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आपके घर का एसी भी हो सकता है जानलेवा, यकीन न हो तो पढ़ लें ये खबर

Sat, 06 Oct 2018 10:35 AM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Sat, 06 Oct 2018 10:35 AM IST
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एक अक्टूबर की रात पति, पत्नी और आठ साल का बच्चा एसी ऑन कर सोते हैं. चेन्नई का ये परिवार दो अक्टूबर की सुबह नहीं देख पाया. दरवाज़ा तोड़कर भीतर घुसी पुलिस को इन तीनों लोगों की लाश मिली. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पुलिस को जांच में पता चला कि इन तीनों की मौत की वजह एयरकंडीशनर से लीक हुई ज़हरीली गैस बनी. पुलिस ने बताया कि रात को ये परिवार बिजली जाने पर इनवर्टर ऑन करके सोया था. लेकिन रात में बिजली आ गई और एसी से लीक हुई गैस से परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई.
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एसी की वजह से जान को ख़तरे का ये पहला मामला नहीं है. इससे पहले एसी का कंप्रेशर फटने की वजह से लोगों की जान जा चुकी है. ऐसी भी रिपोर्ट्स हैं जिसमें घरों और दफ्तरों में एसी से लोगों को सिर दर्द, सांस लेने में दिक्कतें हुई हैं.ऐसे में सवाल ये कि इसकी वजह क्या है जिससे ठंडक पहुंचाने वाला एसी जानलेवा बन जाता है और घर या दफ़्तर में एसी लगा हो तो किन बातों का ज़रूर ख़्याल रखा जाना चाहिए.
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सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) में प्रोग्राम मैनेजर अविकल सोमवंशी ने बीबीसी हिंदी से इस बारे में बात की.अविकल सोमवंशी बताते हैं, ''अभी जो मॉर्डन एसी हैं उसमें पहले के मुकाबले कम ज़हरीली गैस इस्तेमाल की जाती है. ये R-290 गैस होती है, इसके अलावा भी कई और गैस हैं. पहले क्लोरो फ्लोरोकार्बन का इस्तेमाल किया जाता था. ये वही गैस है जिसे ओज़ोन लेयर में सुराख़ के लिए ज़िम्मेदार माना जाता रहा है. बीते क़रीब 15 सालों से इस गैस के इस्तेमाल को ख़त्म करने की बात की जा रही है. फिर हाइड्रो क्लोरो फ्लोरो कार्बन का इस्तेमाल हुआ. अब इसे भी हटाया जा रहा है.''

आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि आपके घर में जो एसी है, उसमें कौन सी गैस होनी चाहिए.इसका जवाब अविकल सोमवंशी देते हैं, ''अभी भारत में जिस गैस का ज़्यादातर इस्तेमाल हो रहा है, वो हाइड्रो फ्लोरो कार्बन है. कुछ कंपनियों ने प्योर हाइड्रो कार्बन के साथ एसी बनानी शुरू की है. पूरी दुनिया में इसी गैस के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया जा रहा है. ये गैस बाकियों से बेहतर होती हैं. इसके अलावा कोशिश ये भी की जा रही है कि नैचुरल गैसों का इस्तेमाल किया जा सके.''

दिल्ली में प्राइवेट अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर कौशल के मुताबिक़, 'क्लोरो फ्लोरो से सीधे हमारे शरीर पर कोई असर नहीं होता है. लेकिन अगर ये गैस लीक होकर वातावरण में मिल जाए तो नुकसानदायक हो सकती है.'
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CSE के मुताबिक़, एसी से निकली गैस से सिर दर्द की शिकायतें तो होती हैं, लेकिन मौत कम ही मामलों में होती है.अगर आपके घर का एसी लीक हो रहा है तो ये पता करना मुश्किल होता है. CSE के मुताबिक, एसी की गैस की कोई गंध नहीं होती है. लेकिन इसके बावजूद भी गैस लीक इन कुछ वजहों से होती है, जिस पर ध्यान रखकर इसका पता लगाया जा सकता है.

अगर आपका एसी सही से फ़िट नहीं है
जिन पाइपों में गैस दौड़ती है, वो सही से काम करें
पुराने एसी की ट्यूब में लगी ज़ंग
अगर एसी अच्छे से ठंडा नहीं कर रहा हो

