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ड्रामा और सस्पेंस से भरी थी आसाराम की गिरफ्तारी
भोपाल/जयप्रकाश पाराशर
Updated Sun, 01 Sep 2013 06:42 PM IST
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इंदौर के खंडवारोड आश्रम पर शनिवार देर रात के करीब 12.24 बजे होंगे। दिनभर से खड़े लोग उनींदे से हो रहे थे।
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आसाराम के बहुत से भक्त आश्रम के भीतर अब भी डटे थे। जो बाहर थे उन्हें करीब 1000 पुलिस जवानों ने हटा दिया था। अब वहां कैमरे थे, टीवी रिपोर्टर थे।
अचानक दरवाजा खुला। आठ गाड़ियों का काफिला अंदर से निकला। टीवी कैमरे वाले गाड़ियों पर लपके और एक सफेद रंग की टवेरा में पिछली सीट पर चेहरा छुपाए हुए एक शख्स बैठा था।
हां, वहीं आसाराम था। आवाजें हुई। अरे आसाराम को निकाल दिया। सारे कैमरे उस तरफ दौड़ पड़े।
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आसाराम जो श्रद्धा और भक्ति से भरे लोगों से घिरे रहते थे। वह अपने अनुयाइयों के लिए भगवान थे। अपनी परेशानियों के निजात पाने के लिए लोग उसके पास आते थे।
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वह तिलस्म शनिवार को टूट चुका था। वह खुद पुलिस के घेरे में था। उसे इंदौर के हवाई अड्डे पर ले जाया गया। जहां वीआईपी लाउंज में सुबह तक रखा गया और सुबह जोधपुर पुलिस ले गई।
यह उस शख्स के पतन की कहानी है, जो हजारों-लाखों लोगों को काम-क्रोध-मद-लोभ से दूर रहने के प्रवचन देता था। वह रोचक किस्से सुनाता था। कभी-कभी उठकर नाचने लगता था। उसके लतीफों पर कभी हंसते थे और कई बार आंसू बहाते थे।
भोपाल से इंदौर की कहानी
अपने समधी देवराज कृष्णानी की अंत्येष्टि में शामिल होने भोपाल आए आसाराम ने जोधपुर पुलिस को एक फैक्स भेजकर गुहार लगाई कि उन्हें थोड़ी मोहलत और दी जाए।
उनकी समधी की मौत हो गई है और खुद उनकी तबीयत खराब है। जोधपुर पुलिस ने उनकी यह अपील ठुकरा दी।
जोधपुर पुलिस अपने पास ऐसे सबूत होने का दावा कर रही थी, जिनके आधार पर आसाराम की गिरफ्तारी सुनिश्चित दिखाई दे रही थी।
आसाराम को जैसे ही जोधपुर पुलिस के इरादों की भनक लगी, वह शुक्रवार शाम को अचानक दिल्ली की फ्लाइट पकड़ने के लिए राजाभोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर दौड़े। जहां उनके समर्थकों ने मीडियाकर्मियों पर हमला बोल दिया।
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कई मीडियाकर्मियों को गंभीर चोटे आई। एक तरफ इस आपाधापी में जहां फ्लाइट मिस हो चुकी थी, वहीं भोपाल और जोधपुर में मीडियाकर्मियों पर आसाराम के समर्थकों द्वारा किए गए हमले से वातावरण काफी बिगड़ चुका था।
अब भी साफ दिखाई दे रहा था कि मध्य प्रदेश सरकार किसी न किसी रूप में आसाराम की मदद कर रही है। गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता यह कहते दिखाई दिए कि आसाराम मध्य प्रदेश में वांटेड नहीं है।
