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शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी खतरनाक

Sat, 08 Oct 2016 11:21 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 08 Oct 2016 11:21 PM IST
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sudden weakness in any part of body dangerous
डेमो
शरीर के किसी हिस्से में अचानक से कमजोरी आना, चेहरे, हाथ या पैर में सुन्नपन महसूस करना, आंखों की रोशनी कम होना ये ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी हालत में जरा भी देरी न करें। तुरंत किसी ऐसे अस्पताल पहुंचे जहां न्यूरो के डॉक्टर मौजूद हों। क्योंकि ब्रेन स्ट्रोक में पहले तीन घंटे काफी महत्वपूर्ण होते हैं। समय से इलाज मिल जाने से ब्रेन को कम नुकसान पहुंचता है और शरीर पर भी लकवे का असर कम रहता है। 
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यह जानकारी दी देश के जाने माने न्यूरो विशेषज्ञों ने। ये मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंस विभाग के तत्वावधान में शनिवार को आडिटोरियम में हुए नेशनल स्ट्रोक अपडेट 2016 में पहुंचे थे। इस दौरान एम्स नई दिल्ली के डॉ. एसबी गायकवाड़ ने कहा कि ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद देर नहीं करनी चाहिए। मरीज को छोटे अस्पतालों में लेकर भटकने से अच्छा है किसी अच्छे अस्पताल जाएं। कई बार नसों में खून के थक्के जमने से भी ब्रेन स्ट्रोक होता है। थक्के निकाल देने से आराम मिल जाता है।
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गर्भावस्था में महिला के ब्लड प्रेशर पर लगातार होनी चाहिए मॉनीटरिंग

sudden weakness in any part of body dangerous
डेमो
एम्स नई दिल्ली की डॉ. दीप्ति विभा ने कहा कि गर्भावस्था में महिला के ब्लड प्रेशर पर लगातार मॉनीटरिंग होनी चाहिए। क्योंकि इस अवस्था में खून गाढ़ा होने लगता है। यदि महिला को पहले से दिमाग में कोई दिक्कत है तो समस्या बढ़ जाती है। एसजी पीजीआई लखनऊ के डॉ. विमल पालीवाल ने कहा कि ऐसे मरीज को वहां ले जाएं जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हों। एसजी पीजीआई लखनऊ के डॉ. राजकुमार ने ब्रेन स्ट्रोक में सर्जरी के बारे में जानकारी दी।

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण
- शरीर के एक ही तरफ चेहरे, हाथ या पैर में सुन्नपन व कमजोरी महसूस करना।
- अचानक लड़खड़ाना, चक्कर आना, शरीर का संतुलन बिगड़ना।
- भ्रम की स्थिति पैदा होना।
- बोलने या समझने में मुश्किल।
- धीरे या अस्पष्ट बोलना।
- एक या दोनों आंखों की अचानक रोशनी जाना या कम दिखना।
- तेज सिर दर्द होना।
- जी मिचलाना और उल्टी होना।

इनको खतरा ज्यादा 
- हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग या हाई कोलेस्ट्रॉल वालों को।
- डायबिटीज मरीजों में स्ट्रोक का जोखिम दो से तीन गुना ज्यादा होता है।
- जिनके परिवार में किसी को स्ट्रोक हुआ है।
- माइग्रेन पीड़ित।
- हमेशा तनाव में रहने वालों में।
- नियमित शराब, धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने वालों में।
- मोटे लोगों को। 
- ज्यादा गर्भनिरोधक गोलियां लेने वालों को।
 
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