West Asia Crisis LIVE: खाड़ी देशों की बैठक में यूएई ने लिया हिस्सा, US ने PAK में तैनात कर्मचारियों को बुलाया
पश्चिम एशिया की धरती पर जंग की आहट अब और तेज हो गई है। इस्राइल और अमेरिका के ईरान पर लगातार हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई पांचवें दिन भी जारी है। बमबारी तेज है और ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है। ऐसे में हालात बिगड़ते देख अमेरिकी गृह विभाग ने पश्चिम एशिया छोड़ना चाहने वाले अमेरिकियों के लिए तैयारी शुरू कर दी है। पश्चिम एशिया में तनाव से जुड़े सभी अपडेट्स इस लाइव ब्लॉग में पढ़ें...
पहले दिन का पूरा घटनाक्रम यहां पढ़िए: Israel-Iran War Live: हमलों के बीच रुबियो का इस्राइल दौरा रद्द; ईरान अपनी गलतियों का नतीजा भुगत रहा- हेगसेथ
दूसरे दिन का पूरा घटनाक्रम यहां पढ़िए:- Israel-Iran War News LIVE: हालिया हमलों में सात ईरानी सैन्य कमांडरों की मौत; तेहरान के अस्पताल पर भीषण हमला
तीसरे दिन का पूरा घटनाक्रम यहां पढ़िए: Israel-Iran War LIVE: ट्रंप की ईरान को चेतावनी, कहा- असली हमले अभी बाकी; ईरानी सुरक्षा प्रमुख बोले- हम तैयार
चौथे दिन का पूरा घटनाक्रम यहां पढ़िए: West Asia Crisis LIVE: ईरान में नई सरकार पर ट्रंप ने दिए बड़े संकेत; दुबई, दोहा और अबूधाबी में धमाकों से दहशत
लाइव अपडेट
खाड़ी देशों की बैठक में यूएई ने लिया हिस्सा
संयुक्त अरब अमीरात ने हाल ही में खाड़ी देशों की एक महत्वपूर्ण आपात बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में देश का प्रतिनिधित्व आंतरिक मामलों के मंत्री ने किया। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित की गई थी। यह अपनी तरह की पहली संयुक्त आपात बैठक थी, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) यानी अरब खाड़ी देशों की परिषद के सदस्य देशों के आपातकाल, संकट और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी और ऑपरेशन रूम के अधिकारी शामिल हुए।
यूएई के गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि यह बैठक क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा परिस्थितियों और अलग-अलग तरह की आपात चुनौतियों से निपटने के लिए तैयारी के स्तर को और बेहतर बनाना है।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने आपसी सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। साथ ही विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया। यूएई के गृह मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की बैठकें सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने, जानकारी साझा करने और किसी भी आपात स्थिति में मिलकर तेज और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं।
अमेरिका ने पाकिस्तान में कर्मचारियों को वापस बुलाया
अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच मध्य पूर्व और पाकिस्तान में अपने गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों को वापस बुलाने का आदेश दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के लिए यात्रा चेतावनी को लेवल-3 यानी ‘यात्रा पर पुनर्विचार करें’ तक बढ़ा दिया है। कुवैत, बहरीन, कतर और पाकिस्तान के लिए भी यही स्तर लागू है। अधिकारियों ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे तथा क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए यह कदम उठाया है। कतर में अमेरिकी दूतावास ने नियमित सेवाएं भी अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं।पश्चिम एशिया संकट के बीच रूस का बड़ा कदम, भारत को 95 लाख बैरल तेल भेजने को तैयार
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच रूस ने भारत को बड़ा आश्वासन दिया है। रूस ने कहा है कि वह भारत को 95 लाख बैरल कच्चा तेल भेजने के लिए तैयार है, ताकि आपूर्ति संकट के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके। मौजूदा हालात में भारत के कच्चे तेल के भंडार सीमित स्तर पर हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश के पास फिलहाल करीब 25 दिनों की मांग के बराबर ही कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। इसके अलावा डीजल, पेट्रोल और एलपीजी जैसे ईंधनों का स्टॉक भी सीमित है, जिससे आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।