पद्म श्री अरुणिमा सिन्हा को मिला शान-ए-लखनऊ सम्मान, आगे ये है लक्ष्य
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मैंने अपना मिशन अपने दिल और दिमाग से किया, पैरों से नहीं...। फोकस करके अगर कुछ भी किया जाए तो अंतत: वह लक्ष्य हासिल हो जाता है। आने वाले दिनों में अब मेरा लक्ष्य दिसंबर तक अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराने का है।
अपने लक्ष्य और उन्हें पाने के तरीकों का यह जिक्र मंगलवार को माउंट एवरेस्ट विजेता पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा ने किया। संगीत नाटक अकादमी परिसर में चल रहे लखनऊ पुस्तक मेले में उन्हें शान-ए-लखनऊ सम्मान से नवाजा गया।
साई दिल्ली के निदेशक राजीव सरीन, साई लखनऊ की अधिशासी निदेशक रचना गोविल, अंतरराष्ट्रीय रेफरी वाटर स्पोर्ट्स सुधीर शर्मा, प्रदेश ओलम्पिक संघ के उपाध्यक्ष टीपी हवेलिया, समेत तमाम ने स्मृतिचिह्न व अंगवस्त्र देकर उन्हें सम्मानित किया।
बच्चों को मोबाइल नहीं, अच्छी किताबें दें...
मई 2013 में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाले दिन की यादें साझा करते हुए युवा पर्वतारोही ने कहा कि आज युवाओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे लक्ष्य नहीं निर्धारित करते। जीवन में पहले लक्ष्य निर्धारित कीजिए, फिर इस तरह उस तरफ बढ़िए कि ऊपर वाला खुद वह लक्ष्य देने को मजबूर हो जाए।
जब आप संघर्ष से कुछ हासिल करते हैं तो वो कहानी पूरी दुनिया जानना चाहती है। अपनी कमज़ोरी को मैंने अपनी ताकत बनाया। उन्होंने कहा कि जिस दिन किताबों को आप अपना दोस्त बना लें, उसके बाद फिर किसी की जरूरत नहीं होती।
इंटरनेट के इस दौर में किताबों की ओर रुझान कम हो रहा है पर बड़ों को ध्यान देना चाहिए कि बच्चों को बहलाने के लिए मोबाइल नहीं, अच्छी किताबें दें। समारोह में मनोज सिंह चंदेल, ओलम्पियन सैयद अली, जसपाल सिंह समेत तमाम मौजूद रहे।