US Election Results: चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने ट्रंप को बधाई दी, कहा- मतभेद खत्म करने के लिए बातचीत हो
US Presidential Election Results 2024: अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। वे देश के 47वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने चुनाव में भारतवंशी डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वी कमला हैरिस को हराया। अब 20 जनवरी को ट्रंप शपथ लेंगे। इस बीच, चुनाव में उनकी प्रतिद्वंदी कमला हैरिस ने फोन कर ट्रंप को जीत की बधाई दी है। अमेरिकी चुनाव से जुड़े सभी ताजा अपडेट्स यहां पढ़ें...
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को महाकुंभ में आमंत्रित करेगा जूना अखाड़ा
अमेरिकी चुनाव में जीत पर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरि ने नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि ट्रंप की जीत से विश्व में भारत-अमेरिका के रिश्तों को नया आयाम मिलेगा। महंत हरि गिरि ने बताया कि महाकुंभ में ट्रंप को जूना अखाड़े की ओर से आमंत्रित किया जाएगा। आइए जानते हैं जूना अखाड़ा ने क्या कहा...पर्दे के पीछे से इन लोगों ने लिखी ट्रंप की जीत की इबारत
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप जीतकर इतिहास रच चुके हैं। हालांकि ये ट्रंप की सिर्फ निजी जीत नहीं हैं बल्कि एक एक टीम की जीत है, जिसकी रणनीति और प्रचार नीतियों की वजह से ट्रंप ने कमला हैरिस के खिलाफ कांटे के मुकाबले में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। ट्रंप की इस टीम में चुनावी रणनीतिकार, तकनीकी दिग्गज, खेल जगत की शख्सीयत आदि कई बड़े नाम हैं, तो वहीं कुछ ऐसे भी नाम हैं, जो चर्चा से पूरी तरह दूर रहे उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर अपने काम को अंजाम दिया और चुनाव नतीजों पर बड़ा असर डाला। तो आइए जानते हैं कि ट्रंप की टीम में कौन-कौन से नाम शामिल हैं...अमेरिका में सीआईए चीफ बनने की रेस में भारतवंशी कश्यप पटेल सबसे आगे
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब देश के नए राष्ट्रपति होंगे। उन्होंने चुनाव में अपनी डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वी और मौजूदा उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को हरा दिया है। एक बार फिर चार साल के अंतराल के बाद व्हाइट हाउस में प्रवेश करने को तैयार हैं। बताया जा रहा है कि ट्रंप और उनकी टीम आने वाले हफ्तों में अपने नए मंत्रिमंडल और प्रशासन के अन्य उच्च अधिकारियों को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। इनमें कश्यप 'काश' पटेल का नाम खासा चर्चा में है। पढ़ें पूरी खबर...अमेरिका ही नहीं, भारत का एक गांव भी मना रहा डोनाल्ड ट्रंप की जीत का जश्न
अमेरिका ही नहीं बल्कि भारत के एक छोटे गांव में भी रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी जीत का जश्न मनाया जा रहा है। यहां जश्न कोई हू हल्ला वाला नहीं है, बल्कि यहां चमक है चेहरों पर। इस खुशी का राज ये है कि इस गांव के लोगों को पता चल गया कि उनकी वंशज अमेरिका की अगली अगली 'सेकंड लेडी' होंगी। यानी की अमेरिका के अगले उपराष्ट्रपति जेडी वैंस की पत्नी उषा चिलुकुरी वैंस भारतवंशी हैं। उषा भारतीय मूल्यों और संस्कृति से काफी जुड़ी हुई हैं। उनकी रिश्ते में लगने वाली दादी शांतम्मा ने भी नतीजों पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, मेरा खुश होना बनता है क्योंकि उषा हमारी परिवार की हैं। पढ़ें पूरी खबर...'ट्रंप सत्ता में आने के बाद भारत-कनाडा विवाद सुलझाएंगे'
अमेरिका में अबकी बार ट्रंप सरकार। नतीजों ने न सिर्फ पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस पहुंचा दिया, बल्कि नए रिकॉर्ड भी बना दिए। उन्होंने न केवल व्हाइट हाउस की रेस जीती, बल्कि सीनेट व निचले सदन में भी बहुमत जुटाया। 132 साल में वह पहले ऐसे नेता बन गए, जिन्होंने निरंतरता टूटने के बावजूद चुनाव जीता। अब सवाल उठ रहा है कि ट्रंप के सत्ता में आने पर भारत-अमेरिका के संबंधों पर क्या कुछ असर पड़ेगा। ऐसे ही सवालों का 'इंडियन-अमेरिकन्स फॉर ट्रंप 2016' समिति के सदस्य डॉ. सुधीर पारिख ने जवाब दिया। पढ़ें पूरी खबर...उत्तर कोरिया को लेकर क्या हो सकता है डोनाल्ड ट्रंप का रुख
