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Nirjala Ekadashi 2026 LIVE: निर्जला एकादशी व्रत का पारण कल, जानें पारण समय, महत्व और विधि

Thu, 25 Jun 2026 05:40 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 25 Jun 2026 05:40 PM IST
खास बातें

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Parana Time Katha in Hindi:  धर्मशास्त्रों और पद्मपुराण में निर्जला एकादशी के व्रत को अत्यंत श्रेष्ठ बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पूरे साल भर में आने वाली सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार किसी भी एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर करना सबसे उचित माना जाता है। आइए लाइव ब्लॉग में जानते हैं निर्जला एकादशी का  व्रत खोलने का शुभ मुहूर्त और इसकी संपूर्ण विधि।

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Nirjala Ekadashi 2026 Live Ekadashi Puja Vidhi Parana Time Daan Upay and Vrat Katha in Hindi
निर्जला एकादशी 2026 लाइव - फोटो : amar ujala

लाइव अपडेट

05:40 PM, 25-Jun-2026

Ekadashi Vray Paran Vidhi: निर्जला एकादशी 2026 व्रत पारण का समय

  • धार्मिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026 को किया जाएगा।
  • पारण का शुभ समय- 26 जून, सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक
  • इसी समय व्रत समाप्त कर भोजन और जल ग्रहण करना शुभ माना गया है।
05:20 PM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat Niyam: निर्जला एकादशी में कब पीना चाहिए पानी?

निर्जला एकादशी व्रत में एकादशी तिथि के दौरान पानी पीना वर्जित माना जाता है, क्योंकि यह व्रत निर्जला यानी बिना जल ग्रहण किए रखा जाता है। इसलिए इस व्रत में पानी पीने का सही समय अगले दिन द्वादशी तिथि पर, सूर्योदय के बाद पारण के दौरान माना गया है। द्वादशी तिथि पर सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के बाद प्रभु का स्मरण करते हुए सबसे पहले जल ग्रहण करें और फिर व्रत का पारण करें। इसके बाद फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण किया जा सकता है।
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04:51 PM, 25-Jun-2026

Ekadashi Mata Ki Katha: कौन हैं एकादशी माता?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में मुर नामक एक शक्तिशाली राक्षस ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। परेशान होकर देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। भगवान विष्णु ने मुर और उसकी सेना का सामना किया और भयंकर युद्ध हुआ।

युद्ध के दौरान जब भगवान विष्णु विश्राम करने गए, तब मुर उन पर हमला करने पहुंचा। उसी समय भगवान के दिव्य तेज से एक शक्तिशाली देवी प्रकट हुईं। उन्होंने मुर का वध कर देवताओं को मुक्ति दिलाई।

जब भगवान विष्णु जागे, तो उन्होंने देवी की वीरता से प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा। देवी ने प्रार्थना की कि उनके प्रकट होने वाले दिन व्रत रखने वाले सभी भक्तों के पाप नष्ट हों और उन्हें मोक्ष प्राप्त हो। भगवान ने यह वरदान दे दिया।

तभी से एकादशी व्रत की परंपरा शुरू हुई और इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है।
04:37 PM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat:  निर्जला एकादशी व्रत के लाभ

मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत को आयु और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसके अलावा यह व्रत कई जन्मों में जाने-अनजाने किए गए पापों को नष्ट करने में भी सहायक माना जाता है। इसी वजह से इस व्रत को पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से करने की सलाह दी जाती है।
04:05 PM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Update: निर्जला एकादशी व्रत पारण के समय क्या खाएं

व्रत का पारण करते समय सबसे पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए 'ॐ विष्णवे नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए, और इसके साथ ही तुलसी के पत्ते को मुख में रखना शुभ माना जाता है। इसके बाद गंगाजल का सेवन करना अच्छा माना जाता है। पारण के बाद भोजन हमेशा हल्का, सात्विक और शुद्ध ही रखना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होने की मान्यता है। 
03:47 PM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat Paran: निर्जला एकादशी व्रत पारण विधि

  • द्वादशी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
  • पद्म पुराण में बताया गया है कि भगवान विष्णु की पूजा गंध, धूप, फूल और सुंदर वस्त्रों के साथ करनी चाहिए। इसके साथ ही जल से भरे घड़े का संकल्प भी लेना चाहिए।
  • दान के लिए जल का घड़ा पहले से ही तैयार करके रख लेना चाहिए। द्वादशी तिथि पर इस घड़े का संकल्प करते हुए निम्न मंत्र का जाप करें -
    'देवदेव हृषीकेश संसारार्णवतारक, उदकुम्भप्रदानेन नय मां परमां गतिम्।'
    इसका अर्थ है - "हे देवों के देव हृषीकेश, जो संसार रूपी सागर से पार लगाने वाले हैं, इस जलयुक्त घड़े के दान से मुझे परम गति प्रदान करें।"
  • द्वादशी के दिन पूजा संपन्न करने के बाद व्रती को सबसे पहले ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए, और इसके बाद ही स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए। मान्यता है कि व्रत का पारण जल और तुलसी दल के साथ ही शुरू करना चाहिए।
  • पद्म पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति इस संपूर्ण विधि के साथ निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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03:31 PM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Vrat Parana: निर्जला एकादशी व्रत पारण का उल्लेख कहां

पद्म पुराण में वर्णित परंपरा के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत बहुत श्रद्धा और नियमों के साथ रखा जाता है। पंचांग के अनुसार यह व्रत 25 जून, गुरुवार को किया जाएगा। इस दिन भक्त प्रातःकाल भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करके पूरे दिन निर्जल उपवास रखते हैं। इसके अगले दिन, यानी द्वादशी तिथि पर, व्रत का पारण करने का विधान बताया गया है। इसलिए 26 जून को शुभ समय में विधिपूर्वक व्रत खोलना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।

03:11 PM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Live: निर्जला एकादशी पारण का महत्व

निर्जला एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है, क्योंकि यही व्रत का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। पारण का अर्थ है व्रत का विधिपूर्वक समापन करना। शास्त्रों के अनुसार, यदि समय पर द्वादशी तिथि के भीतर पारण नहीं किया जाए, तो व्रत अधूरा माना जाता है और उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। ऐसा विश्वास है कि उचित समय पर पारण करने से व्रती को व्रत का संपूर्ण पुण्य, आध्यात्मिक लाभ और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

02:54 PM, 25-Jun-2026

Nirjala Ekadashi Paran Time: कब करें निर्जला एकादशी व्रत का पारण?

निर्जला एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु 26 जून को प्रातः 5:25 बजे से 8:13 बजे के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशी तिथि के दौरान सुबह के समय व्रत खोलना सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है। इसलिए भक्तों को निर्धारित समय के भीतर विधि-विधान से पारण कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

02:46 PM, 25-Jun-2026

Nirjala EKadashi Daan: निर्जला एकादशी पर सत्तू का दान

निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर सत्तू का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गर्मी के दिनों में सत्तू शरीर को शीतलता और ऊर्जा प्रदान करता है, इसलिए इसका दान जरूरतमंद लोगों के लिए काफी लाभकारी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सत्तू दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और दूसरों की सहायता करने का अवसर भी मिलता है। यह दान सेवा, परोपकार और सद्भावना का प्रतीक माना जाता है।

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