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ऋतु सुहास ने कराया दिव्यांगों को शक्ति का अहसास, किया मतदान के लिए जागरुक
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 03 Oct 2017 10:28 PM IST
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ऋतु सुहास
- फोटो : amar ujala
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वह सरकारी अधिकारी हैं। देश और समाज के लिए भी कुछ करने का जज्बा लिए पूरी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभा रही है। अपनी इसी जिजीविषा से उन्होंने एक बड़ी चुनौती को सामान्य बना दिया। जो दिव्यांग मतदान केंद्रों तक जाना नहीं चाहते थे, उनके मतदान की ताकत समझायी।
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मतदान केंद्रों को दिव्यांगों की पहुंच में लाने की पहल की। यही नहीं एक ‘बूथ दोस्त’ नाम से एक एप भी बनाया, जिससे उन्हें मोबाइल फोन पर ही अपने बूथ की जानकारी मिल सके और वह लोकतंत्र के निर्माण में अपनी भागीदारी कर सके। ये है ऋतु सुहास। वह पीसीएस अधिकारी हैं।
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इन दिनों लखनऊ में उप संचालक चंकबंदी के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह लोकसभा चुनाव के दौरान आजमगढ़ में एसडीएम के पद पर तैनात थी। इस तैनाती के दौरान उन्होंने महसूस किया कि दिव्यांगजन मतदान जैसे लोकतंत्र के महापर्व से दूर हैं। इसके पीछे मतदान केंद्रों तक उनकी पहुंच में न होना था और न ही उन्हें इसके प्रति जागरूकता थी। सबसे पहले उन्होंने सघन सर्वे कराकर आजमगढ़ में दिव्यांग वोटर खोजने का कार्य किया। इस सर्वे के बाद दिव्यांग वोटरों की एक बड़ी संख्या लगभग 30 हजार सामने आई।
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ये आंकड़े चौंकाने वाला था। क्योंकि सरकारी आंकड़ों में जो दिव्यांग पंजीकृत थे, उनकी संख्या बहुत कम थी। सही-सही आंकड़ा सामने आने के बाद उन्होंने अलग-अलग दिव्यांगता के हिसाब से सबको वर्गीकृत किया ताकि उनकी जरूरत के अनुसार मतदान केंद्रों को तैयार किया जा सके। इसी के साथ ऋतु ने एनआईसी की मदद से ‘बूथ दोस्त नाम का एक टू वे एप भी बनवाया था। इस एप में वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना, बूथ की लोकेशन के साथ ही बीएलओ से लेकर डीएम के नंबर तक की जानकारी उसमें उपलब्ध थी।
दिव्यांगों की जागरूकता के लिए वोट मैराथन कराई, जिससे हताश लोगों में लोकतंत्र के मेले में भागीदारी के लिए मनोबल बढ़ाया जा सके। मतदान के बारे में जानकारी देने के लिए दिव्यांग वोटरों से गाना गाया। मूक-बधिर लोगों के लिए साइन लैंग्वेज में गाना तैयार कराया। इसके अलावा लगभग 800 अंडर ट्रेनी लेखपालों को प्रत्येक दिव्यांग से मिलकर एक संकल्प पत्र भरवाने का कार्य किया। प्रत्येक दिव्यांग को एक दिव्य पर्ची दी।
यहां तक कि उनको मॉक पोल के माध्यम से वोट डालने की प्रशिक्षण भी दिया गया। इसमें एक बूथ बनाकर आर्टिफिशियल ईवीएम से उन्हों वोट डालने के तरीके की जानकारी। दृष्टि बाधितों के लिए विशेष ब्रेल लिपि की पर्चियां छपवाईं, जिससे वह भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें। इस कार्य के लिए उन्हें गर्वनर और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने सम्मानित किया है।