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अनाथ बच्चों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली लखनऊ की बेटी पौलोमी फोर्ब्स में शामिल
Sat, 06 Feb 2021 06:09 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2021 06:09 PM IST
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पौलोमी पावनी शुक्ला
- फोटो : amar ujala
सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता व शहर की बेटी पौलोमी पाविनी शुक्ला को विश्व विख्यात पत्रिका फोर्ब्स ने अंडर 30 की सूची में शामिल किया है। पत्रिका हर साल 30 ऐसे व्यक्तियों की सूची जारी करती है, जो 30 साल से कम उम्र में ही समाज के बड़े बदलावों में अहम भूमिका निभाई हो। पौलोमी को अनाथ बच्चों की शिक्षा में उनके योगदान के लिए वर्ष 2021 की सूची में फोर्ब्स ने शामिल किया है।
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पौलोमी बताती हैं कि 2001 में वे अपनी मां के साथ हरिद्वार में थीं। मां अराधना शुक्ला वहां डीएम थीं। उसी दौरान भुज में भूकंप आया था। बड़ी संख्या में बच्चे हरिद्वार के अनाथालय लाए गए थे। उनकी कहानियों ने मुझे झकझोर दिया। लगा कि इनका अब क्या होगा। खैर इसके बाद मैंने पढ़ाई पूरी की और 11 राज्यों में 100 से अधिक अनाथालयों में गई। वहां बच्चों की कहानियों को जाना।
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उन्हीं कहानियों के आधार पर भाई अमंद के साथ मिलकर वीकेस्ट आन अर्थ-आरफेंस ऑफ इंडिया पुस्तक लिखी। इसे ब्लूम्सबेरी प्रकाशन ने प्रकाशित किया था। पौलोमी बताती हैं कि मैंने जाना कि अनाथ बच्चों की शिक्षा और सुविधाओं के लिए बहुत काम करना होगा। इसके लिए 2018 में उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की है।
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अपनी पुस्तक तथा जनहित याचिका के माध्यम से पौलोमी द्वारा अनाथ बच्चों को शिक्षा तथा अन्य सुविधाओं में समान अवसर दिलवाने हेतु कई वर्षों से कार्य किया जा रहा है। हालांकि वे कहती हैं कि जमीनी स्तर पर भी काम करने की जरूरत है और इसके लिए प्रयास जारी हैं।