मौत के डेढ़ साल बाद मुर्दे ने बेच दी करोड़ों की जमीन
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मध्यप्रदेश में एक चौंकाने वाला वाक्या सामने आया है जहां अपनी मौत के डेढ़ साल बाद एक व्यक्ति ने एसडीएम कोर्ट में पेश होकर अपनी जमीन किसी और के नाम करने के लिए शपथ पत्र दिया। घटना लगभग तीन साल पुरानी है।
उक्त व्यक्ति ने एसडीएम को दिए अपने हस्ताक्षरित शपथ पत्र में करोडों की जमीन को किसी और के नाम करने की मांग की थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार बिश्व बिहारी अवस्थी की 9 फरवरी 2011 को मौत हो गई थी। लेकिन भूमि अभिलेखों के अनुसार उन्हेंने 2 जुलाई 2012 को एसडीएम कोर्ट में अपनी 78 हजार स्कवायर फिट जमीन किसी नगेन्द्र सिंह और विरेन्द्र सिंह के नाम हस्तांतरित करने के लिए शपथ पत्र दिया था।
आरटीआई से हुआ खुलासा
इस बात का खुलासा हुआ एसडीएम कोर्ट में दायर की गई एक आरटीआई के द्वारा। जहां राजेन्द्र कुमार गुप्ता ने आरटीआई दाखिल कर इस संबंध में जानकारी मांगी थी। मामला सामने आने के बाद डिविजन कमिश्नर संजय दूबे ने मामले की जांच बैठा दी है।
आरटीआई दाखिल करने वाले राजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि यह केवल भारत में ही संभव है जहां जीवित लोग खुद को जिंदा साबित करने के लिए कोर्ट में मुकदमा लड़ते हैं और मरने वाले एसडीएम कोर्ट में आकर अपनी जमीन किसी अन्य के नाम कर जाते हैं।
गुप्ता ने आरोप लगाया कि इस कारस्तानी को भू माफिया और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है।
भूमाफिया और अधिकारियों ने रचा षडयंत्र
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर के पत्नीपुरा क्षेत्र के रहने वाले नगेन्द्र सिंह और वीरेन्द्र सिंह ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के समक्ष आवेदन देकर आरटीओ के नजदीक केसरबाग रोड पर करोडों की कीमत की 78 हजार स्कवायर फीट जमीन को अपने नाम कराने की मांग की थी।
यह जमीन बिश्व बिहारी अवस्थी और उनके परिवार के नाम थी। गुप्ता ने बताया कि अवस्थी की मौत फरवरी 2011 में सुपर स्पेशियलिटी में हो गई थी।
जिसके बाद आईएमसी ने मार्च 2011 में उनके नाम मृत्यु प्रमाणपत्र (no. 31102283) भी जारी कर दिया था। वो सवाल उठाते हैं कि ऐसे में यह कैसे संभव है कि वह अपनी जमीन किसी और के नाम करने अपने हस्ताक्षर वाला शपथ पत्र कैसे दे सकते हैं।
