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क्रूज हादसा: 8वीं पास हेल्पर को बना दिया था पायलट, बाद में दिलवाया सर्टिफिकेट; बाकी जगह नेवी के रिटायर्ड अफसर
Wed, 06 May 2026 08:23 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 06 May 2026 08:23 PM IST
सार
बरगी डैम क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद सामने आया कि चालक पहले हेल्पर थे, जिन्हें बाद में ट्रेनिंग देकर लाइसेंस दिलाया गया। कोर्ट ने भी लापरवाही मानते हुए FIR के आदेश दिए हैं और मामले को गैर-इरादतन हत्या माना है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि सही निर्णय और अनुभव होता तो हादसा टल सकता था।
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जबलपुर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे मध्यप्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 13 पर्यटकों की मौत हुई थी, लेकिन अब सामने आ रहे तथ्य यह संकेत दे रहे हैं कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्थागत चूक और कई स्तरों पर हुई लापरवाही का परिणाम था। हादसे के वक्त क्रूज चला रहे महेश पटेल पहले हेल्पर के रूप में काम करते थे। समय के साथ उन्होंने क्रूज चलाना सीखना शुरू किया और धीरे-धीरे संचालन करने लगे। बाद में अधिकारियों ने उन्हें लाइसेंस और आवश्यक प्रमाण पत्र भी दिलवाए, जिसके बाद वह नियमित रूप से क्रूज संचालन करने लगे।
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दूसरी जगह नेवी के रिटायर्ड अधिकारियों की नियुक्ती
पर्यटन विकास निगम के एडवाइजर कमांडर राजेंद्र निगम के मुताबिक, शुरुआत में महेश पहले हेल्पर थे, लेकिन बाद में उन्हें प्रशिक्षण देकर पूरी तरह ट्रेंड किया गया था और वे क्रूज संचालन के लिए सक्षम माना गया था। हालांकि, दूसरी ओर प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों जैसे भोपाल और हनुमंतिया में अब भी नेवी से रिटायर्ड और अनुभवी अधिकारियों को नियुक्त किया गया है, जिससे बरगी की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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एक इंजन बंद होने की जानकारी
इस मामले में पहले यह सामने आ चुका है कि हादसे के समय क्रूज का एक इंजन बंद था। यानी तकनीकी रूप से भी क्रूज पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में नहीं था। इसके बावजूद उसे पर्यटकों के साथ पानी में उतार दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में क्रूज संचालन से बचना चाहिए था या फिर अतिरिक्त सावधानी बरती जानी चाहिए थी।
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कोर्ट की सख्ती, 2 दिन में FIR दर्ज करने के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है। जेएमएफसी डीपी सूत्रकार ने बरगी थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि चालक सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ दो दिनों के भीतर FIR दर्ज कर न्यायालय को इसकी जानकारी दी जाए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर क्रूज का संचालन लापरवाहीपूर्वक किया गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ और कई लोगों की जान चली गई। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया है कि चालक क्रूज की स्थिति से परिचित होने के बावजूद यात्रियों को डूबता छोड़कर स्वयं सुरक्षित निकल गया। उसने यात्रियों को बचाने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए, जो कि एक जिम्मेदार चालक के कर्तव्यों के विपरीत है।
गैर-इरादतन हत्या का मामला माना
न्यायालय ने इस पूरे प्रकरण को भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 106 और 110 के तहत आपराधिक मानव वध का मामला माना है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में भी इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
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अनुभवी पायलट होता तो टल सकता था हादसा
बरगी डैम में पहले क्रूज संचालन कर चुके एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि यदि कोई अत्यधिक अनुभवी पायलट वहां मौजूद होता, तो स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। उनके अनुसार तेज हवा और खराब मौसम में क्रूज को पानी में नहीं उतारा जाना चाहिए था। यदि उतारा भी जाता, तो खतरे को भांपकर समय रहते किनारे लाने की कोशिश की जा सकती थी।
