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रंगकर्मी राज बिसारिया की जुबानी ‘अपने भूल चुके, दूसरे कर रहे सम्मान’

Tue, 08 Nov 2016 08:48 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 08 Nov 2016 08:48 PM IST
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 raj bisaria will be honoured by mp government
रंगकर्मी राज ब‌िसार‌िया - फोटो : amar ujala

‘मेरे अपने प्रदेश के लोग मुझे भूल चुके हैं और दूसरा प्रदेश मुझे सम्मानित कर रहा है। अब उस भारतेन्दु नाट्य अकादमी से भी मेरे पास कार्यक्रम का निमंत्रण तक नहीं आता है जिसे मैंने खड़ा किया है।’

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यह कहना है प्रसिद्ध रंगकर्मी राज बिसारिया का, जिन्हें मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से 10 नवंबर को उज्जैन में कालिदास सम्मान से नवाजा जाएगा।  हालांकि सम्मान उनके लिए कोई नई बात नहीं हैं लेकिन खास ये है कि कालिदास सम्मान उन्हें उनके जन्मदिवस पर मिलेगा। इस जन्मदिवस पर 81 वर्ष के हो जाएंगे। इस वर्ष उन पर कुछ आयोजन हुए और कई पत्र-पत्रिकाओं ने अंक भी निकाले।
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 बिसारिया कहते हैं, ‘कुछ अजीब संयोग है कि आदित्य विक्रम बिडला कला शिखर सम्मान भी जन्मदिवस के दिन मिला था और अब इस सम्मान की तारीख भी मेरे जन्मदिन के दिन ही है’। यूपी के थिएटर के पहले व्यक्ति को यह सम्मान मिलने की बात पर कहते हैं कि उन्हें जब पद्मश्री मिला था तब भी ऐसा कहा गया था और केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी सम्मान मिला था तब भी। 

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म‌िले हैं कई प्रतिष्ठित सम्मान

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रंगकर्मी राज‌ ब‌िसार‌िया - फोटो : amar ujala
सितंबर में लंदन से लौटे बिसारिया बताते हैं कि जल्द ही वह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में अध्यापन के लिए जाने वाले हैं। अब कालिदास पर सुरेन्द्र वर्मा का नाटक ‘आठवां सर्ग’ करने की इच्छा है। देखिए कब कर पाते हैं!

गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी में 10 नवंबर 1935 को जन्में राज बिसारिया ने लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। 1956 से अंग्रेजी नाटकों के मंचन से रंगमंच की शुरुआत की। 1962 में लखनऊ विश्वविद्यालय में थिएटर ग्रुप बनाया और 1966 में टॉ (थिएटर आर्ट्स वर्कशॉप) की स्थापना की। 

फिर भारतेदु नाट्य अकादमी के संस्थापक निदेशक बने। यहां 23 सितंबर 1975 से 10 सितंबर 1989 तक कार्य किया। लखनऊ विवि के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए बिसारिया को कई प्रतिष्ठित सम्मानों के साथ टैगोर फेलोशिप भी मिली है। 

सुनो जनमेजय, अंधायुग, आधे अधूरे, बाकी इतिहास, बहुत बड़ा सवाल, गार्बो, शायद, मैकबेथ,  जूलियस सीजर, किंग लीयर, एंटीगनी, फादर,ओथेलो, कैंडिडा, बेयरफुट इन एथेंस उनके निर्देशित चर्चित नाटक रहे हैं। 
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