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महिलाओं और बच्चों को साफ सफाई के प्रति जागरूक कर रही हैं लखनऊ की सौम्या

Fri, 01 Feb 2019 04:17 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 01 Feb 2019 04:17 PM IST
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सौम्या चर्तुवेदी - फोटो : amar ujala

आज हाइजीन के अभाव में लाखों महिलाएं तरह-तरह की बीमारियों से जूझ रही हैं। न तो उन्हें नियमित इलाज मिलता है और न ही रोगों से बचने की सही जानकारी। मलिन बस्तियों की हालत तो बहुत ही खराब है। ऐसी ही बस्तियों में महिलाओं और बच्चों को हाईजीन, साफ-सफाई व सेहत के प्रति जागरूक करने में जुटी है सौम्या चतुर्वेदी।

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सौम्या मलिन बस्तियों में लोगों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी जुटी है। पिछले कई वर्षों से महिलाओं व बच्चों को जागरूक करने का अभियान चला रही लखनऊ की गोमतीनगर निवासी सौम्या चतुर्वेदी बताती है कि वह एक इमेज कंसल्टेंसी से जुड़ी हैं और दफ्तर से समय निकालकर लोगों को जागरूक कर रही है।

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फर्स्ट इम्पैक्ट प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत सौम्या मलिन बस्तियों में ही नहीं बल्कि मध्य वर्गीय परिवारों के बच्चों और महिलाओं को भी सेहत के प्रति जागरूक करती है। सौम्या बताती है कि शुरुआत में अकेले ही मलिन बस्तियों में जाकर लोगों को साफ-सफाई और पढ़ाई के लिए जागरूक करना शुरू किया।

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धीरे-धीरे लोग जुड़ने लगे तो समाजसेवा का छोटा सा प्रयास अब अभियान में बदल गया है। आज सैकड़ों बच्चे और महिलाएं अभियान से जुड़ चुके हैं। अब उनके रहन-सहन व जीवनशैली में बड़ा परिवर्तन भी देखने को मिला है। मन को खुशी होती है जब अपने प्रयासों को सफल होते हुए देखती हूं। मेरे इस काम में पति संजीव शर्मा ने बहुत ही अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने हर कदम पर मेरा साथ निभाया और अभियान का हिस्सा बने।

 

महिलाओं में पैदा करती हैं नेतृत्व क्षमता

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सौम्या चर्तुवेदी - फोटो : amar ujala
सौम्या बताती हैं कि एक ओर महिलाओं, लड़कियों व बच्चों को हाइजीन के प्रति जागरूक करती हूं तो दूसरी ओर उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए सॉफ्ट स्किल्स भी सिखाती हूं। इसके लिए समय-समय पर शिविर लगाकर पर्सनैलिटी ग्रूमिंग से लेकर नेतृत्व क्षमता विकास की जानकारी देती हूं ताकि मलिन बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवारों की बेटियां जब नौकरी के लिए जाएं तो आत्मविश्वास से लबरेज रहे। 

छुड़वाई नशे की लत
मलिन बस्तियों में रहने वालों में अमूमन देखा गया है कि नशे की गिरफ्त में होते हैं। पुरुष ही नहीं, महिलाएं और बच्चे तक तंबाकू, बीड़ी आदि का सेवन करते हैं। यहां तक कि गर्भवती महिलाओं को जब बीड़ी पीते हुए देखती थी तो पीड़ा होती थी, इसलिए ग्रूमिंग के साथ-साथ नशामुक्ति अभियान भी चलाया और सैकड़ों लोगों को नशे की आदत से मुक्त करवाया। मैंने देखा कि लोगों में आत्मविश्वास व इच्छाशक्ति की कमी नहीं है, बस उसे जगाने की देरी है।

सरकारी प्रयासों की भी जरूरत
बस्तियों में रहने वालों की ही नहीं, बल्कि समाज में एक बड़ा तबका ऐसा है, जो स्वास्थ्य व रहन-सहन के प्रति जागरूक नहीं है। ऐसे में व्यक्तिगत प्रयासों के साथ-साथ सरकारी स्तर पर थोड़ी सी कोशिश हो जाए तो इन महिलाओं व बच्चों को एक नई दिशा मिल सकती है, लेकिन मेरे अभियान में अब और साथी जुड़ने लगे हैं, जिसकी मुझे खुशी है। 
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