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मध्यप्रदेश में पशुपालन को नई ऊंचाई: 20% दुग्ध उत्पादन लक्ष्य, स्वावलंबी गौशालाओं से किसानों की आय बढ़ेगी

Sat, 27 Dec 2025 08:40 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sat, 27 Dec 2025 08:40 PM IST
सार

मध्यप्रदेश सरकार पशुपालकों और किसानों की आय बढ़ाने के लिए दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा दे रही है। मंत्री लखन पटेल ने दो साल की उपलब्धियां और अगले तीन साल की कार्ययोजना की जानकारी दी। 

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Animal husbandry reaches new heights in Madhya Pradesh: 20% milk production target, self-reliant cow shelters
मंत्री लखन पटेल की प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार पशुपालकों और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सुनियोजित रणनीति के तहत लगातार कार्य कर रही है। पशुपालन को ग्रामीण आजीविका का सशक्त आधार बनाने के उद्देश्य से दुग्ध उत्पादन, संकलन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में नवाचार किए जा रहे हैं।
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शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभा हॉल में मीडिया को संबोधित करते हुए पटेल ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गौवंश संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मध्यप्रदेश में 1.87 करोड़ गौवंश है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत अवर्णित नस्ल का है। निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए 2500 से अधिक गौशालाओं में 4.75 लाख पशुओं को आश्रय दिया गया है। गौशालाओं को मिलने वाला अनुदान 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन प्रति गौवंश किया गया है और बजट 505 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष कर दिया गया है।
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दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के लक्ष्य से “डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना” शुरू की गई है। इसके तहत 25 से 200 दुधारू पशुओं की इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को अब पूरे प्रदेश में लागू कर भैंसपालन को बढ़ावा दिया गया है। सहकारिता के माध्यम से दुग्ध संकलन और प्रसंस्करण को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से सांची ब्रांड के उन्नयन पर काम किया जा रहा है। आगामी तीन वर्षों में 15 हजार से अधिक ग्रामों को दुग्ध सहकारी नेटवर्क से जोड़ने और औसत दुग्ध संकलन 33 लाख लीटर प्रतिदिन से अधिक करने का लक्ष्य तय किया गया है।

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पशुओं की नस्ल सुधार के लिए “हिरण्यगर्भा अभियान” संचालित किया जा रहा है, जिसमें सेक्स-सॉर्टेड सीमन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान और “क्षीर धारा ग्राम योजना” के माध्यम से उन्नत पशुपालन, पशु पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  पटेल ने कहा कि आगामी वर्षों में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना, ब्रीडर एसोसिएशन का विस्तार और उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशुपालकों व कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इन समन्वित प्रयासों से मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
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