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राज्यपाल ने सराहा: लॉकडाउन में जन्मा बाल लेखक, महज 11 साल की उम्र में लिख डाली ‘वन एंड हॉफ ईयर’
Mon, 18 Oct 2021 01:01 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 18 Oct 2021 01:01 PM IST
सार
अभियांश शुक्ला ने लॉकडाउन में हुए अनुभवों के आधार पर मात्र 11 साल की उम्र में ही एक किताब लिख डाली। उनकी सराहना प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने भी की।
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अभियांश शुक्ला
- फोटो : amar ujala
विस्तार
जब हम सच्चाई या फिर कल्पना के करीब होते हैं, तब जन्म लेते हैं शब्द। डर-दहशत, खुशी-हंसी, प्रेम-नफरत जैसी संवेदनाएं जब हमें झकझोरती हैं तो सृजन या विध्वंस के कई रूप सामने आते हैं। सृजनात्मकता की इसी कड़ी में एक नाम जुड़ा है अभियांश शुक्ला का। उम्र महज 11 साल, ला-मार्टिनियर ब्वॉयज कॉलेज में 6वीं के छात्र अभियांश इन दिनों अपनी पुस्तक ‘वन एंड हॉफ ईयर’ के लिए चर्चा में हैं। उनकी यह पुस्तक कोरोना काल के कुछ अच्छे तो कुछ उम्मीद भरे अनुभवों पर आधारित हैं। इस किताब के लिखे जाने की कहानी अभियांश ने खुद सुनाई।
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खेलकूद, स्कूल, दोस्त, पढ़ाई की कमी खली, इसे डायरी में लिखता रहा
अभियांश से जब आप बात करेंगे तो आपको यकीन नहीं होगा कि आप किसी 11 साल के छोटे से बच्चे से बात कर रहे हैं। अपनी किताब को लेकर उनकी सोच एकदम स्पष्ट है, एक-एक शब्द उन्हें याद हैं। कहते हैं कि लॉकडाउन हुआ तो खेलकूद, स्कूल, दोस्त, पढ़ाई की कमी बहुत अखर रही थी। समझ ही नहीं आ रहा था कि हम लोग कब तक ताले में रहेंगे। मुझे लगा यह मेरी ही नहीं, मेरे दोस्तों की भी दिक्कत होगी। बस उसे डायरी में लिखने लगा।
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बुरे वक्त से उबरने में मदद करता है लिखना और पढ़ना
खास बात है कि अभियांश ने एक तरफ पुस्तक में जहां उन अनुभवों को शब्द दिए हैं, जो उन्हें समाचारों से, अपने घर में, अपने डॉक्टर माता-पिता के बीच संवाद से मिले। एक तरफ कोरोना से लोगों की मौत जहां डर और दहशत से सहमे लोगों की कहानी कहती है तो दूसरी तरफ कोरोना योद्धाओं की कोशिशों के जरिए एक उम्मीद जगाती है ये किताब। बाल लेखक ने पहले और दूसरे लॉकडाउन के बीच मिले अनुभवों को लिपिबद्ध किया है। कुल 13 चैप्टर वाली इस किताब में आने वाले नए खतरों को लेकर भी आगाह किया है और तीसरी लहर को लेकर अपनी राय रखी है।
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राज्यपाल ने भी सराहा: अभियांश ने अपनी ये किताब सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट स्व. डॉ. एपी दुबे को समर्पित की है। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने उनकी इस किताब की सराहना की और लिखा है कि इस बच्चे की लोगों को जागरूक करने की पहल सराहनीय है और नई उम्मीद जगाती है।