लखनऊः गरीब बच्चों के ही नहीं बेसहारा जानवरों के भी हमदर्द हैं आकाश, बखूबी निभा रहे हैं कर्त्तव्य
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विधि की पढ़ाई पूरी कर आकाश भले ही अपने कॅरिअर को संवारने में जुटे हैं, लेकिन अपने सामाजिक कर्तव्यों को भी बखूबी निभा रहे हैं। आकाश हीरालाल यादव पीजी कॉलेज के एलएलबी ऑनर्स द्वितीय सेमेस्टर के छात्र हैं। साथ ही डॉक्टरी पेशे में भी हाथ अजमा लेते हैं।
सड़क पर जब भी किसी आवारा जानवरों को घायल अवस्था में देखते हैं तो उनसे रहा नहीं जाता। वे खुद ही उसके इलाज में जुट जाते हैं। अपने इस काम के लिए अब वे इतना पहचाने जाने लगे हैं कि अंजान लोग भी फोन कर उनको घायल जानवरों के इलाज के लिए बुला लेते हैं।
आकाश बताते हैं कि ज्यादातर श्वान के इलाज के लिए फोन आते हैं। कुछ फोन गायों के इलाज के लिए भी आते हैं। कई बार इतनी इमरजेंसी होती है कि वे रात में भी निकल पड़ते हैं। आकाश ने बताया कि उन्हें जानवरों से शुरू से ही लगाव था।
गंभीर जानवरों को करवाते हैं भर्ती
उन्होंने बताया कि जिस जानवर की हालत ज्यादा गंभीर हो जाती है उसे बाद में जीव बसेरा अस्पताल में भर्ती करवाते हैं। यहां पर श्वानों का इलाज होता है। वहीं, यदि गाय की हालत गंभीर होती है तो उसे जीव आश्रय में भर्ती करवाते हैं। अब तक कई जानवरों को भर्ती करवा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे इस कार्य को भविष्य में भी जारी रखेंगे।
बच्चों का सरकारी स्कूल में कराते हैं दाखिला
जानवरों की मदद करने के साथ आकाश मलिन बस्ती के बच्चों को भी पढ़ाते हैं। ‘बदलाव एक कदम शिक्षा की ओर’ के तहत वह आलमबाग स्थित मलिन बस्तियों के गरीब बच्चों को सप्ताह में तीन दिन पढ़ाते हैं। उनको शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराते हैं।
जब बच्चे लिखना-पढ़ना सीख जाते हैं तब उन्हें सरकारी स्कूल में दाखिला कराते हैं। आकाश ने बताया कि शुरू में इस कार्य में दिक्कत आई। पहले जब बच्चों को ढूंढ कर पढ़ाने के लिए बैठाया तो उन्होंने दिलचस्पी नहीं दिखाई। कई भाग भी जाते थे, लेकिन बाद में धीरे-धीरे बच्चे नियमित हुए और पढ़ाई के लिए खुद ही आने लगे। उनको स्वच्छता के बारे में भी जानकारी दी जाती है।