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वंचित बच्चों को शिक्षित करती हैं एलयू स्टूडेंट हर्षिता, सामाजिक सरोकारों से जुड़ने की थी इच्छा
Fri, 18 Jan 2019 04:05 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 18 Jan 2019 04:05 PM IST
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हर्षिता मिश्रा
- फोटो : amar ujala
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कुछ लोगों ने सामाजिक सरोकारों से अपना नाता जोड़ लिया है। उन्हें जैसे ही कोई जरूरतमंद दिखता है, उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ा देते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्रा हर्षिता मिश्रा भी उन्हीं लोगों में से एक हैं। वे न केवल वंचित बच्चों को शिक्षित करती हैं बल्कि कमजोर वर्ग के बच्चों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक भी करती हैं।
हर्षिता एमए अंग्रेजी द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ वह सामाजिक कार्य में भी जुटी हैं। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे कमजोर वर्ग के बच्चों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करती हैं। हर्षिता बताती हैं कि इन सरकारी स्कूलों में ज्यादातर बच्चे इसलिए आते हैं कि यहां पर उन्हें मध्यान्ह भोजन मिलता है।
इसी के सहारे वह शिक्षा भी ग्रहण कर लेते हैं। लेकिन स्वास्थ्य और स्वच्छता के मामले में ये बच्चे काफी पिछड़े हैं। उनके परिवारीजन भी ध्यान नहीं देते। वो उनके बीच जाती हैं और बच्चों को जागरूक करती हैं, खासकर बालिकाओं को। रोज सुबह नहाकर स्कूल आने, सही ढंग से कपड़े व यूनिफॉर्म पहनने, बाल व नाखून ठीक रखने, उठने-बैठने के तरीके के बारे में बताती हैं।
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घर और बाहर रहन-सहन का तरीका क्या है, इसके बारे में विस्तार से समझाती हैं। वहीं खुद को स्वच्छ रखने के साथ ही आसपास के क्षेत्र को भी स्वच्छ रखने के प्रति जागरूक करती हैं। हर्षिता ने बताया कि इन मामलों के बारे में बच्चों के परिवारीजन भी ज्यादा कुछ नहीं कहते। लेकिन जब उनको जागरूक किया जाता है तो बच्चों में स्वच्छ रहने की इच्छा जागृत होती है। बच्चों को जागरूक करने का कार्य उन्होंने तब शुरू किया जब वह बीए की छात्रा थीं.
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हर्षिता एमए अंग्रेजी द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ वह सामाजिक कार्य में भी जुटी हैं। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे कमजोर वर्ग के बच्चों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करती हैं। हर्षिता बताती हैं कि इन सरकारी स्कूलों में ज्यादातर बच्चे इसलिए आते हैं कि यहां पर उन्हें मध्यान्ह भोजन मिलता है।
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इसी के सहारे वह शिक्षा भी ग्रहण कर लेते हैं। लेकिन स्वास्थ्य और स्वच्छता के मामले में ये बच्चे काफी पिछड़े हैं। उनके परिवारीजन भी ध्यान नहीं देते। वो उनके बीच जाती हैं और बच्चों को जागरूक करती हैं, खासकर बालिकाओं को। रोज सुबह नहाकर स्कूल आने, सही ढंग से कपड़े व यूनिफॉर्म पहनने, बाल व नाखून ठीक रखने, उठने-बैठने के तरीके के बारे में बताती हैं।
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घर और बाहर रहन-सहन का तरीका क्या है, इसके बारे में विस्तार से समझाती हैं। वहीं खुद को स्वच्छ रखने के साथ ही आसपास के क्षेत्र को भी स्वच्छ रखने के प्रति जागरूक करती हैं। हर्षिता ने बताया कि इन मामलों के बारे में बच्चों के परिवारीजन भी ज्यादा कुछ नहीं कहते। लेकिन जब उनको जागरूक किया जाता है तो बच्चों में स्वच्छ रहने की इच्छा जागृत होती है। बच्चों को जागरूक करने का कार्य उन्होंने तब शुरू किया जब वह बीए की छात्रा थीं.
साहित्य का भी करती हैं प्रचार-प्रसार
सामाजिक सरोकारों से जुड़ने की इच्छा हर्षिता में स्कूली दिनों से ही थी। जब वो कक्षा सात में थीं तबसे उन्होंने अपने घर में काम करने वाले कामगारों के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। कामगारों के बच्चे स्कूल नहीं जाते थे, उनको अक्षर पहचानना और उसे लिखना सिखाया।
जब उनके घर का मरम्मती कार्य चला तब कई मजदूरों के बच्चे उनके साथ आते थे। वह उनको पढ़ाने लगीं। यह हर्षिता का ही प्रयास है कि आज उनके घर पर काम करने वाली महिला ने फिर से पढ़ाई करने की इच्छा जताई है।
सालों पहले उसने स्कूल छोड़ दिया था, अब वह हर्षिता की मदद से फिर से पढ़ाई शुरू कर रही है। इसके अलावा वह सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री समेत खाद्य पदार्थ वितरित करती हैं। वहीं वो साहित्य के प्रचार-प्रसार भी करती हैं।
जब उनके घर का मरम्मती कार्य चला तब कई मजदूरों के बच्चे उनके साथ आते थे। वह उनको पढ़ाने लगीं। यह हर्षिता का ही प्रयास है कि आज उनके घर पर काम करने वाली महिला ने फिर से पढ़ाई करने की इच्छा जताई है।
सालों पहले उसने स्कूल छोड़ दिया था, अब वह हर्षिता की मदद से फिर से पढ़ाई शुरू कर रही है। इसके अलावा वह सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री समेत खाद्य पदार्थ वितरित करती हैं। वहीं वो साहित्य के प्रचार-प्रसार भी करती हैं।