दो गाड़ियां भोपाल से इंदौर की ओर दौड़ पड़ी। इनमें से एक में आसाराम थे। तब तक कैमरामैन देवास टोल नाके पर जमा हो चुके थे।
आसाराम को वहां देखा गया। उसके बाद यह खबर प्रचारित की गई कि आसाराम रतलाम निकल गए हैं। वास्तव में आसाराम इंदौर के ही खंडवारोड आश्रम में थे।
पूरे मामले में मध्य प्रदेश की सरकार का रवैया बड़ा संदेहास्पद था। आसाराम के बारे में इंदौर पुलिस ने यह दावा किया कि वह इंदौर आश्रम में नहीं हैं।
सरकारी सूत्र यह तर्क दे रहे थे कि आसाराम के समर्थकों को आश्रम से दूर रखना था और कानून व व्यवस्था की स्थिति ठीक बनाए रखना जरूरी थी।
आसाराम का प्रकट होना
शनिवार को आसाराम के बेटे नारायण साई ने वकीलों के साथ सामने आकर कहा कि आसाराम आश्रम में ही हैं। उनकी तबीयत खराब है। जोधपुर पुलिस शाम तक इंदौर पहुंच जाएगी तो पूरा सहयोग किया जाएगा।
अलबत्ता जोधपुर पुलिस शाम को इंदौर पहुंचने के बाद भी आश्रम में काफी देर तक घुस नहीं पाई थी। गिरफ्तारी अपरिहार्य दिखाई दे रही थी।
पुलिस देर रात आसाराम को आश्रम से बाहर निकालने की रणनीति तैयार कर चुकी थी ताकि उनके समर्थक कोई उपद्रव न कर सकें।
जब जोधपुर पुलिस की टीम इंदौर आश्रम में पहुंची आसाराम प्रवचन कर रहे थे। पुलिस ने सबसे पहले नारायण साई से पूछताछ की।
नारायण साई ने कहा कि 9.30 के बाद वह सोने चले जाएंगे इसलिए कोई भी पूछताछ सुबह ही संभव होगी। रात 10 बजे आसाराम सोने के लिए अपनी कुटिया में चले गए। तब तक उनके भक्त आश्वस्त हो चुके थे कि अब जो भी होगा सुबह होगा।
रात 11 बजे के आसपास मध्य प्रदेश पुलिस के 1000 जवानों ने आश्रम को घेर लिया। वहां बैठे करीब 500 भक्तों को हिलने की भी इजाजत नहीं थी।
जोधपुर पुलिस और इंदौर पुलिस के अधिकारियों ने आसाराम को कुटिया से बाहर बुलाने के लिए कहा। आसाराम जैसे ही कुटिया से बाहर निकले उन्हें सफेद टवेरा में बैठा लिया गया।
आश्रम के बाहर जब एंबुलेंस पहुंची और बैरिकेड्स लगाए गए तब लगने लगा था कि जल्द ही आसाराम की गिरफ्तारी होने वाली है। गेट खुला और पुलिस का कारवां आसाराम को लेकर हवाई अड्डे पर निकल चुका था।
सुबह के विशेष विमान से दिल्ली होते हुए जोधपुर ले जाने की योजना थी, क्योंकि जोधपुर की कोई सीधी फ्लाइट नहीं थी। लाखों लोगों को प्रवचन देने वाला यह शख्स हवाई अड्डे के वीआईपी लाउंड में पुलिसकर्मियों से घिरा रात गुजार रहा था।
रात का प्रवचन
जोधपुर की पुलिस जब आसाराम से पूछताछ करने पहुंची तो आसाराम प्रवचन कर रहे थे। करीब 500 भक्तों का हुजूम उनके सामने डटा था।
आसाराम कह रहे थे कि मुझे यहां से चुपचाप ले जाने की साजिश है लेकिन मैं गिरफ्तार भी हो जाऊं तो कुछ मत करना।
शरीर अपवित्र हुआ तो त्याग दूंगा। पुलिस जानती है मेरे करोड़ों समर्थक हैं। सड़कों पर आ जाएंगे, इसलिए चुपचाप ले जाएंगे।
