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राम मंदिर ट्रस्ट पर संतों ने मोदी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा तो गृहमंत्रालय ने संभाली स्थिति

Thu, 06 Feb 2020 08:41 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: प्राची प्रियम Updated Thu, 06 Feb 2020 08:41 PM IST
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Ayodhya Ram Mandir latest news Saints and Digambar Akhara mahants not happy with the trust
राम मंदिर ट्रस्ट - फोटो : अमर उजाला

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट 'श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' में महंत नृत्यगोपाल दास का नाम न होने से शीर्ष संत-धर्माचार्यों ने सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। जिस पर आनन-फानन गृह मंत्रालय ने अयोध्या के अफसरों के जरिए स्थिति संभाली और विरोध में दोपहर तीन बजे होने वाली संतों की बैठक रद्द करवाई।

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अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब संसद में अयोध्या में भव्य राममंदिर बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र करके नए ट्रस्ट श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र बनाने का एलान किया तो यहां के संत-धर्माचार्य समेत अयोध्यावासी महंत नृत्यगोपालदास को इसका संस्थापक अध्यक्ष तय मान रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे अंधियारा गहराया नए-नए नाम सामने आते गए।
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गृह मंत्रालय के अवर सचिव खेला राम मुर्मू ने बुधवार को 100 रुपये के स्टांप पेपर पर ट्रस्ट पंजीकृत कराया और फिर उसे के परासरन को स्थानांतरित कर दिया। 15 सदस्यीय ट्रस्ट के स्थायी नौ सदस्यों में श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास समेत अयोध्या के किसी शीर्ष संत का नाम नहीं था। विहिप-आरएसएस की चर्चा में चल रहे नामों का भी अतापता नहीं था।

महंत नृत्यगोपालदास की गृहमंत्री से कराई गई बात

शीर्ष प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि अध्यक्ष बनाने का दावा करने वाले राज्य व केंद्र सरकार के जिम्मेदार लोगों से महंत नृत्यगोपाल दास ने अपना नाम न देख बुधवार को ही विरोध जताया। वे तब लखनऊ में थे, राज्य के जिम्मेदार लोगों के साथ उनकी गृहमंत्री अमित शाह से भी बात कराई गई। इस बीच बृहस्पतिवार को महंत नृत्य गोपालदास अयोध्या लौटे तो नाराज संतों-महंतों ने मणिरामदास की छावनी जाकर उनसे बात की।

इस दौरान महंत नृत्यगोपालदास बेहद तल्ख नजर आए। सरकार व उसके नए ट्रस्ट के खिलाफ मुखर हो गए। विरोध बढ़ता देख जिला प्रशासन ने राज्य सरकार व केंद्रीय गृह मंत्रालय को हालात की जानकारी दी। अंतत: फिर गृह मंत्रालय सक्रिय हुआ और नृत्यगोपालदास की मान-मनौव्वल की गई। जिसके बाद दोपहर तीन बजे संतों की सरकार के विरोध में होने वाली बैठक रद्द कर दी गई।

बेहद तल्ख थे संत

- महंत नृत्य गोपाल दास बृहस्पतिवार को अयोध्या लौटे तो, सुबह उनके यहां राममंदिर आंदोलन से जुड़े दर्जनों शीर्ष संत मिलने मणिरामदास की छावनी पहुंचे। बंद कमरे में घंटे भर चर्चा के बाद महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि सरकार का नया ट्रस्ट अयोध्या वाले स्वीकार नहीं करेंगे। इसमें राजनीतिक लोग कैसे शामिल किए गए।

दिगबंर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि राममंदिर के लिए जिन लोगों ने जिंदगी खपा दी, उनकी उपेक्षा करने वाली सरकार का संत विरोध करेंगे। तय हुआ कि दोपहर तीन बजे विरोध सभा करके प्रधानमंत्री को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

महंत गिरिशपति त्रिपाठी, संत समिति के अध्यक्ष कंहैयादास रामायणी, श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महंत शशिकांत दास, महंत गिरीश दास आदि संतों की उपेक्षा खासकर महंत नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष न बनाए जाने से बेहद नाराज थे।

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