Vaishakh Sankashti Chaturthi 2022: अगर आपको अभी तक नहीं दिखा संकष्टी चतुर्थी का चांद, तो इस विधि से खोलें अपना व्रत
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Tue, 19 Apr 2022 11:13 PM IST
श्वेता सिंह
ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Tue, 19 Apr 2022 11:13 PM IST
खास बातें
Angaraki Sankashti Chaturthi 2022 Live Updates: जहां कुछ शहरों में संकष्टी चतुर्थी का चांद दिख गया है लेकिन दिल्ली-एनसीआर एवं कई अन्य शहरों में चांद काफी देर से दिखाई देने की संभावना है जिसके चलते महिलाएं संकष्टी चतुर्थी का व्रत बिना चांद के दर्शन ही खोल सकती हैं। शास्त्रों में इस बारे में बताया गया कि अगर किसी कारण से चांद के दर्शन होने में किसी तरह की परेशानियां आ रही हैं तो कुछ उपाय कर बिना चांद को देखे व्रत का पारण किया जा सकता है।
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अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2022
- फोटो : amar ujala
लाइव अपडेट
10:22 PM, 19-Apr-2022
अगर किसी कारण से चांद के दर्शन होने में किसी तरह की परेशानियां आ रही हैं तो कुछ इन उपायों से बिना चंद्र दर्शन के व्रत खोल जा सकता है।
- पंचांग के अनुसार चौथ पर चंद्रोदय के समय को ध्यान में रखते हुए व्रत का पारण किया जा सकता है।
- घर के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त कर व्रत तोड़ें।
- चांद के दर्शन न होने पर थाली में चावल लेकर उसे चांद का आकार देकर अर्घ्य दें।
- बड़े बुजुर्गों के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत तोड़ें और अगले चौथ पर चंद्र दर्शन का संकल्प लें।
10:04 PM, 19-Apr-2022
रात में संकष्टी का चांद निकलने से पहले गणेश भगवान की फिर से पूजा करें। चंद्रोदय के बाद दुग्ध से चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पूजन करें पूजन समाप्ति के बाद ही अन्न का दान करें और भगवान से प्रार्थना भी करें। इसके बाद फलाहार ग्रहण करें।
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09:50 PM, 19-Apr-2022
चंद्रदेव को अर्घ्य देते हुए करें इस मंत्र का जाप
चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देते हुए करें इस मंत्र का जाप करें।
'गगनार्णवमाणिक्य चंद्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक'।
अर्थात
दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम !गणेश के प्रतिविम्ब !आप मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए'। चन्द्रमा को यह दिव्य तथा पापनाशक अर्घ्य देकर परिवार की कुशलता की प्रार्थना करें।
'गगनार्णवमाणिक्य चंद्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक'।
अर्थात
दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम !गणेश के प्रतिविम्ब !आप मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए'। चन्द्रमा को यह दिव्य तथा पापनाशक अर्घ्य देकर परिवार की कुशलता की प्रार्थना करें।
09:30 PM, 19-Apr-2022
पूजा के दौरान पढ़ें श्री गणेश के 12 चमत्कारी नाम
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी
- फोटो : istock
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर श्री गणपति की विशेष कृपा पाने के लिए उनके 12 नामों का जाप अवश्य करें।
1-नसुमुख
2- एकदंत
3- कपिल
4- गजकर्णक
5- लंबोदर
6- विकट
7- विघ्न-नाश
8- विनायक
9- धूम्रकेतु
10- गणाध्यक्ष
11- भालचंद्र
12- गजानन
1-नसुमुख
2- एकदंत
3- कपिल
4- गजकर्णक
5- लंबोदर
6- विकट
7- विघ्न-नाश
8- विनायक
9- धूम्रकेतु
10- गणाध्यक्ष
11- भालचंद्र
12- गजानन
09:19 PM, 19-Apr-2022
गणेश जी की पूजा करते समय करें इन मंत्रों का जाप
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर गणपति के सामने धूप-दीप जला कर इन मंत्रों का करें जाप
गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ श्री गं गणपतये नम:
08:56 PM, 19-Apr-2022
