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ये टीचर अपने वेतन से कराएंगे इस जर्जर स्कूल की मरम्मत

Thu, 27 Oct 2016 01:26 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Thu, 27 Oct 2016 01:26 PM IST
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teachers will construct their school building by own salary
ह‌र‌िजन पाठशाला - फोटो : amar ujala

छात्रों के लिए खतरे का सबब बनी स्कूल की बिल्डिंग को दुरुस्त करवाने के लिए समाज कल्याण विभाग से बार-बार गुहार के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो यहां के शिक्षकों ने ही इसका जिम्मा उठा लिया। 

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आलमबाग स्थित समाज कल्याण से अनुदानित हरिजन पाठशाला की छत स्कूल के शिक्षक अब अपने खर्च से बनवाएंगे। स्कूल की छत काफी जर्जर हो चुकी है। ऐसे में यहां बड़ा हादसा होने की आशंका बराबर बनी हुई है। 
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इस वजह से बच्चे दहशत के माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षकों ने बच्चों को डर के वातावरण से मुक्ति दिलाने का बीड़ा उठाया है। शिक्षकों ने बताया कि स्कूल में करीब 105 विद्यार्थी हैं।
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स्कूल भवन की खस्ता हालत की जानकारी कई बार समाज कल्याण विभाग को दी गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसलिए हम सबने अपने वेतन से स्कूल की मरम्मत करवाने का फैसला किया है।

आलमबाग क्षेत्र के भिलावां में समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुदानित हरिजन प्राइमरी पाठशाला चलाई जा रही है। कक्षा एक से कक्षा पांच तक के विद्यार्थी यहां शिक्षा प्राप्त करते हैं। तीन कमरों के भवन में दो कमरों की छत दरारों की वजह से गिरने की स्थिति में हैं।

जर्जर भवन के लिए अनुदान देने की कोई व्यवस्था नहीं

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हरिजन प्राइमरी पाठशाला की जर्जर छत - फोटो : amar ujala

साथ ही तीसरे कमरे में भी बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता है। एक छोटा सा बरामदा भी है जिसकी छत कुछ साल पहले गिर जाने से टीन रखवा दी गई है।

पाठशाला में बिजली भी नहीं है, बिना पंखे और लाइट के विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। पाठशाला के प्रधानाचार्य अब्दुल कय्यूम अब्बासी का कहना है कि कभी भी इस जर्जर भवन की छत गिर सकती है।

इस पाठशाला की स्थापना 1952 में हुई। पहले यह एक पंचायत घर था जिसमें जिला समाज कल्याण विभाग ने तीन कमरे बनवाए। लेकिन तब से यहां मेंटेनेंस नहीं कराया गया।

यहां का प्रबंधन जिला समाज कल्याण अधिकारी की देखरेख में होता है। कई बार भवन की जर्जर हालत की शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनके शब्दों में ‘ छह महीने में रिटायर होने वाला हूं, इसलिए सोच रहा हूं कि यहां के बच्चों के लिए कुछ कर के जाऊं।’

समाज कल्याण अनुदानित विद्यालयों को केवल शिक्षकों की सैलरी देता है। जर्जर भवन के लिए अनुदान देने की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर शिक्षक स्कूल की मरम्मत कराना चाहते हैं तो यह अच्छा कदम है। - केएस मिश्र जिला समाज कल्याण अधिकारी

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