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Ahoi Ashtami 2021 Puja Live: अहोई अष्टमी का व्रत आज, जानिए पूजा विधि और शुभ मुूहुर्त

Thu, 28 Oct 2021 06:32 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 28 Oct 2021 06:32 PM IST
खास बातें

Ahoi Ashtami 2021 Puja Vidhi Shubh Muhurat Live Updates: आज ( 28 अक्तूबर 2021) अहोई अष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माताएं संतान की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं।

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अहोई अष्टमी 2021 पूजा लाइव अपडेट: अहोई अष्टमी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। - फोटो : अमर उजाला

लाइव अपडेट

03:40 PM, 28-Oct-2021

कुछ ही देर बाद शुरू होगी अहोई अष्टमी की पूजा

अहोई अष्टमी 2021: Ahoi Ashtami Puja Muhurat 2021   

अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त – शाम 05 बजकर 40 मिनट से लेकर 06 बजकर 56 मिनट तक

तारों को देखने का समय – 06:02 

अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय – 11:28 
 
03:11 PM, 28-Oct-2021

 अहोई मां की आरती

Ahoi Ashtami 2021 Aarti Ahoi Mata Ki Aarti: कोई भी पूजा बिना आरती के संपन्न नहीं मानी जाती है। ऐसे में आज अहोई अष्टमी के त्योहार के मौके पर पूजा करते समय अहोई माता की आरती जरूर करनी करें...

अहोई मां की आरती
जय अहोई माता, जय अहोई माता!
तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता। 
ब्राहमणी, रुद्राणी, कमला तू ही है जगमाता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।। जय।।
माता रूप निरंजन सुख-सम्पत्ति दाता।।
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता।। जय।।
तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता।। जय।।
जिस घर थारो वासा वाहि में गुण आता।।
कर न सके सोई कर ले मन नहीं धड़काता।। जय।।
तुम बिन सुख न होवे न कोई पुत्र पाता।
खान-पान का वैभव तुम बिन नहीं आता।। जय।।
शुभ गुण सुंदर युक्ता क्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोकू कोई नहीं पाता।। जय।।
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता।। जय।।
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02:58 PM, 28-Oct-2021

आज शाम कब है अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त

Ahoi Ashtami 2021 Puja Vidhi Shubh Muhurat: अहोई अष्टमी व्रत में शाम के समय पूजा का विधान होता है। 28 अक्तूबर 2021 की शाम 5 बजकर 40 मिनट से 06 बजकर 56 मिनट तक अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त है।
02:12 PM, 28-Oct-2021

दिवाली से पहले क्यों रखा जाता है अहोई अष्टमी का व्रत

अहोई अष्टमी का व्रत हर वर्ष दिवाली के कुछ दिन पहले ही मनाया जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की खुशहाली की कामना के लिए रखती हैं। अहोई अष्टमी का व्रत सूर्योदय से लेकर शाम तक जिसे गोधूलि बेला भी कहा जाता है महिलाएं रखती हैं। दिनभर उपवास और मंत्रों के जाप के बाद शाम के समय आकाश में तारों के दर्शन करने के बाद व्रत तोड़ा जाता है। वहीं कुछ महिलाएं चांद के दर्शन करने के बाद भी उपवास तोड़ती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार संतान के सुखी जीवन और जिन महिलाओं की संताने नहीं होती उसकी प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी व्रत करने का विधान होता है।
 
01:56 PM, 28-Oct-2021

अहोई अष्टमी पर गुरु-पुष्य नक्षत्र का संयोग

संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की मनोकामना के लिए कार्तिक माह की अष्टमी तिथि पर रखा जाने वाला अहोई अष्टमी के दिन गुरु-पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। गुरु-पुष्य नक्षत्र में खरीदारी और नया कार्य आरंभ किया जाता है।
 
