वॉचमैन पिता का बेटा बना चार्टर्ड अकाउंटेंट, नहीं कर सका था इंजीनियरिंग
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अपने वॉचमैन पिता की मेहनत को साकार करते हुए लखनऊ के किशोर रावल चार्टर्ड अकाउंटेंट बने हैं। उन्होंने 800 में से 405 अंक हासिल किए हैं।
इस सफलता का श्रेय वे पिता मान बहादुर रावल द्वारा देखे सपने और उनकी मेहनत को देते हुए कहते हैं कि ‘मुझ से ज्यादा इसमें पिता की मेहनत है।’
विकासनगर सोसाइटी के लिए काम कर रहे उनके पिता महीने के साढ़े छह हजार रुपये कमाते हैं और इसी से चार सदस्यों के परिवार को आगे बढ़ा रहे हैं।
क कमरे और गलियारे के घर में परिवार के साथ रहने वाले किशोर परिवार को सपोर्ट करने के लिए ट्यूशन भी पढ़ाते थे। वे बताते हैं कि नेपाल के टीकापुर कैलाइली से उनका परिवार 2011 में बेहतर जीवन की तलाश में 2011 में लखनऊ आ गया था।
लखनऊ में उनके पिता एक सोसाइटी में वॉचमैन का काम करते हैं, यह उन्हीं का सपना था कि किशोर चार्टर्ड अकाउंटेंट बनें। रिजल्ट आने पर अब किशोर गर्व से अपना नाम टाइटल लगाकर ‘सीए किशोर’ बताते हैं।
इस प्रोफेशन के बारे में उनकी मां मनादेवी भले ही बहुत कुछ न जानती हों, लेकिन बेटे के उल्लास से उन्हें भी महसूस होता है कि उसने कुछ बड़ा हासिल किया है।
प्राइवेट अस्पताल में की अकाउंटेंट की नौकरी
उनका छोटा भाई महेश भी सीए कोर्स पढ़ रहा है। वह सीपीटी पास कर चुका है और फिलहाल आईपीसीसी की तैयारी कर रहा है। किशोर साइंस से इंटर करने के बाद इंजीनियरिंग करना चाहते थे, लेकिन 2011 में उनका एडमीशन किसी सरकारी इंजीनियर कॉलेज में नहीं हो सका।
प्राइवेट कॉलेज की फीस भरने के लिए परिवार के पास पैसे नहीं थे, ऐसे में 2011 दिसंबर में उन्होंने कॉमन प्रोफिशियंसी टेस्ट दिया। इसमें 141 मार्क्स स्कोर करके पास हो गए तो आत्मविश्वास बढ़ा और फिर अगले ही वर्ष आईपीसी दिया, जिसमें 373 मार्क्स स्कोर किया और इसे पास कर लिया।
यहां से उन्हें साफ हो चुका था कि सीए ही उनका लक्ष्य है। सीए होने के अलावा किशोर कंपनी सेक्रेट्री फाइनल की तैयारी भी फिलहाल कर रहे हैं। वहीं, बीकॉम कर चुके हैं।
मई में सीए फाइनल परीक्षा देने के बाद उन्होंने एक प्राइवेट अस्पताल में अकाउंटेंट के तौर पर नौकरी शुरू कर दी है। वे बताते हैं कि इसके जरिये वे अपने परिवार को मदद करना चाहते हैं।