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डॉ सिंह लोगों को पौधरोपण के साथ ही रक्तदान के लिए भी करते हैं प्रेरित, उपहार में देते हैं ये सौगात

Fri, 21 Dec 2018 04:42 PM IST
MANISH sachan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: MANISH sachan Updated Fri, 21 Dec 2018 04:42 PM IST
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story of dr. VK singh
डॉ वीके सिंह - फोटो : amar ujala
कुछ लोग नया और अलग करने की ख्वाहिश रखते हैं। ऐसे लोगों का समाज अनुसरण करता है और अगुआ मानता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है डॉ. वीके सिंह ने, जो पेशे से उच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पढ़ाई के दौरान बढ़ा कदम आज भी बढ़ता जा रहा है। यह शुरुआत अकेले की थी, लेकिन अब पूरा कारवां साथ है।
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लखनऊ के अलीगंज नेहरू बाल वाटिका निवासी डॉ. वीके सिंह को पर्यावरण प्रेम विरासत में मिला है। वह बताते हैं कि बचपन में किसी पौधे की पत्ती तोड़ने पर पिताजी टोकते थे। पहले तो यह बात बुरी लगती थी, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ ही वजह अपने आप समझ में आने लगी।
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सुल्तानपुर जिले के मूल निवासी डॉ. सिंह बताते हैं कि पिताजी की टोका टोकी का असर यह रहा कि पढ़ाई के दौरान ही शौकिया तौर पर पौधरोपण अभियान शुरू कर दिया। पर्यावरण से जुड़े स्लोगन, नारा लेखन और भाषण प्रतियोगिता में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते।

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खुद के साथ अपने साथियों को भी इसमें आगे बढ़ने को प्रेरित करते। इसके बाद यह धुन इस कदर सवार हुई कि शगल बन गई। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद जेएनयू से एमए और एमफिल, डीफिल किया।

वकालत के साथ ही पौधरोण के प्रति करते हैं जागरूक

वहां भी संगत पौध प्रेमियों से ही हुई। फिर लखनऊ आकर उच्च न्यायालय में वकालत शुरू कर दी। वकालत के साथ ही पौधरोपण अभियान को भी बढ़ाते रहे। वकालत के साथ लोगों को पौधरोपण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। 


वह बताते हैं कि यदि कोई मुवक्किल किसी दिन रुपये नहीं होने की बात करता है तो उसे यही सीख देते हैं कि उन रुपयों से घर में पौधे लगा लेना। वह दोबारा आता है तो पौधे का हालचाल पूछते हैं। किस मुवक्किल से कितने पौधे लगवाएं हैं, इसका भी बाकायदा डायरी में हिसाब रखते हैं। यह आंकड़ा करीब ढाई हजार से ऊपर पहुंच गया है।

डॉ. सिंह के पौध प्रेम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह किसी के घर जाते हैं तो एक पौधा ले जाना नहीं भूलते हैं। शादी-विवाह से लेकर जन्मदिन पार्टी में भी अन्य उपहार के साथ एक पौधे का उपहार जरूर साथ रखते हैं।

धीरे-धीरे बनती गई टीम

हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. सिंह करीब 26 बार रक्तदान कर चुके हैं। विभिन्न संगठनों की ओर से होने वाले रक्तदान शिविर में हिस्सा लेते हैं और खुद को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए दूसरों से अपील करते हैं कि रक्तदान से किसी तरह की कमजोरी नहीं आती है।

इसलिए हर व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। कर्मयोगी सेवा समिति, सुल्तानपुर फाउंडेशन सहित विभिन्न संस्थाओँ के जरिये रक्तदान शिविर का हर साल आयोजन करते हैं। इसी तरह गरीब बच्चों और निराश्रितों को वस्त्र व कंबल वितरण में भी लगे हैं।

डॉ. सिंह बताते हैं कि राजधानी के पार्कोँ में पौधे लगवा रहे हैं। अब तक करीब 10 हजार पौधे लगवा चुके हैं। यह शुरुआत अकेले किए थे, लेकिन अब उनके साथ करीब दर्जनभर लोगों की टीम है। टीम का सदस्य जहां भी जाता है, लोगों को पौधे लगाने की सीख देते हैं। अलीगंज के विभिन्न पार्कों के अलावा गोमती तट, बैकुंठधाम आदि स्थानों पर भी पौधे लगवाएं हैं। बाकायदा इन पौधों की देखरेख के लिए भी वक्त निकालते हैं।
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