घर में AC, इन बातों का रखें ख़याल
हर साल सर्विस करवाएं
दिन में एक बार कमरे की खिड़कियां-दरवाज़े खोल दें
सर्विस किसी भरोसेमंद, सर्टिफ़ाइड मैकेनिक से करवाएं
स्प्लिट एसी विंडो एसी के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर
गैस की क्वालिटी का ध्यान रखें
ग़लत गैस डालने से भी दिक्क़त होती है
सारे वक़्त कमरे, खिड़कियों को बंद न रखें ताकि प्रदूषित हवा निकल सके
अवकिल सोमवंशी जोड़ते हैं, ''जब आप कमरे की खिड़कियां या दरवाज़ें खोलें तो एसी बंद करना न भूलें. ऐसा करने से आपके बिजली का बिल ज़्यादा नहीं बढ़ेगा. सुबह जब आप एसी बंद कर देते हैं, तब अपने खिड़कियां- दरवाज़े खोल दें.''
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एसी का तापमान कितना रखें?
पलंग या सोफ़े पर बैठकर टीवी देखते हुए अक्सर आप एसी का रिमोट उठाकर तापमान 16 या 18 तक ले आते हैं.CSE की मानें तो ऐसा करना आपकी सेहत पर असर डाल सकता है.घरों या दफ़्तरों में एसी का तापमान 25-26 डिग्री सेल्सियस ही रखना चाहिए. दिन के मुकाबले रात में तापमान कम रखा जा सकता है. ऐसा करने से सेहत भी ठीक रहेगी और बिजली का बिल भी कम आएगा.

लेकिन अगर आप एसी का तापमान इससे कम रखेंगे तो एलर्जी या सिरदर्द शुरू हो सकता है. बुजुर्गों और बच्चों की इम्युनिटी सिस्टम कमज़ोर होता है, ऐसे में एसी का तापमान सेट करते वक़्त इसका ख़याल रखना होगा.

एसी कितने घंटे चलाना चाहिए?
इसके जवाब में CSE के प्रोग्राम मैनेजर कहते हैं, ''अगर आपके घर अच्छे से बने हैं, बाहर की गर्मी अंदर नहीं आ रही है तो आप एक बार एसी चालू करके ठंडा होने पर बंद कर सकते हैं. एक बात कही जाती है कि अगर आप 24 घंटे एसी में रहेंगे तो आपकी इम्युनिटी कम हो सकती है. आपका कमरा अगर पूरी तरह बंद है तो एक वक्त के बाद उसमें ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी. ये ज़रूरी है कि कहीं न कहीं से ताज़ा हवा अंदर आए.''

एसी सिर्फ़ घरों में ही नहीं रहता. शीशे की बड़ी खिड़कियों वाले दफ़्तरों में भी एसी होता है. अगर आपके दफ़्तर में एसी होगा तो शायद आपने भी कई बार कांपते हुए काम किया हो.

दफ़्तरों में एसी का तापमान कम क्यों?
अविकल सोमवंशी कहते हैं, ''दफ़्तरों में एसी का तापमान कम रखने की आदत विदेशों से आई है. वहां लोग ठंडे में रहते हैं. लेकिन भारत में लोगों को गर्म में रहने की आदत होती है. ऐसे में जब इतने कम तापमान में लोग रहते हैं तो छींक आना और सिर दर्द जैसी दिक्क़तें शुरू होती हैं. दफ़्तरों में एसी कम रखने से सेहत, बिजली बिल और आपके काम की गुणवत्ता पर असर होता है.''

हालांकि दफ़्तरों में एसी का तापमान कम रखने की वजह मशीनें भी होती हैं.

अगर एयरकंडीशन दफ्तर पूरी तरह से बंद है तो इसे विदेशों में 'सिक बिल्डिंग सिन्ड्रोम' कहा जाता है.बड़े दफ़्तरों में सेंट्रल एयरकंडीशनिंग सिस्टम होता है जिससे हवा आती-जाती रहती है.दूसरा विकल्प ये है कि दफ़्तरों के एसी में बैठने वाले लोग बाहर आते-जाते रहें ताकि ताज़ा हवा आपको मिलती रहे.

CSE की सलाह है कि दफ़्तरों में ये ख़याल रखना चाहिए कि सेंट्रल एयरकंडीशन सिस्टम की नियम से सफाई की जाए. कई बार इसमें फंफूद या गंदगी जम जाती है जिसके रास्ते आई हवा आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है.

जहां सरकारों ने सेट किया एसी का तापमान
इसी साल जून में ऊर्जा मंत्रालय ने सलाह दी थी कि एसी की डिफ़ॉल्ट सेटिंग 24 डिग्री सेल्सियस रखी जाए ताकि बिजली बचाई जा सके.ऊर्जा मंत्रालय का कहना था कि अगले छह महीने तक जागरुकता अभियान चलाया जाएगा और प्रतिक्रियाएं ली जाएंगी. मंत्रालय ने दावा किया था- इससे एक साल में 20 अरब यूनिट बिजली बचेगी. अविकल सोमवंशी के मुताबिक़, दुनिया के कुछ देशों में एसी का तापमान तय करने की कोशिशें हुई हैं.

चीन: 26
जापान: 28
हांगकांग: 25.5
ब्रिटेन: 24

पर्यावरण विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि भारत जैसी जलवायु वाले देश में में एसी का तापमान 26 डिग्री सेल्सियल रखा जाना चाहिए.

 
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