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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ashish Chaturvedi told how to open vyapam scam

आखिर कैसे खुली व्यापमं घोटाले की पोल?

Wed, 08 Jul 2015 04:49 PM IST
Updated Wed, 08 Jul 2015 04:49 PM IST
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Ashish Chaturvedi told how to open vyapam scam

मध्यप्रदेश में कैंसर की तरह फैल कर लोगों की जान ले रहे व्यापमं घोटाले की पोल भी एक कैंसर मरीज की बीमारी ने ही खोली थी। घोटाले को सबसे पहले सामने लाने वाले आशीष चतुर्वेदी की मां को कैंसर के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने के बाद ही इस घोटाले की कड़ियां खुलनी शुरू हुई।

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इस मामले में आशीष चतुर्वेदी ने कई खुलासे करते हुए बताया कि किस तरह वो इस घोटाले की तह तक पहुंचे और कहां से उन्हें इतने बड़ी जालसाजी का एहसास हुआ। मीडिया से बात करते हुए आशीष ने बताया कि उनकी मां की मौत कैंसर से हुई थी।
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साल 2010 में जब मां को कैंसर था वो उन्हें लेकर मेडिकल कालेज के में पहुंचे। इस दौरान जब उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था तभी उन्हीं कुछ जूनियर डॉक्टरों को देखकर एहसास हुआ कि ये डॉक्टर कैसे बन गए।
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कैंसर के इलाज के दौरान बृजेन्द्र रघुवंशी से हुई दोस्ती

Ashish Chaturvedi told how to open vyapam scam

इस पर उसने विदिशा के रहने वाले बृजेन्द्र रघुवंशी नाम के जूनियर डॉक्टर से दोस्ती बनानी शुरू की। बृजेन्द्र के पिता देवेन्द्र रघुवंशी भाजपा के बड़े नेता हैं। शुरूआत में बृजेन्द्र ने बताया कि वो तो बहुत मेहनत से पढ़ाई करके यहां तक पहुंचा है।

लेकिन उसके हाव भाव से नहीं लगता था कि उसने सच में इतनी मेहनत की है। जैसे जैसे आशीष की दोस्ती बृजेन्द्र के साथ गहरी होती गई वह उससे खुलता चला गया। फिर उसने खुद बताया कि जब पीएमटी की प्रवेश परीक्षा चल रही थी तब वह भोपाल के डीबी मॉल में बैठकर मूवी देख रहा था।

जबकि उसकी जगह कोई और परीक्षा दे रहा ‌था। बाद में कैंसर से आशीष की मां की मौत हो गई। जिसके बाद उसने इस घोटाले का खुलासा करने को खुद का जुनून बना लिया। उसने एक एक कर इसके सबूत इकट्ठा करने शुरू किए।

उप सचिव ने कहा, पूरे कुएं में भांग मिली है तुम भी मजा लो

Ashish Chaturvedi told how to open vyapam scam

घोटाले का खुलासा होने के बाद से बृजेन्द्र फरार है और उस पर पुलिस ने पांच हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। आशीष ने बताया कि वो इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग के उप सचिव मेडिकल अधिकारी एसएस कुमरे को सूचना देने पहुंचे तो उन्होंने हस कर कहा पूरे कुंए में भांग मिली हुई है, तुम भी इस नशे का मजा लो। तुम्हे अभी यह (पैसा) नहीं मिला है जब मिल जाएगा तो तुम्हे भी मजा आने लगेगा।

वहीं साल 2013 में जब पीएमटी का पर्चा लीक हुआ तो उसने इसकी सूचना पहले ही सीबीआई व स्टेट एजेंसी को दे दी थी। लेकिन सेंट्रल एजेंसी ने कहा कि बिना स्टेट की मर्जी के हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।

आशीष के अनुसार उसने इस संबंध में सीबीआई अधिकारी आरएन दास से बात की थी। जिसके बाद पीएमटी का पेपर आउट हो गया और पुलिस ने बाद में इस मामले में कार्रवाई की।

आशीष ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के सरगना दीपक यादव और जगदीश सागर हैं। दीपक यादव भाजपा नेता का रिश्तेदार है। इस घोटाले की परतें खोलने के लिए आशीष ने आरटीआई को अहम हथियार बनाया।

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