फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   anshulika from lucknow secures place in forbes magazine

लखनऊ की अंशुलिका फोर्ब्स मैग्जीन में शामिल, जानें उनकी कहानी

Sat, 19 Mar 2016 03:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 19 Mar 2016 03:28 PM IST
विज्ञापन
anshulika from lucknow secures place in forbes magazine

राजधानी की अंशुलिका दुबे को फोर्ब्स मैग्जीन द्वारा एशिया के ऐसे टॉप 30 उद्यमियों में शामिल किया गया है जो 30 वर्ष से कम उम्र के हैं। अपनी ऑनलाइन कंपनी के जरिए वे ऐसे प्रोजेक्ट्स को फंडिंग में मदद करती हैं जो क्रिएटिव हैं, लेकिन पैसों की कमी की वजह से फंसे हुए हैं। अमर उजाला ने उनसे बात कर उनके इस अनूठे प्रयास के बारे में जाना।

विज्ञापन


लखनऊ के गोमतीनगर के एक पब्लिक स्कूल से पास आउट अंशुलिका ने बताया कि वे कॉमर्स स्टूडेंट थीं और कुछ अलग करने की इच्छा रखती थीं। 2004 में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस में इंग्लिश लिटरेचर ऑनर्स कोर्स में एडमीशन लिया।
विज्ञापन


इसे पूरा करने पर उन्हें एक कंसल्टेंसी कंपनी मैकिंजी के साथ यूएस में काम करने का मौका मिला। अंशुलिका बताती हैं कि लेकिन साढे च़ार वर्ष बाद वे लौट आईं। उन्हें कुछ अलग करना था। 2012 में मुंबई में रहकर  wishberry.in  की शुरुआत की।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसमें उनकी दोस्त सहयोगी रहीं। वहीं वे बताती हैं कि अपनी स्टार्ट अप कंपनी का विचार उन्हें ऐसे लोगों से मिलकर आया जो अनोखे और क्रिएटिव विचार रखते थे, लेकिन फंड नहीं होने से उन्हें हकीकत में नहीं ढाल पा रहे थे। ऐसे में उन्हें विचार आया कि अगर उनके काम को पसंद करने वाले ही अगर उन्हें फंड करें तो मुश्किल आसान हो सकती है।

यहीं वे विशबैरी शुरू हुआ। कुछ शॉर्ट फिल्में, गायकों के एल्बम और लेखन को फंड किया जाने लगा। अंशुलिका बताती हैं कि उन्हें हर महीने 60 से 70 प्रोजेक्ट लेकर क्रिएटिव आर्टिस्ट्स फंड की उम्मीद से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन सभी के लिए मदद जुटा पाना संभव नहीं है।

ऐसे में हर महीने 10 प्रोजेक्ट चुनकर उन पर काम किया जाता है। उनके इस प्रयास से अब तक 250 से अधिक प्रोजेक्ट्स को साढ़े करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई जा चुकी है। ये सभी फाइन आर्ट्स, फिल्म, संगीत, उद्योग और लेखन के 10 क्षेत्रों से जुड़े हैं।

...ऐसे काम करती है ये कंपनी

anshulika from lucknow secures place in forbes magazine

अंशुलिका ने बताया कि अगर कोई प्रोजेक्ट किसी खास क्षेत्र से संबंधित है, जैसे शॉर्ट फिल्म, तो उससे जुड़े सोशल मीडिया माध्यमों, बड़े स्टार्स, उनके फैन ग्रूप्स, आदि को उनके बारे में जानकारी प्रसारित की जाती है।

वे मुख्यत: एक कम्युनिकेशन बनाने वाली सुरंग का काम करती हैं। इसके लिए पोस्टर और वीडियो बनाए जाते हैं, विभिन्न मीडिया का भी सहारा लिया जाता है।

इसमें दुनिया भर के नागरिक सहयोग के लिए आगे आते हैं। अब तक 12 हजार से अधिक नागरिक मदद में योगदान दे चुके हैं। नागरिकों ने 100 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की मदद दी है। ये छोटी बड़ी राशियां मिलकर बड़ा आकार लेती हैं और किसी को अपना प्रोजेक्ट पूरा करने में मदद करती हैं।

मदद करने वालों को इसके बदले में एक्क्लूसिव तोहफे मिलते हैं। इनमें फिल्म सेट पर विजिट से लेकर प्रीमियर में जाने, कलाकारों के हस्ताक्षरयुक्त सामान पाने जैसे तोहफे शामिल हैं। वे स्पष्ट करती हैं कि यह फंडिंग सहयोग के रूप में होती है, इसके बदले में कोई आर्थिक रिटर्न या लाभांश नहीं दिया जाता।

अंशुलिका ने बताया कि उनके पिता शशिप्रकाश दुबे और और मां वरालिका दुबे दोनों इंजीनियर हैं। पिता यूपी पावर कॉरपोरेशन से रिटायर हो चुके हैं तो मां अभी भी कार्यरत हैं। अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर दोनों बेहद खुश हैं।

परिवार को थी चुने जाने की उम्मीद

anshulika from lucknow secures place in forbes magazine

अंशुलिका को फोर्ब्स मैग्जीन के संपादक की ओर से ई-मेल पर इस बारे में सूचना दी गई। उन्हें पिछले महीने ही सूचना दे दी गई थी कि वे अंतिम राउंड्स में पहुंची हैं, इस वजह से परिवार को भी उम्मीद थी कि वे लिस्ट में चुनी जा सकती हैं।

अपने काम पर संतोष जाहिर करते हुए अंशुलिका कहती हैं कि उन्हें सबसे बड़ी खुशी है कि वे उन लोगों को मदद कर पा रही हैं जो अपने लिए नहीं समाज और अपने क्षेत्र को अपनी क्रिएटिविटी से कुछ देना चाहते हैं।

फोर्ब्स के मुताबिक क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स के लिए जनता के बीच से फंड जुटाने का भारत का प्लेटफॉर्म विशबैरी डॉट इन तैयार करने वाली अंशुलिका दुबे इसकी सीओओ हैं। उनके प्रतियोगियों ने जितने फंड इसी तरह के प्रयास से जुटाए उससे तीन गुना फंड वे जुटा चुकी हैं।

दो तिहाई मामलों में फंड जुटाने की उनमें काबिलियत है। दुबे सामाजिक क्षेत्र में विश्लेषक के तौर पर मैकिंजी एंड कंपनी में काम कर चुकी हैं जहां वे मैकिंजी नॉलेज सेंटर इंडिया के सामाजिक क्षेत्र विभाग में थीं। उन्होंने भारत में टीन्स फॉर ग्रीन की भी शुरुआत की जो प्राथमिक स्कूलों में पर्यावरण की शिक्षा पर काम कर रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed