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एमपी: बालाघाट में फर्जी डिग्री से 15 साल तक डॉक्टर की नौकरी, करोड़ों रुपये वेतन लेने वाले पूर्व बीएमओ पर केस

Sun, 11 Oct 2026 07:50 AM IST
बालाघाट ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट Published by: बालाघाट ब्यूरो Updated Sun, 11 Oct 2026 07:50 AM IST
सार

बालाघाट के पूर्व बीएमओ सुनील सिंह पर दूसरे डॉक्टर की एमबीबीएस डिग्री के सहारे 15 साल से अधिक समय तक सरकारी नौकरी करने, करोड़ों रुपये वेतन लेने और पदोन्नति पाने का आरोप है। पुलिस ने मामला दर्ज कर तलाश शुरू की है।

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Balaghat: FIR registered against former BMO Sunil Singh, who worked for 15 years using a fake degree.
सुनील सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी डॉक्टर की नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। बिरसा के तत्कालीन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) सुनील सिंह के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। राज्यस्तरीय जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने देवास में पदस्थ एक अन्य डॉक्टर सुनील सिंह के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की। आरोप है कि उसने इस दौरान करोड़ों रुपये वेतन के रूप में प्राप्त किए और फर्जी दस्तावेजों के सहारे पदोन्नति भी हासिल की।

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एक ही डिग्री पर दो डॉक्टर कर रहे थे नौकरी
मामले का खुलासा स्वास्थ्य विभाग में एक ही नाम और समान शैक्षणिक दस्तावेजों वाले दो डॉक्टरों की जानकारी सामने आने के बाद हुआ। जांच में पता चला कि 15 साल से अधिक समय तक एक ही एमबीबीएस डिग्री के आधार पर दो अलग-अलग डॉक्टर सरकारी नौकरी करते रहे। दोनों सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज करने के साथ निजी क्लीनिक भी चला रहे थे। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक विभाग को इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं मिली। दोनों डॉक्टरों के दस्तावेजों में नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, कोर्स और कॉलेज का विवरण समान था। हालांकि, दोनों की पदस्थापना अलग-अलग स्थानों पर थी।

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जांच में सामने आई दस्तावेजों में गड़बड़ी
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यस्तरीय जांच समिति ने संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया। जांच में देवास में पदस्थ डॉक्टर की डिग्री असली, जबकि बालाघाट में पदस्थ सुनील सिंह के दस्तावेज कूटरचित पाए गए। जांच के दौरान आरोपी के दस्तावेजों में कई गड़बड़ियां सामने आईं। उसने अलग-अलग समय पर अपना गृह जिला रीवा, मुरैना और बालाघाट बताया था। इसके अलावा, विभाग के पास आरोपी का केवल प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन उपलब्ध था। उसके स्थायी पंजीकरण का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच रिपोर्ट के आधार पर बिरसा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत मामला दर्ज किया है।

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संविदा डॉक्टर से क्लास-वन अधिकारी तक पहुंचा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) शत्रुघन दाहिया के अनुसार, सुनील सिंह की पहली नियुक्ति वर्ष 2009 में बालाघाट में संविदा डॉक्टर के रूप में हुई थी। वर्ष 2012 में उसे नियमित कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2020 में उसे बीएमओ का प्रभार सौंपा गया और बाद में क्लास-वन अधिकारी के रूप में पदोन्नति दी गई। वर्ष 2023 से वह लगातार उप स्वास्थ्य केंद्र बिरसा में बीएमओ के पद पर कार्यरत था।

जून 2026 में पद से हटाया, अब तक ड्यूटी पर नहीं लौटा
जून 2026 में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद सुनील सिंह को बिरसा बीएमओ के पद से हटाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दमोह, बालाघाट में पदस्थ कर दिया गया था। जांच के दौरान विभाग ने उसे कई बार भोपाल बुलाया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ।

इसके बाद वह जुलाई 2026 में एक महीने के चिकित्सा अवकाश पर चला गया। तब से वह ड्यूटी पर वापस नहीं लौटा है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

 

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