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लॉ स्टूडेंट्स ने खोला लीगल क्लीनिक, इसके जरिए इन महिलाओं को न्याय दिलाने का उठाया बीड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 21 Sep 2018 11:46 AM IST
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लोगों को विधिक सहायता करने वाले छात्रों का दल
- फोटो : amar ujala
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आम आदमी अगर किसी कानूनी मामले में फंस गए तो वह जानकारी के अभाव में इधर-उधर ही भटकता रहता है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिलता। ऐसे ही लोगों की मदद करने के उद्देश्य से विधि के कुछ छात्रों ने सिटी लीगल क्लीनिक संस्था का गठन किया है, जो न सिर्फ कानूनी प्रक्रियाओं से अनजान लोगों को विधिक सलाह दे रहा है बल्कि उनके साथ कोर्ट कचहरी जाकर पैरवी भी करवा रहा है।
कानून की पढ़ाई और साथ में असहाय व गरीब लोगों को न्याय दिलाने के लिए विधिक परामर्श देना और उनकी समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाना। लखनऊ के सिटी लॉ कॉलेज के बीए एलएलबी के छात्र ऐसी ही सामाजिक सरोकारों के लिए कार्य कर रहे हैं। वे पढ़ाई के दौरान ही अपने कानून की जानकारियों से असहाय तबके के लोगों को न्याय दिलाने में उनकी मदद कर रहे हैं।
कॉलेज के आठ विधि के छात्र शफी अहमद, आदर्श कुमार, अमरकांत पटेल, गौरव विश्वकर्मा, गरिमा यादव, आकांक्षा सिंह, अपूर्वा और पूजा ने मिलकर सिटी लीगल क्लीनिक संस्था का गठन किया है। यह एक ऐसा क्लीनिक है जो न्याय के लिए भटक रहे लोगों को विधिक सलाह दे रहे हैं।
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आदर्श कुमार ने बताया कि ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको यह मालूम नहीं है कि न्याय के लिए कहां, कैसे और किससे अपने केस को लेकर पैरवी करवाएं। यह क्लीनिक ऐसे लोगों की समस्या को हल करने का प्रयास करता है। क्लीनिक का गठन करने के बाद उन्होंने सबसे पहले एसिड अटैक से प्रभावित महिलाओं को न्याय दिलाने का बीड़ा उठाया।
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कानून की पढ़ाई और साथ में असहाय व गरीब लोगों को न्याय दिलाने के लिए विधिक परामर्श देना और उनकी समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाना। लखनऊ के सिटी लॉ कॉलेज के बीए एलएलबी के छात्र ऐसी ही सामाजिक सरोकारों के लिए कार्य कर रहे हैं। वे पढ़ाई के दौरान ही अपने कानून की जानकारियों से असहाय तबके के लोगों को न्याय दिलाने में उनकी मदद कर रहे हैं।
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कॉलेज के आठ विधि के छात्र शफी अहमद, आदर्श कुमार, अमरकांत पटेल, गौरव विश्वकर्मा, गरिमा यादव, आकांक्षा सिंह, अपूर्वा और पूजा ने मिलकर सिटी लीगल क्लीनिक संस्था का गठन किया है। यह एक ऐसा क्लीनिक है जो न्याय के लिए भटक रहे लोगों को विधिक सलाह दे रहे हैं।
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आदर्श कुमार ने बताया कि ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको यह मालूम नहीं है कि न्याय के लिए कहां, कैसे और किससे अपने केस को लेकर पैरवी करवाएं। यह क्लीनिक ऐसे लोगों की समस्या को हल करने का प्रयास करता है। क्लीनिक का गठन करने के बाद उन्होंने सबसे पहले एसिड अटैक से प्रभावित महिलाओं को न्याय दिलाने का बीड़ा उठाया।
टीम ने समस्याओं को एक मंच पर पहुंचाया
डेमो
टीम के हर सदस्य की भूमिका निर्धारित है। पहले प्रभावित महिलाओं की काउंसलिंग की गई और उनकी समस्याओं को सुना गया। फिर छात्रों ने न्याय दिलाने के लिए उनकी समस्याओं को लेकर यूपी स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी से संपर्क किया और केस को लेकर कोर्ट में उनकी पैरवी करवाने के लिए पहल की।
उनकी समस्याएं जानकर टीम हैरान रह गई। किसी पीड़िता के एफआईआर में बदलाव कर दिया गया था तो किसी का केस पिछले कई वर्षों से तारीखों के बीच झूल रहा था। कोई मुआवजे के लिए भटक रहा था। टीम ने सभी प्रकार की समस्याओं को एक मंच पर पहुंचाया।
इसके अलावा टीम समय-समय पर शहर में वृहद स्तर पर पौधरोपण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी करती है। आदर्श ने बताया कि वे अब बाराबंकी के एक गांव चांदवारा को गोद लेने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए प्रशासन से बात चल रही है। सब कुछ ठीक रहा तो वे इस गांव को गोद लेकर वहां के लोगों को जागरूक करेंगे और गांव के विकास के लिए कार्य करेंगे।
उनकी समस्याएं जानकर टीम हैरान रह गई। किसी पीड़िता के एफआईआर में बदलाव कर दिया गया था तो किसी का केस पिछले कई वर्षों से तारीखों के बीच झूल रहा था। कोई मुआवजे के लिए भटक रहा था। टीम ने सभी प्रकार की समस्याओं को एक मंच पर पहुंचाया।
इसके अलावा टीम समय-समय पर शहर में वृहद स्तर पर पौधरोपण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी करती है। आदर्श ने बताया कि वे अब बाराबंकी के एक गांव चांदवारा को गोद लेने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए प्रशासन से बात चल रही है। सब कुछ ठीक रहा तो वे इस गांव को गोद लेकर वहां के लोगों को जागरूक करेंगे और गांव के विकास के लिए कार्य करेंगे।