Parliament: सदन में फिर उठा ई-सिगरेट का मुद्दा; राज्यसभा में मंत्रियों की गैरमौजूदगी पर हंगामा
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Sat, 13 Dec 2025 03:50 AM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 13 Dec 2025 03:50 AM IST
खास बातें
Parliament Day 10 Lok Sabha Rajya Sabha Proceedings: संसद के शीतकालीन सत्र के 10वें दिन कई मुद्दों पर चर्चा हुई। पहले नौ दिन की कार्यवाही के दौरान दोनों सदनों में वंदे मातरम के 150 साल पर चर्चा समेत कई अहम विधायी कार्यों का निपटारा किया गया।
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संसद का शीतकालीन सत्र
- फोटो : अमर उजाला
लाइव अपडेट
05:05 AM, 13-Dec-2025
सुधा मूर्ति का प्रस्ताव...तीन से छह साल के बच्चों की शिक्षा और पोषण को बनाएं मौलिक अधिकार
राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति ने शुक्रवार को कहा कि तीन से छह साल की उम्र बच्चों के दिमागी और शारीरिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस उम्र की शिक्षा और पोषण को संविधान में मौलिक अधिकार बनाया जाना चाहिए। राज्यसभा में रखे प्रस्ताव में उन्होंने तीन से छह साल की शुरुआती शिक्षा को अनिवार्य बनाने के कई कारण गिनाए।सुधा मूर्ति ने कहा कि अभी संविधान का अनुच्छेद 21-ए केवल 6 से 14 वर्ष के बच्चों की मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। 3 से 6 वर्ष की आयु पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, जबकि इस उम्र में बच्चों का 85% दिमाग विकसित हो जाता है। इस दौरान सही पोषण, खेल-खेल में सीख और सुरक्षित माहौल जरूरी है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जिन बच्चों को शुरुआती शिक्षा मिलती है, उनकी सेहत बेहतर होती है, और आगे चलकर स्कूल में ऐसे बच्चों का प्रदर्शन अच्छा होता है।
05:04 AM, 13-Dec-2025
अनिवार्य लाइसेंसिंग को सीमित नहीं करेगा भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता
केंद्र सरकार ने संसद को बताया कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किसी भी तरह से अनिवार्य लाइसेंसिंग पर भारत के अधिकार को सीमित नहीं करेगा। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में बताया कि समझौते में मजबूत सुरक्षा उपाय शामिल हैं जो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान भी भारत की नीतिगत स्वायत्तता को पूरी तरह संरक्षित रखेंगे।
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05:04 AM, 13-Dec-2025
मनरेगा: गारंटी 100 दिनों की 50 दिन का ही मिल रहा रोजगार
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि पिछले पांच वर्षों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत श्रमिकों को प्रति परिवार औसतन 50 दिनों का रोजगार दिया गया। मनरेगा के तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के काम की गारंटी दी जाती है। पासवान ने कहा कि 2024-25 में इसके तहत प्रति परिवार औसतन 50.24 दिनों का रोजगार प्रदान किया गया। 2023-24 में औसत संख्या 52.07 थी, 2022-23 में यह 47.84 थी, 2021-22 में 50.07 थी और 2020-21 में 51.54 थी।05:04 AM, 13-Dec-2025
फर्जी खबरों पर अंकुश लगा रही सरकार
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन में बताया कि सरकार गुमराह करने वाली फर्जी खबरों और एआई, डीप फेक के बढ़ते मामलों पर अंकुश के लिए लगातार विभिन्न माध्यमों से पहल कर रही है। अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे नुकसानदायक कंटेंट से निपटने के लिए पहले से ही एक बड़ा कानूनी और इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क मौजूद है।05:04 AM, 13-Dec-2025
ई-सिगरेट: तृणमूल सांसद की अनुराग ने की शिकायत
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने सदन के अंदर कथित तौर पर ई-सिगरेट पीने के लिए तृणमूल सांसद के खिलाफ शुक्रवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई। ठाकुर ने एक दिन पहले सांसद का नाम लिए बिना यह मुद्दा उठाया था। ठाकुर ने शिकायत में कहा, तृणमूल के एक सांसद को सदन की बैठकों के दौरान खुलेआम इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का इस्तेमाल करते देखा गया। यह हरकत सदन में मौजूद कई सदस्यों को साफ दिखाई दे रही थी। इस प्रकार के कृत्य संसद की मर्यादा और कानून की अवमानना के समान हैं।05:03 AM, 13-Dec-2025
विदेश सेवा में 954 अफसर इनमें 263 महिलाएं शामिल
भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) में 954 अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें से 263 महिलाएं हैं। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि इस वर्ष एक दिसंबर तक कुल अधिकारियों में से 200 अधिकारी अनुसूचित जाति/ जनजाति वर्ग से हैं। 217 अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यकों से संबंधित आंकड़े अलग से नहीं रखे जाते हैं। मंत्री ने राजदूतों और उच्चायुक्तों के पदों पर तैनात अफसरों का विवरण भी दिया। इसके अनुसार, एससी/ एसटी वर्ग से 26 राजदूत, उच्चायुक्त या स्थायी प्रतिनिधि हैं। वहीं, पिछड़े वर्ग से 25 राजदूत, उच्चायुक्त, स्थायी प्रतिनिधि हैं। 11 राजदूत, उच्चायुक्त या स्थायी प्रतिनिधि महिला अधिकारी हैं। यह विदेश मंत्रालय में विभिन्न वर्गों व लिंगों का प्रतिनिधित्व दर्शाती है।
