फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   pradeep verma ploughed sugarcane field with the help of bike in ambedkar nagar

अंबेडकरनगर के इस युवक ने बनाया खेत की जुताई का नायाब तरीका, आप भी अपनाएं ये तकनीक

Wed, 28 Mar 2018 03:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबेडकरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबेडकरनगर Updated Wed, 28 Mar 2018 03:26 PM IST
विज्ञापन
pradeep verma ploughed sugarcane field with the help of bike in ambedkar nagar
बाइक से गन्ने के खेत की जोताई करते प्रदीप - फोटो : amar ujala
ट्रैक्टर व बैल के माध्यम से खेत जुताई तो सभी करते हैं, लेकिन अकबरपुर तहसील अंतर्गत बरधाभिउरा निवासी एक युवक ने बाइक से गन्ना खेत की जुताई का नायाब तरीका निकाला है। युवक द्वारा खेत की जुताई का नायाब तरीका निकालने पर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विज्ञापन


बाइक से खेत की जुताई करने से न सिर्फ आर्थिक लाभ होता है, बल्कि गन्ने की फसल नुकसान होने से भी बचाव होता है। खेत की जुताई करने के लिए किसान ट्रैक्टर या फिर बैल का सहारा लेते हैं। इसमें उन्हें जहां अधिक धनराशि खर्च करना पड़ता है, वहीं समय पर मजदूर न मिलने से भी विभिन्न प्रकार की समस्या खड़ी होती है।
विज्ञापन


सबसे अधिक समस्या गन्ना के खेत की जुताई में सामने आती है। दरअसल एक बीघा गन्ना खेत की जुताई करने में लगभग दो हजार रुपये खर्च होता है। इसके अलावा ट्रैक्टर या फिर बैल के माध्यम से जुताई करने में फसल को भी नुकसान होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे गन्ना किसानों को दोहरी चपत लगती है। इस समस्या को दूर करने के लिए अकबरपुर तहसील अंतर्गत बरधाभिउरा गांव निवासी प्रदीप वर्मा ने नायाब तरीका निकाला है। उसने गन्ना जुताई के लिए न तो ट्रैक्टर का प्रयोग किया और न ही बैल का।
 

बाइक से जुताई करने पर हुई आर्थिक बचत

pradeep verma ploughed sugarcane field with the help of bike in ambedkar nagar
खेत की जुताई करते प्रदीप - फोटो : amar ujala

उसने तीन फार वाला एक कल्टीवेटर उसने खुद ही बनाया। उसे बाइक के पीछे बांध दिया। इसके बाद वह बाइक लेकर खुद ही गन्ने के खेत में जुताई के लिए उतर पड़ा। लगभग डेढ़ घंटे में उसने एक बीघा गन्ना के खेत की जुताई कर डाला।

प्रदीप ने बताया कि एक बीघा खेत की जुताई में मात्र दो लीटर पेट्रोल खर्च हुआ। कहा कि पौधा गन्ने के साथ साथ पेड़ी गन्ने की भी जुताई और अच्छी होती है। बाइक से जुताई करने से न सिर्फ आर्थिक बचत हुई, बल्कि फसल को नुकसान भी नहीं हुआ।

मजदूर की भी तलाश नहीं करनी पड़ी। कहा कि समय पर मजदूर न मिलने व ट्रैक्टर से जुताई के दौरान टायर से दबकर फसल को भी नुकसान होता था। इसे देखते हुए उसने बाइक से जुताई करने का मन बनाया।

इसमें सफलता भी मिली। अब वह अन्य खेत की भी जुताई बाइक से करेगा। जुताई को लेकर प्रदीप द्वारा निकाले गए नायाब तरीके को देखने के लिए बड़ी संख्या में अन्य लोग भी वहां जुटे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed