बोर्ड की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को नियमित रूप से करना चाहिए ये आसन, बढ़ेगी एकाग्रता
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वृक्षासन को ट्री पोज भी कहा जाता है क्योंकि इसे करने पर मनुष्य पेड़ की आकृति के समान दिखाई देने लगता है। वृक्षासन में एक विचित्र बात है जो इसे अन्य आसनों से अलग बनाती है। वह यह है कि जहां अन्य आसनों में श्वासों पर ध्यान लगाने के लिए आसन की मुद्रा में ही आंखों को मूंद लेते हैं। इस आसन में ऐसा कुछ भी नहीं करना होता है। एकाग्रता बढ़ाने के लिए किया जाने वाला ये आसन संतुलन बनाए रखने के लिए पूरा समय खुली आंखों से ही किया जाता है। आइए जानते हैं वृक्षासन को करने का सही तरीका और इससे होने वाले लाभ।
वृक्षासन करने का तरीका-
सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएँ। दाहिने घुटने को मोड़ते हुए अपने दाहिने पंजे को बाईं जांघ पर रखेंI आपके पैर का तलवा जांघ के ऊपर सीधा एवं ऊपरी हिस्से से सटा हुआ हो। बाएँ पैर को सीधा रखते हुए संतुलन बनाये रखें। संतुलन बनाने के बाद गहरी साँस लेते हुए हाथों को सिर के ऊपर ले जाएँ और नमस्कार की मुद्रा बनाएंI सामने की तरफ देखें और रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखेंI अब बाएँ तलवे को दाहिने जांघ पर रख कर इसी प्रकिया से आसन को दोहराएं।
वृक्षासन करने के लाभ-
यह आसन संतुलन बनाकर पैरों और मांसपैशियों को मजबूती प्रदान करता है।
इस आसन के नियमित अभ्यास से दिन-ब-दिन एकाग्रता बढ़ती है।
यह मस्तिष्क में स्थिरता और संतुलन लाता है
जिन लोगों को नसों में दर्द होता है, उनके लिए यह बेहद लाभकारी है।
.इस आसन को करने के बाद शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है।
.यह आसन पैर, हाथों और बाजुओं में होने वाले दर्द को भी दूर भगाता है।
नोट- माइग्रेन, अनिंद्रा, अल्प या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोग बिना किसी परामर्श के वृक्षासन न करें।