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भोपाल: एम्स में HIV संक्रमित ब्लड चढ़ाने से बच्ची की मौत, इंचार्ज को हटाकर की खानापूर्ति, 3 माह बाद भी जांच अधूरी
Wed, 16 Mar 2022 11:24 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Wed, 16 Mar 2022 11:24 AM IST
सार
एम्स भोपाल में एक साथ ब्लड ट्रांसफ्यूजन में लापरवाही के तीन बड़े मामले सामने आए हैं। एक मामले में एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने से 10 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। हद तो यह है कि प्रबंधन ने शिकायत मिलने के बाद भी इंचार्ज को हटाकर सिर्फ खानापूर्ति की।
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भोपाल एम्स
- फोटो : social media
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विस्तार
एम्स भोपाल में खून चढ़ाने में लापरवाही के तीन बड़े मामले सामने आए हैं। एक मामले में तो 10 साल की बच्ची को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया। इससे बच्ची की मौत हो गई। प्रबंधन ने इसकी शिकायत मिलने के बाद सिर्फ ब्लड बैंक के इंचार्ज को हटाकर खानापूर्ति की। जांच कमेटी ने तीन महीने बाद भी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी ने भोपाल एम्स को दिसंबर 2021 में तीन शिकायतें भेजकर रिपोर्ट मांगी थी। इनमें ब्लड बैंक पर लापरवाही के आरोप लगे थे। एक 10 वर्षीय बच्ची को गलत तरीके से एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। दूसरी शिकायत में एक डोनर को ब्लड स्क्रीनिंग की रिपोर्ट ही नहीं बताई गई। वह एचआईवी पॉजिटिव था और उसे इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। इससे उसकी पत्नी भी एचआईवी पॉजिटिव हो गई। तीसरे मामले में एक मरीज को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया। इससे उसकी मौत हो गई। यह तीनों मामले वर्ष 2017 से 2021 के बीच के हैं।
एम्स प्रबंधन ने शिकायतें मिलने पर ब्लड बैंक इंचार्ज को हटा दिया। जांच के लिए एक कमेटी बनाई। खास बात यह है कि तीन महीने बाद भी इस कमेटी की जांच रिपोर्ट एम्स प्रबंधन को नहीं मिली है। जानकारों का कहना है कि प्रबंधन पूरे मामले को दबाने में लगा था, इसलिए अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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ब्लड बैंक में भी मिली गड़बड़ी
एम्स से मिली जानकारी के अनुसार शिकायत के बाद केन्द्रीय एजेंसी एवं स्टेट फूड एंड ड्रग्स विभाग ने संयुक्त रूप से ब्लड बैंक की जांच की। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में भी गड़बडियां मिली, लेकिन एम्स प्रबंधन अब फाइनल रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। इसके बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
अभी रिपोर्ट नहीं मिली हैं
इस मामले में मप्र एड्स कंट्रोल सोसायटी के परियोजना संचालक केडी त्रिपाठी का कहना है कि शिकायतों पर एम्स प्रबंधन से जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। अभी तक उनको रिपोर्ट नहीं मिली है। इस मामले में एम्स प्रबंधन का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद कमेटी बना दी गई थी। कमेटी में आंतरिक और बाहरी सदस्यों को रखा गया है। रिपोर्ट का इंतजार है।
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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी ने भोपाल एम्स को दिसंबर 2021 में तीन शिकायतें भेजकर रिपोर्ट मांगी थी। इनमें ब्लड बैंक पर लापरवाही के आरोप लगे थे। एक 10 वर्षीय बच्ची को गलत तरीके से एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। दूसरी शिकायत में एक डोनर को ब्लड स्क्रीनिंग की रिपोर्ट ही नहीं बताई गई। वह एचआईवी पॉजिटिव था और उसे इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। इससे उसकी पत्नी भी एचआईवी पॉजिटिव हो गई। तीसरे मामले में एक मरीज को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया। इससे उसकी मौत हो गई। यह तीनों मामले वर्ष 2017 से 2021 के बीच के हैं।
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एम्स प्रबंधन ने शिकायतें मिलने पर ब्लड बैंक इंचार्ज को हटा दिया। जांच के लिए एक कमेटी बनाई। खास बात यह है कि तीन महीने बाद भी इस कमेटी की जांच रिपोर्ट एम्स प्रबंधन को नहीं मिली है। जानकारों का कहना है कि प्रबंधन पूरे मामले को दबाने में लगा था, इसलिए अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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ब्लड बैंक में भी मिली गड़बड़ी
एम्स से मिली जानकारी के अनुसार शिकायत के बाद केन्द्रीय एजेंसी एवं स्टेट फूड एंड ड्रग्स विभाग ने संयुक्त रूप से ब्लड बैंक की जांच की। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में भी गड़बडियां मिली, लेकिन एम्स प्रबंधन अब फाइनल रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। इसके बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
अभी रिपोर्ट नहीं मिली हैं
इस मामले में मप्र एड्स कंट्रोल सोसायटी के परियोजना संचालक केडी त्रिपाठी का कहना है कि शिकायतों पर एम्स प्रबंधन से जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। अभी तक उनको रिपोर्ट नहीं मिली है। इस मामले में एम्स प्रबंधन का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद कमेटी बना दी गई थी। कमेटी में आंतरिक और बाहरी सदस्यों को रखा गया है। रिपोर्ट का इंतजार है।