पश्चिम एशिया में अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से स्थिति और गंभीर हो गई है। ईरान द्वारा किए गए हमलों के बाद कई जहाजों पर हमले हुए, जिसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री मार्ग लगभग बंद हो गया है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि देश के करीब 40 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से होता है। ऐसे में आपूर्ति में बाधा आने से भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ी है। भारत के रिफाइनरी संयंत्र रोजाना लगभग 56 लाख बैरल कच्चे तेल का प्रसंस्करण करते हैं। ऐसे में रूस का यह प्रस्ताव भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे मौजूदा संकट के दौरान ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है
चीन और इस्राइल के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बातचीत, युद्ध रोकने पर जोर
चीन के विदेश मंत्री वांग यी और इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार के बीच मंगलवार को फोन पर बातचीत हुई। बातचीत के दौरान वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और परामर्श के जरिए होना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करने और बल प्रयोग से बचने की अपील की। वांग यी ने इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों का विरोध करते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई समस्याओं का समाधान नहीं करती। उन्होंने युद्ध को तुरंत रोकने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।ईरान से निकाले गए 25 चीनी नागरिक तुर्कमेनिस्तान होते हुए अपने घर के लिए रवाना हुए
3 मार्च को ईरान से तुर्कमेनिस्तान लाए गए 25 चीनी नागरिक 4 मार्च की सुबह अपने घर के लिए रवाना हो गए। निकाले गए चीनी लोग तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। तुर्कमेनिस्तान स्थित चीनी दूतावास के एक कार्य दल ने चेक-इन प्रक्रियाओं में सहायता की। तुर्कमेनिस्तान स्थित चीनी दूतावास के कार्यवाहक प्रभारी चोंग हुआ ने हवाई अड्डे पर उनसे मुलाकात करते हुए कहा, “मातृभूमि विदेशों में रहने वाले चीनी नागरिकों के लिए हमेशा एक मजबूत सहारा रहेगी। पार्टी और सरकार विदेशों में रहने वाले प्रत्येक चीनी नागरिक की सुरक्षा के लिए हमेशा चिंतित रहती है। दूतावास हमेशा अपने देशवासियों के साथ है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। हम अपने सभी देशवासियों को सुरक्षित और सुगम घर वापसी की शुभकामनाएं देते हैं।”ईरान में पढ़ रहे चीनी छात्र मा हैलोंग भी निकाले गए लोगों में शामिल थे। उन्होंने कहा, “जब हमें पहली बार युद्ध शुरू होने की खबर मिली, तो हम भयभीत हो गए थे, हमें डर था कि किसी भी क्षण गोले हमारे सिर पर गिरेंगे। सौभाग्य से, हमने तुरंत ईरान स्थित चीनी दूतावास से संपर्क किया, और हमें राहत मिली। दूतावास से संपर्क करना ऐसा लगा जैसे हम बचपन में अपने परिवार के साथ हों। हमें बहुत सुरक्षित महसूस हुआ। मार्च की शुरुआत में, तुर्कमेनिस्तान स्थित चीनी दूतावास ने एक नोटिस जारी किया और तुर्कमेनिस्तान से गुजर रहे चीनी नागरिकों को स्वदेश लौटने में आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए सीमा चौकी पर तुरंत एक कार्य दल भेजा। दूतावास ने कहा कि वह ईरान से निकाले गए चीनी लोगों की सहायता करने और उनके देशवासियों को सुरक्षित घर लौटने में मदद देने के लिए हर संभव प्रयास करता रहेगा।
'हमला करना मजबूरी', खाड़ी देशों से बोले ईरानी राष्ट्रपति
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने खाड़ी देशों से कहा है कि अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद तेहरान के पास जवाबी कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अरबी और फारसी में किए गए पोस्ट में कहा कि ईरान ने शुरुआत में कूटनीति के जरिए युद्ध टालने की कोशिश की थी, लेकिन लगातार हो रहे हमलों ने उसे जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया।पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों को आश्वस्त करते हुए कहा कि ईरान उनकी संप्रभुता का सम्मान करता है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी सुरक्षा केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। इस दौरान अराघची ने उन दावों को खारिज कर दिया कि ईरान ने कतर में केवल अमेरिकी हितों को निशाना बनाया था।