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मध्य प्रदेश में चुनावों से पहले 112 विधायकों के खिलाफ किसानों ने खोला मोर्चा

Sun, 15 Jul 2018 07:58 PM IST
एजेंसी, भोपाल
एजेंसी, भोपाल Updated Sun, 15 Jul 2018 07:58 PM IST
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Ahead of Madhya Pradesh elections farmers organization started to campaign against 112 MLAs

मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक किसान संगठन ने 112 विधायकों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। इस संगठन से जुड़े किसानों का आरोप है कि अलग-अलग दलों के ये विधायक पिछले पांच साल के दौरान खेती से जुड़े मुद्दों को उठाने में विफल रहे हैं।

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आम किसान यूनियन (एकेयू) के नेता केदार सिरोही का कहना है कि इस साल के अंत में होने वाले चुनावों से पहले किसान इन विधायकों से अपने कल्याण के लिए किए गए कार्यों का ब्योरा मांगेंगे। इसके बाद किसान सोच-समझकर चुनावों में अपने वोट का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा, हमने ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाली विधानसभाओं से 112 विधायकों को चुना है, जिन्होंने विधानसभा में किसानों से जुड़े मुद्दों पर एक भी सवाल नहीं पूछा। हालांकि उन्होंने अपने संगठन के सरकार या किसी राजनीतिक दल के खिलाफ होने से इनकार किया है।
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5 हजार से कम मतों से जीतने वाले पर ध्यान
यूनियन ने उन विधायकों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो पिछले विधानसभा चुनावों में 5 हजार से भी कम मतों से विजयी हुए थे। इन 112 विधायकों में 86 सत्ताधारी भाजपा के हैं, जबकि 24 विधायक प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के हैं। शेष दो विधायक निर्दलीय के तौर पर विजयी हुए थे। सिरोही ने कहा, हमारे कार्यकर्ता चयनित विधानसभाओं के केवल 20 सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले गांवों में जाकर किसानों को वोट करने से पहले इन बातों को ध्यान में रखने के लिए कहेंगे।
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भाजपा ने बताया आंदोलन को गलत
भाजपा प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय ने कहा, यदि किसान संगठन राजनीति करना चाहते हैं तो उन्हें खुले तौर पर सामने आना चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार को फसल उत्पादन में वृद्धि के लिए लगातार 6 बार कृषि कर्मन पुरस्कार मिला है। सरकार ने शून्य ब्याज पर कृषि ऋण दिलाए हैं और बिजली आपूर्ति में सब्सिडी दी है। साथ ही राज्य की सिंचाई क्षमता पिछले एक दशक में 600 फीसदी बढ़ाई है। 

सरकारी दावों के खिलाफ बताई हकीकत

35 हजार करोड़ रुपये पिछले एक साल में किसानों में बांटने का दावा है शिवराज सरकार का
22 हजार करोड़ रुपये भावांतर भुगतान योजना का बकाया होने का दावा किया एकेयू ने
33 हजार करोड़ रुपये फसल को पहुंचे नुकसान का बीमा बकाया होने का किया दावा
5300 करोड़ रुपये ही फसल बीमा योजना के तहत भुगतान होने की बात कही एकेयू ने
15129 किसानों की आत्महत्या 2004 से 2016 के बीच होने की बात खुद मानी है सरकार ने
03 नंबर पर है पूरे देश में मध्य प्रदेश, किसानों की आत्महत्या के मामले में 
43 फीसदी आत्महत्याएं पिछले 5 साल में बढ़ने का दावा किया है एकेयू ने
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