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा
मां पार्वती एक बार स्नान करने गईं। स्नानघर के बाहर उन्होंने अपने पुत्र गणेश जी को खड़ा कर दिया और उन्हें रखवाली का आदेश देते हुए कहा कि जब तक मैं स्नान कर खुद बाहर न आऊं किसी को भीतर आने की इजाजत मत देना। गणेश जी अपनी मां की बात मानते हुए बाहर पहरा देने लगे। उसी समय भगवान शिव माता पार्वती से मिलने आए लेकिन गणेश भगवान ने उन्हें दरवाजे पर ही कुछ देर रुकने के लिए कहा। भगवान शिव ने इस बात से बेहद आहत और अपमानित महसूस किया। गुस्से में उन्होंने गणेश भगवान पर त्रिशूल का वार किया। जिससे उनकी गर्दन दूर जा गिरी। स्नानघर के बाहर शोरगुल सुनकर जब माता पार्वती बाहर आईं तो देखा कि गणेश जी की गर्दन कटी हुई है। ये देखकर वो रोने लगीं और उन्होंने शिवजी से कहा कि गणेश जी के प्राण फिर से वापस कर दें । इस पर शिवजी ने एक हाथी का सिर लेकर गणेश जी को लगा दिया। इस तरह से गणेश भगवान को दूसरा जीवन मिला। तभी से महिलाएं बच्चों की सलामती के लिए कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का व्रत करने लगीं।
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08:20 PM, 19-Apr-2022
आपके शहर में आज कब निकलेगा अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का चांद?
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर आज चंद्रोदय का समय Angaraki Sankashti Chaturthi 2022 Chand Nikalne Ka Time Sankashti Chaturthi 2022 Moonrise Time 19 April 2022
|
शहर |
चंद्रमा के उदय होने का समय |
| दिल्ली | 9:50 |
| लखनऊ | 9:31 |
| वाराणसी | 9:19 |
| गाजियाबाद | 9:50 |
| बरेली | 21:27 |
| प्रयागराज | 21:24 |
| कानपुर | 21:33 |
| आगरा | 21:44 |
| मेरठ | 21:50 |
| पटना | 21:10 |
| रांची | 21:05 |
| भागलपुर | 21:02 |
| मधुबनी | 21:08 |
| गया | 21:09 |
| गुरुग्राम | 21:50 |
| फरीदाबाद | 21:50 |
| सिरसा | 21:08 |
| जांलधर | 22:04 |
| चंडीगढ़ | 22:04 |
| अमृतसर | 22:08 |
| इंदौर | 21:43 |
| भोपाल | 21:38 |
| ग्वालियर | 21:38 |
07:50 PM, 19-Apr-2022
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र दर्शन का महत्व
हर महीने की पूर्णिमा तिथि के बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है आज के दिन चंद्रमा दर्शन के बाद ही व्रत पूजा माना जाता है चंद्रमा निकलने से पहले गणेश जी की पूजा और आरती की जाती है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी चतुर्थी व्रत का समापन चंद्र दर्शन के बाद ही होता है। चंद्रोदय होने के बाद अर्घ्य देकर पूजा की जाती है और फिर व्रत का पारण किया जाता है।
07:25 PM, 19-Apr-2022
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी व्रत नियम
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के दिन भूलकर भी चावल, गेहूं और दाल का सेवन न करें। इस दिन व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। मांस, मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें। क्रोध पर काबू रखें और खुद पर संयम बनाए रखें। दिनभर भगवान का नाम लें और चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।
06:55 PM, 19-Apr-2022
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें पूजन
- सबसे पहले स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इस दिन लाल वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है।
- पूजा करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
- साफ आसन या चौकी पर भगवान श्रीगणेश को विराजित करें।
- अब भगवान श्रीगणेश की धूप-दीप से पूजा-अर्चना करें।
- पूजा के दौरान ॐ गणेशाय नमः या ॐ गं गणपते नमः मंत्रों का जाप करना चाहिए।
- पूजा के बाद श्रीगणेश को लड्डू या तिल से बने मिष्ठान का भोग लगाएं।
- शाम को व्रत कथा पढ़कर और चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।