इसी तरह उत्तर कोरिया का मामला देखा जाए तो ट्रंप अपने पुराने कार्यकाल की नीति पर ही चल सकते हैं। पहली बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने कई बार उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच विवाद खत्म कराने के लिए किम जोंग-उन के साथ बैठक भी की। माना जाता है कि उत्तर कोरिया के बर्ताव में अनिश्चितता की वजह से आने वाले समय में ट्रंप को भी उसको साथ लाने में दिक्कत हो सकती है।खासकर उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों के मामले में बातचीत की मेज पर लाना कठिन काम होगा। हालांकि, अगर ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करवाने और पुतिन के साथ बेहतर रिश्ते स्थापित करते हैं तो तानाशाह किम जोंग-उन के साथ उनकी बातचीत का रास्ता आसान हो सकता है, क्योंकि रूस और उत्तर कोरिया के बीच संबंध काफी अच्छे हैं।
पीएम मोदी-डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत पर क्या बोला विदेश मंत्रालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि दोनों नेताओं के बीच बुधवार को फोन पर बातचीत हुई थी। विदेश मंत्रालय ने दोनों नेताओं के बीच बातचीत पर एक बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में अमेरिकी नेता की शानदार जीत की बधाई दी। पीएम ने ट्रंप से कहा कि यह जीत उनके नेतृत्व और दृष्टिकोण में अमेरिकी लोगों के गहरे भरोसे को दर्शाती है बयान में कहा गया, ‘‘ उन्होंने प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और कई अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।’’
राष्ट्रपति बनने के बाद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लिए क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप
दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर ट्रंप का रुख रूस-यूक्रेन संघर्ष के मुकाबले पूरी तरह अलग रह सकता है। ट्रंप इस्राइल और सऊदी अरब के कट्टर समर्थक रहे हैं। ऐसे में ईरान के मामले में उनका रुख और भी कड़ा हो सकता है।रूस-यूक्रेन युद्ध पर कैसा रहेगा ट्रंप का रुख
माना जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रुकवाने के वादे पर टिके रहेंगे। वह इसके लिए दोनों देशों को उन्हीं जगहों पर रुकने का प्रस्ताव दे सकते हैं, जहां उनकी सेनाएं अभी मौजूद हैं। हालांकि, ट्रंप की इस कोशिश से रूस को यूक्रेन के क्षेत्र में कब्जा करने में मदद मिलेगी, क्योंकि रूसी सेना फरवरी 2022 में हमले के बाद से अब तक यूक्रेन का काफी इलाका घेर चुकी है। इतना ही नहीं ट्रंप रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस मांग को भी मान सकते हैं, जिससे यूक्रेन को नाटो की सदस्यता नही मिलेगी। पढ़ें पूरी खबर...विवेक रामास्वामी ने की डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ
उद्यमी से राजनेता बने विवेक रामास्वामी ने राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप की वापसी को अमेरिका की वापसी बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस समय एक कठोर निर्णय लेने वाले ‘कमांडर-इन-चीफ’ की जरूरत है। राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल रहे रिपब्लिकन नेता रामास्वामी ने कहा, ‘‘यही कारण है कि डोनाल्ड ट्रंप आधुनिक इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति के मुकाबले सबसे बड़े अंतर से जीते। वह कोई विचारक या नीति विशेषज्ञ नहीं हैं। वह समझौता नहीं करने वाले एक अमेरिकी है। उन्हें अयोग्य ठहराया गया, दो बार मारने की कोशिश की गई। मीडिया में हमारे स्व-नियुक्त ‘श्रेष्ठ’ लोगों ने उन्हें गलत समझा, उन्हें कम आंका और संदेह किया। लेकिन यह सब बेअसर रहा। ’’