01:45 PM, 28-Oct-2021

अहोई अष्टमी की पूजा में न करें ये काम

अहोई अष्टमी पर अहोई माता की पूजा-आराधना शाम के समय जैसे ही तारे निकलने लगते हैं आरंभ हो जाती है। लेकिन माताएं अहोई देवी की पूजा करने से पहले कुछ कार्यों को नहीं करना चाहिए।
1- व्रत वाले दिन पर माताएं भूलकर भी नुकीली चीजों का प्रयोग न करें।
2- व्रत के दिन घर और बगीचों में खुरपी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
3- उपवास के दौरान महिलाएं काले और नीले रंग के कपड़े न पहनें।
4- घर पर इस दिन प्याज और लहसुन का प्रयोग न करें।
5-  पूजा से पहले भगवान गणेश की आराधना जरूर करें।
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01:34 PM, 28-Oct-2021

पढ़ें अहोई अष्टमी व्रत कथा

Ahoi Ashtami 2021 Vrat Katha: अहोई अष्टमी व्रत का उपवास रखने के साथ अहोई माता की कथा सुनना काफी फलदायक रहता है। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी व्रत कथा-
 
एक साहूकार के सात बेटे और एक विमला नाम की बेटी थी सबकी शादी हो चुकी थी। विमला दीपावली को पिता के घर आई थी। घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने गावं के बाहर गईं तो विमला भी उनके साथ चली गई। विमला जहां खुदाई रही थी, उस स्थान पर एक सेही अपने साथ बेटों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया इस पर क्रोधित होकर सेही ने विमला को संतानहीनता का श्राप दे दिया। सेही के वचन सुनकर विमला अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। सबसे छोटी भाभी पुष्पा ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद पुष्पा के जो भी बच्चे जन्म लेते हैं वे सात दिन बाद मर जाते हैं। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद पुष्पा एक पंडित जी घर गयी और सारी व्यथा बताई। पंडित ने सुरभी गाय की सेवा करने की सलाह दी। सुरभी सेवा से प्रसन्न होकर सेही पास ले जाती है। रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं। अचानक साहूकार की छोटी बहू पुष्पा की नजर एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़पक्षी के बच्चे को मार रहा है तो वह सांप को ही मार देती है। इतने में गरूड़पक्षी की माँ भी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहू पुष्पा ने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह पुष्पा को चोंच मारने लगती है। पुष्पा गरुण की माँ से कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है इसपर गरूड़पक्षी की माँ पुष्पा से खुश होकर सुरभी सहित उन्हें सेही के पास पहुंचा देती है। सेही पुष्पा की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है। सेही के आशीर्वाद से छोटी बहू का घर पुत्र और पुत्र बहुओं से हरा भरा हो जाता है। असंभव को भी संभव करदेना ही अहोई माँ की शक्ति है।
01:28 PM, 28-Oct-2021

अहोई अष्टमी पर करें इस मंत्र का जाप

अहोई अष्टमी के दिन सुबह से व्रत का संकल्प लेने के बाद लगातार ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नमः मंत्र का जाप करना बहुत ही उपयोगी होता है।
01:25 PM, 28-Oct-2021

अहोई अष्टमी पर शाम होते ही शुरू हो जाती है अहोई माता का पूजा

अहोई अष्टमी पर जैसे ही धीरे-धीरे शाम होने लगती है और आकाश में तारे निकलने का क्रम शुरू होता है अहोई माता की पूजा आरंभ हो जाती है। इसमें माताएं दिन भर व्रत रखते हुए तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।
01:14 PM, 28-Oct-2021

जानिए अहोई अष्टमी की पूजन सामग्री

अहोई अष्टमी का व्रत एक तरह से करवा चौथ के व्रत जैसा ही किया जाता है। सुबह से माताएं निर्जला व्रत रखते हुए शाम के समय तारों को देखने के बाद व्रत का पारण करती हैं। अहोई अष्टमी की पूजा के लिए इन पूजा सामग्रियों की जरूरत होती है- अहोई माता की मूर्ति या फोटो, करवा, पानी का कलश, फूल और माला, दीपक , रोली ,दूब, श्रृंगार का सारा सामान, बयाना, सिंघाड़े, फल,खीर आदि।
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