मिसाल: खुद के साथ परिवार भी संक्रमित हुआ, पर ठीक होते ही मरीजों की सेवा में जुट गए डॉक्टर दंपती
डॉ. विक्रम सिंह और डॉ. मृदु सिंह बताते हैं कि वे खुद संक्रमित थे। इस दौरान तमाम लोगों के फोन आते थे और व्हाट्सएप पर रिपोर्ट आती थी। यह देख कभी भी झुंझलाहट नहीं हुई। क्योंकि चिकित्सा पेशे में आते वक्त इस बात की शपथ ली गई थी कि दूसरों की मदद हर हाल में करनी है।
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कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही जंग में कई चिकित्सक ऐसे भी हैं जो वायरस से लड़ते-लड़ते खुद बीमार हो गए। परिवार संक्रमित हो गया, लेकिन ठीक होते ही दोबारा मरीजों की सांसें बचाने मैदान में डटे हैं। ऐसे ही डॉक्टर दंपती है डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह और उनकी पत्नी डॉ. मृदु सिंह। दोनों कोरोना वार्ड से लेकर व्हाट्सएप तक हर मरीज के संपर्क में रहते हुए निरंतर उन्हें सलाह दे रहे हैं।
संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह और परिवार कुछ दिन पहले वायरस की चपेट में आ गए। डॉ. दंपती के साथ बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों की हालत गंभीर हो गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बुलंद हौसले के साथ होम क्वारंटीन में रहे। धीरे-धीरे पूरा परिवार वायरस को मात देने में कामयाब रहा। डॉ. विक्रम बताते हैं अस्पतालों में बेड की समस्या थी। हम लोग इलाज की बारीकियों से वाकिफ थे। ऐसे में परिजनों को लेकर घबराहट नहीं हुई।
सभी लोग पॉजिटिव थे इसलिए भी समस्या कम हो गई। क्योंकि खुद के संक्रमित होने का भय नहीं था। जिस दिन तेज बुखार हुआ उस दिन शरीर साथ नहीं दे रहा था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। क्योंकि पता था कि हिम्मत हारने का मतलब है कि पूरा परिवार का हौसला तोड़ना। दवाई लेते रहे। वृद्ध परिजनों के ऑक्सीजन लेवल को बनाए रखने के लिए कई बार प्रोन पोजिशन भी अपनाया। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई। अब फिर से इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक मरीजों को देख रहे हैं।
दूसरों की परेशानी को महसूस करने की जरूरत
डॉ. विक्रम सिंह और डॉ. मृदु सिंह बताते हैं कि वे खुद संक्रमित थे। इस दौरान तमाम लोगों के फोन आते थे और व्हाट्सएप पर रिपोर्ट आती थी। यह देख कभी भी झुंझलाहट नहीं हुई। क्योंकि चिकित्सा पेशे में आते वक्त इस बात की शपथ ली गई थी कि दूसरों की मदद हर हाल में करनी है। जिस तरह से हम अपने परिजनों को लेकर चिंतित थे उसी तरह से दूसरे लोग भी अपने परिजनों को बचाने में जुटे हुए थे। इसलिए जिसकी भी कॉल आती उसे हम लोगों ने हर हाल में सलाह दी। लोगों को दवा, बचाव की तकनीक के साथ ही हौसला भी बढ़ाते रहे। ऐसे तमाम गंभीर मरीज हैं, जिन्हें मोबाइल पर परामर्श देकर ठीक किया गया है।
हर स्तर पर सावधानी की जरूरत
डॉ. विक्रम सिंह कहते हैं कि अभी भी हर स्तर पर सावधानी बरतने की जरूरत है, जो लोग वायरस की चपेट में आने के बाद ठीक हो गए हैं अथवा टीकाकरण करा लिया है वह भी हर हाल में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का प्रयोग करें। कोरोनावायरस का असर कम होता नजर आ रहा है, लेकिन हमें सावधानी हर स्तर पर बरतनी होगी। हर व्यक्ति अगर सावधानी बरतता है तो यह धीरे-धीरे सामान्य फ्लू की तरह हो जाएगा और जानलेवा साबित नहीं होगा, लेकिन अभी जो हालात हैं उसमें किसी भी तरह की लापरवाही सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डाल सकती है।