद दिल्ली से पहुंच जांच किया है। शनिवार को भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि जनता दरबार लगाते हैं वहां से उन्हें पता चला कि एम्स में दवा की खरीदी में गड़बड़ी की जा रही है।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल स्थित एम्स में कैंसर की दवा खरीदी में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। भोपाल सांसद के शिकायत के बाद दिल्ली टीम ने भोपाल एम्स पहुंच कर जांच की। शनिवार को भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि जनता दरबार लगाते हैं वहां से उन्हें पता चला कि एम्स मे दवाइयों की खरीदी में गड़बड़ी की जा रही है। जो दवाई दूसरे स्टेट के एम्स में 250 में खरीदी जा रही है वह यहां 2100 तक में खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले को दिल्ली में उठाया इसके बाद जांच दल भोपाल पहुंचा।
स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक उठा था मामला
दरअसल शिकायत में कहा गया है कि भोपाल एम्स ने जेमसिटेबिन इंजेक्शन 2100 रुपये प्रति नग से खरीदा है। जबकि यह दवा दिल्ली ऐम्स ने 285 रुपये प्रति नग में खरीदा है। जिसके बाद 15 मई को दिल्ली में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक हुई थी। जिसमें भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने इस मुद्दे को उठाया था। जिसके बाद कमेटी की चेयरपर्सन और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने जांच का आश्वासन दिया था। वहीं अब इस मामले की जांच पड़ताल शुरू हो गई है।
अमृत फार्मेसी के जरिए सीधे दवाएं खरीदी
जानकारी के मुताबिक गुरुवार को दिल्ली से जांच टीम भोपाल एम्स पहुंची थी। जहां डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन और प्रेसिडेंट से करीब 4 घंटे तक पूछताछ की और खरीद प्रक्रिया की जानकारी ली गई।आरोप है कि कोरोना काल के बाद से केंद्र सरकार के दवा खरीद नियमों (GFR 2017) का पालन भोपाल एम्स ने नहीं किया और अमृत फार्मेसी के जरिए सीधे दवाएं खरीदी गई।
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यह भी पढ़ें-भोपाल में कृष्णा गुरुजी के साथ कुष्ठ रोगियों ने किया योग, नेत्रदान का लिया संकल्प
GFR नियमों का पालन नहीं करता एम्स
शिकायत में कहा गया है कि अमृत फार्मेसी से केवल आपात स्थिति में दवाएं खरीदने की अनुमति थी। न कि पूरी सप्लाई के लिए। अन्य सभी एम्स डायरेक्ट टेंडर के जरिए दवाएं खरीदते हैं, लेकिन भोपाल एम्स अकेला ऐसा संस्थान है जो पूरी खरीद अमृत फार्मेसी से करता है और GFR नियमों का पालन नहीं करता।
यह भी पढ़ें-अमर उजाला संवाद पहली बार मध्य प्रदेश में, 26 जून को भोपाल में जुटेंगी हस्तियां
अज्ञात व्यक्तियों ने की शिकायत
कुछ शिकायतें अज्ञात व्यक्तियों द्वारा की गई हैं, जिनमें एम्स प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें क्रिटिकल केयर यूनिट, महंगे उपकरणों की खरीद, गेस्ट हाउस का निजी उपयोग और फैकल्टी पर मनमानी कार्रवाई जैसे आरोप शामिल हैं। हालांकि इस मामले में एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह का कहना है कि ये सभी मामले पुराने हैं। इन पर पहले भी जांच हो चुकी है और क्लीन चिट भी मिल चुकी है।
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स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक उठा था मामला
दरअसल शिकायत में कहा गया है कि भोपाल एम्स ने जेमसिटेबिन इंजेक्शन 2100 रुपये प्रति नग से खरीदा है। जबकि यह दवा दिल्ली ऐम्स ने 285 रुपये प्रति नग में खरीदा है। जिसके बाद 15 मई को दिल्ली में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक हुई थी। जिसमें भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने इस मुद्दे को उठाया था। जिसके बाद कमेटी की चेयरपर्सन और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने जांच का आश्वासन दिया था। वहीं अब इस मामले की जांच पड़ताल शुरू हो गई है।
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अमृत फार्मेसी के जरिए सीधे दवाएं खरीदी
जानकारी के मुताबिक गुरुवार को दिल्ली से जांच टीम भोपाल एम्स पहुंची थी। जहां डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन और प्रेसिडेंट से करीब 4 घंटे तक पूछताछ की और खरीद प्रक्रिया की जानकारी ली गई।आरोप है कि कोरोना काल के बाद से केंद्र सरकार के दवा खरीद नियमों (GFR 2017) का पालन भोपाल एम्स ने नहीं किया और अमृत फार्मेसी के जरिए सीधे दवाएं खरीदी गई।
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GFR नियमों का पालन नहीं करता एम्स
शिकायत में कहा गया है कि अमृत फार्मेसी से केवल आपात स्थिति में दवाएं खरीदने की अनुमति थी। न कि पूरी सप्लाई के लिए। अन्य सभी एम्स डायरेक्ट टेंडर के जरिए दवाएं खरीदते हैं, लेकिन भोपाल एम्स अकेला ऐसा संस्थान है जो पूरी खरीद अमृत फार्मेसी से करता है और GFR नियमों का पालन नहीं करता।
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अज्ञात व्यक्तियों ने की शिकायत
कुछ शिकायतें अज्ञात व्यक्तियों द्वारा की गई हैं, जिनमें एम्स प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें क्रिटिकल केयर यूनिट, महंगे उपकरणों की खरीद, गेस्ट हाउस का निजी उपयोग और फैकल्टी पर मनमानी कार्रवाई जैसे आरोप शामिल हैं। हालांकि इस मामले में एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह का कहना है कि ये सभी मामले पुराने हैं। इन पर पहले भी जांच हो चुकी है और क्लीन चिट भी मिल चुकी है।