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05:03 AM, 13-Dec-2025
तीन हजार से अधिक दवाओं के नमूने पाए गए अधोमानक
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में बताया कि 2024-25 में 1.16 लाख दवा नमूनों में से 3,104 नमूने गैर-मानक पाए गए। इसके अलावा 245 नमूने नकली या मिलावटी मिले। मंत्री ने बताया कि सरकार ने देश में दवा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने दिसंबर 2022 से 960 से अधिक दवा निर्माण इकाइयों का जोखिम-आधारित निरीक्षण किया है, जिसके आधार पर 860 से अधिक कार्रवाई (जैसे उत्पादन रोकने और लाइसेंस रद्द करने के आदेश) की गई हैं।टीबी के 21 फीसदी मरीज घटे
नड्डा ने बताया कि टीबी मरीजों में उल्लेखनीय कमी आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2015 से टीबी की दर में 21% की कमी आई। यह प्रति एक लाख आबादी पर 237 से घटकर 2024 में 187 हो गई है। टीबी से होने वाली मृत्यु दर भी 25 प्रतिशत कम हुई है। निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को इलाज के दौरान प्रति माह 1000 रुपये दिए जा रहे हैं।
05:03 AM, 13-Dec-2025
इस्राइल, सीरिया से छह हजार भारतीयों को सुरक्षित निकाला
केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में पश्चिम एशिया के देशों इस्राइल, ईरान, सीरिया और इराक से 5,945 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है। इनमें उत्तर प्रदेश के 1,474 नागरिक शामिल थे।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि इन निकासी अभियानों में 2023 में इस्राइल में चलाया गया ऑपरेशन अजय और 2025 में ईरान और इस्राइल में चला ऑपरेशन सिंधु शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने 2024 में कुवैत में हुए भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले 45 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर को मानवीय आधार पर हवाई मार्ग से स्वदेश पहुंचाया। इनमें उत्तर प्रदेश के तीन नागरिक भी शामिल थे। जयशंकर ने यह भी बताया कि विदेशों में काम करने वाले या रहने वाले भारतीयों की मौतों की संख्या में हाल में खास वृद्धि नहीं हुई है। इस साल अक्तूबर तक 5,897 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर भारत लाए गए हैं।
03:50 AM, 13-Dec-2025
शहरी जल अवसंरचना में वित्तीय अंतर, संसदीय पैनल ने तुरंत कदम उठाने की सिफारिश की
एक संसदीय समिति ने देश की शहरी जल अवसंरचना में वित्तीय अंतर की ओर ध्यान दिलाते हुए अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (एएमआरयूटी) 2.0 के तहत वित्तपोषण और संचालन को मजबूत करने के लिए त्वरित कदम उठाने की सिफारिश की है। दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता पर जोर देते हुए समिति ने कहा कि आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को 2047 तक की मांग और विकास पैटर्न के अनुरूप शहरी जल आपूर्ति क्षेत्र की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन करना चाहिए। आवास और शहरी कार्यों संबंधी संसदीय समिति ने लोकसभा में एएमआरयूटी पर अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें शहरी पेयजल पर विशेष जोर दिया गया। समिति ने कहा कि एएमआरयूटी से शहरी जल अवसंरचना में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन स्वीकृत कुल राशि अब भी एचपीईसी द्वारा अनुमानित कुल आवश्यकता का केवल लगभग आधा ही पूरा कर पाती है।03:47 AM, 13-Dec-2025
NMC को वैश्विक मान्यता मिलना, उसके गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और वैज्ञानिक प्रथाओं में दायित्व को रेखांकित करती है: संसदीय पैनल
एक संसदीय समिति ने कहा है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता उसके उस दायित्व को रेखांकित करती है, जिसके तहत देश में समान, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना और साक्ष्य-आधारित वैज्ञानिक प्रथाओं को बढ़ावा देना शामिल है।विश्व चिकित्सा शिक्षा महासंघ (डब्ल्यूएफएमई) ने भारत में चिकित्सा शिक्षा और संस्थानों को विनियमित करने वाली वैधानिक संस्था एनएमसी को 10 वर्षों के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने गुरुवार को राज्यसभा में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस मान्यता के साथ एनएमसी को देश में उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
समिति ने कहा कि एनएमसी का दायित्व भावी पीढ़ियों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सस्ती और सुलभ चिकित्सा शिक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए उन्नत भौतिक अवसंरचना और प्रशिक्षित व कुशल फैकल्टी में पर्याप्त निवेश के साथ एक मजबूत और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा प्रणाली आवश्यक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 'एनएमसी को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता उसकी भूमिका का अंत नहीं, बल्कि देशभर में समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी की शुरुआत है, जिसमें वैज्ञानिक और आधुनिक प्रगति, साक्ष्य-आधारित प्रथाओं, आलोचनात्मक सोच, पेशेवर नैतिकता और सामाजिक व्यवहारिक संवेदनशीलता पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए।'