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केजीएमयू के डॉ.लक्ष्य व डॉ. पाल को विदेश में मिला सम्मान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 09 Jun 2018 03:58 PM IST
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सेंट पीटरबर्ग में आयोजित कांफ्रेंस में डॉ लक्ष्य का सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रास्थोडांटिक्स विभाग के डॉ. लक्ष्य व डॉ. यूएस पाल को रशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सम्मानित किया गया।
इंटरनेशनल इंप्लांट फाउंडेशन जर्मनी की ओर से सेंट पीटरबर्ग में आयोजित कॉन्फ्रेंस में दोनों विशेषज्ञों को इंटरनेशनल आईएफ टीचर अवॉर्ड से नवाजा गया।
अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में दोनों विशेषज्ञों ने केजीएमयू को विदेश में अलग पहचान दिलाई। सबसे खास बात यह रही कि अवॉर्ड हासिल करने वालों में दोनों विशेषज्ञ सरकारी संस्थान के थे।
यह सम्मान उन विशेषज्ञों को दिया जाता है जो इमीडिएट इंप्लांट द्वारा तीन दिनाें के भीतर फिक्स दांत लगाने में पांच साल से अधिक का अनुभव प्राप्त कर चुका हो।
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इंटरनेशनल इंप्लांट फाउंडेशन जर्मनी की ओर से सेंट पीटरबर्ग में आयोजित कॉन्फ्रेंस में दोनों विशेषज्ञों को इंटरनेशनल आईएफ टीचर अवॉर्ड से नवाजा गया।
अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में दोनों विशेषज्ञों ने केजीएमयू को विदेश में अलग पहचान दिलाई। सबसे खास बात यह रही कि अवॉर्ड हासिल करने वालों में दोनों विशेषज्ञ सरकारी संस्थान के थे।
यह सम्मान उन विशेषज्ञों को दिया जाता है जो इमीडिएट इंप्लांट द्वारा तीन दिनाें के भीतर फिक्स दांत लगाने में पांच साल से अधिक का अनुभव प्राप्त कर चुका हो।
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गेस्ट लेक्चर के बाद दिया गया अवॉर्ड
यह दोनों ही विशेषज्ञ इस क्षेत्र में पांच साल से अधिक का अनुभव प्राप्त कर चुके हैं। डॉ. लक्ष्य ने बताया कि इस सम्मान के लिए यूएसए, इजराइल, रूस समेत दुनिया भर से करीब 25 विशेषज्ञ शामिल हुए थे।
वहीं, देश से भी 15 विशेषज्ञ शामिल हुए। इस मौके पर पहले विशेषज्ञों ने अवॉर्ड टेस्ट दिया। उसके बाद प्रजेंटेशन दी। इसके बाद गेस्ट लेक्चर दिया।
गेस्ट लेक्चर पूरा होने के बाद उन्हें यह अवॉर्ड दिया गया। डॉ. लक्ष्य ने बताया कि अवॉर्ड मिलने के बाद वे अब देश व विदेश में शिक्षा देने के लिए अधिकृत हो गए हैं।
वहीं, देश से भी 15 विशेषज्ञ शामिल हुए। इस मौके पर पहले विशेषज्ञों ने अवॉर्ड टेस्ट दिया। उसके बाद प्रजेंटेशन दी। इसके बाद गेस्ट लेक्चर दिया।
गेस्ट लेक्चर पूरा होने के बाद उन्हें यह अवॉर्ड दिया गया। डॉ. लक्ष्य ने बताया कि अवॉर्ड मिलने के बाद वे अब देश व विदेश में शिक्षा देने के लिए अधिकृत हो गए हैं।