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बीबीएयू के शोध छात्र ने विकसित किया इम्युनो बायो सेंसर, इस बीमारी की मिलेगी सटीक जानकारी
Thu, 17 Sep 2020 02:08 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 17 Sep 2020 02:08 PM IST
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ऋषभ आनंद
- फोटो : amar ujala
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के माइक्रो बायोलॉजी विभाग के शोध छात्र ऋषभ आनंद ओमर को बड़ी सफलता मिली है। ऋषभ ने डॉ. पंकज कुमार अरोरा, माइक्रो बायोलॉजी विभाग, बीबीएयू के मार्गदर्शन एवं डॉ. निशीथ वर्मा केमिकल इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी कानपुर के सहयोग से एक इम्युनो बायो सेंसर विकसित किया है, जो इस बीमारी का जल्दी पता लगाने और सटीक जानकारी देने में सक्षम है। यदि बीमारी का सही समय पर पता चल जाए तो मृत्यु दर में काफी कमी आएगी।
ऋषभ ने बताया कि टीबी के बैक्टीरिया द्वारा स्रावित प्रोटीन को बायो मार्कर की तरह और उसके विरुद्ध कुछ एंटी बॉडी का उपयोग करके यह इम्युनो बायो सेंसर विकसित किया है। इस बीमारी का पता करने के लिए कई पुराने तरीके उपलब्ध हैं, परंतु वो जल्दी और सटीक जानकारी देने के लिए उपयुक्त नही हैं। इससे सही समय पर बीमारी का पता लगाने में मदद मिलेगी और टीबी की रोकथाम और इससे होने वाली मृत्यु दर को कम करने में आसानी होगी।
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ऋषभ ने बताया कि टीबी के बैक्टीरिया द्वारा स्रावित प्रोटीन को बायो मार्कर की तरह और उसके विरुद्ध कुछ एंटी बॉडी का उपयोग करके यह इम्युनो बायो सेंसर विकसित किया है। इस बीमारी का पता करने के लिए कई पुराने तरीके उपलब्ध हैं, परंतु वो जल्दी और सटीक जानकारी देने के लिए उपयुक्त नही हैं। इससे सही समय पर बीमारी का पता लगाने में मदद मिलेगी और टीबी की रोकथाम और इससे होने वाली मृत्यु दर को कम करने में आसानी होगी।
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वर्ष 2019 में 79,144 लोगों की हो चुकी मृत्यु
उन्होंने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा हाल ही में भारत में टीबी बीमारी पर जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2019 में 24.04 लाख लोग इस बीमारी की चपेट में आए हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है।
अलावा रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2019 में टीबी के कारण 79,144 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। सालाना इस बीमारी की वजह से मृत्यु दर का बढ़ना एक गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे में यह इम्युनो बायो सेंसर काफी कारगर होगा।