एमपी: अनूपपुर में प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद पटवारियों ने सौंपा ज्ञापन, तीन पदाधिकारियों समेत अन्य पर केस
अनूपपुर में प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद कलेक्ट्रेट परिसर में ज्ञापन सौंपने पर पटवारी संघ के तीन पदाधिकारियों समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। संघ ने एडीएम को पूर्व सूचना देने का हवाला देकर कार्रवाई पर सवाल उठाए और विरोध जारी रखने की बात कही।
विस्तार
अनूपपुर में प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद कलेक्ट्रेट परिसर में ज्ञापन सौंपने के मामले में पटवारी संघ के तीन पदाधिकारियों समेत अन्य के खिलाफ पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। शुक्रवार शाम एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार ज्ञानदास पनिका ने तहसीलदार वेदप्रकाश सिंह के साथ कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। वहीं, पटवारी संघ ने ज्ञापन सौंपने से पहले व्हाट्सऐप पर सूचना देने और एडीएम की ओर से जवाब में ‘ओके’ लिखे जाने का हवाला देते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। संघ ने इसे दबाव बनाने की कार्रवाई बताया है।
प्रतिबंधात्मक आदेश के उल्लंघन का आरोप
प्रशासन के अनुसार, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने 1 अक्टूबर को आदेश जारी कर कलेक्ट्रेट सहित कुछ शासकीय कार्यालयों के परिसर के सामने प्रतिबंधात्मक क्षेत्र घोषित किया था। इसके बावजूद 8 अक्टूबर को दोपहर करीब 2 बजे पटवारी संघ के बैनर तले सुधीर तिवारी, मिथलेश तिवारी, रामबदन चौधरी सहित अन्य पटवारी कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित हुए और ज्ञापन सौंपा।
प्रशासन का आरोप है कि सक्षम अनुमति के बिना एकत्रित होकर ज्ञापन सौंपने से लोक सेवक के आदेश का उल्लंघन हुआ और परिसर की शांति व्यवस्था प्रभावित हुई। एसडीएम के निर्देश पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 223(ए) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कोतवाली थाना प्रभारी उमेश उपाध्याय ने बताया कि एसडीएम के आदेश और नायब तहसीलदार व तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है।
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पटवारी संघ ने अनुमति को लेकर उठाए सवाल
दूसरी ओर, मध्यप्रदेश पटवारी संघ की जिला इकाई अनूपपुर के अध्यक्ष चेतन सिंह मरावी ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ज्ञापन सौंपने से पहले एडीएम बलवीर रमन को व्हाट्सऐप के माध्यम से सूचना दी गई थी। एडीएम ने जवाब में ‘ओके’ लिखा था। इसके बाद संघ ने 8 अक्टूबर को शांतिपूर्वक ज्ञापन सौंपा।
मरावी के मुताबिक, ज्ञापन सौंपने के दौरान न तो नारेबाजी की गई और न ही कोई हंगामा हुआ। उन्होंने कहा कि यदि कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश को लेकर आपत्ति थी, तो ज्ञापन लेने से इनकार किया जा सकता था या संघ के सदस्यों को गेट के बाहर जाने के लिए कहा जा सकता था।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को पहले ही सूचना दे दी गई थी, तो फिर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई क्यों की गई। संघ अध्यक्ष ने इसे दबाव बनाने की कार्रवाई बताया है।
ऑनलाइन राजस्व कार्यों से विरत हैं पटवारी
दरअसल, प्रदेश के विभिन्न जिलों में ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ सहित अन्य कार्यों को लेकर पटवारियों के खिलाफ सेवा समाप्ति, निलंबन और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। इसी के विरोध में अनूपपुर जिला इकाई ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
संघ का कहना है कि योजना से जुड़ी विधिक और व्यावहारिक समस्याओं के बारे में शासन को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। संघ के निर्णय के अनुसार, 7 अक्टूबर से प्रदेशभर के पटवारी ऑनलाइन राजस्व कार्यों से विरत हैं। इसके साथ ही उन्होंने शासकीय व्हाट्सऐप समूहों से भी बाहर रहने का निर्णय लिया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि पटवारियों के खिलाफ की जा रही दंडात्मक कार्रवाई वापस लिए जाने तक विरोध जारी रहेगा।
