जिसे भी अभी और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ग्रह पर जीवन की फिक्र है, उसे इस खतरे की घंटी को सुनना होगा। दुनिया भर में मधुमक्खियां कम हो रही हैं। सच यह है कि मधुमक्खियों की तादाद जितनी कम होगी, फल और सब्जियों की उपलब्धता उतनी की कम होगी और कीमतें उतनी ही ज्यादा। वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर मधुमक्खियां नहीं रहेंगी, तो इंसान का वजूद भी नहीं रहेगा। सोचिए अगर धरती से मधुमक्खियों का नामोनिशान तक मिट जाए? उनके डंक से मिलने वाले दर्द से आपको तो छुटकारा मिल ही जाएगा, लेकिन एक चीज और है, जिससे आपको हाथ धोना पड़े। नहीं... शहद नहीं... वह जीवन है, आपका जीवन। यह सुनकर आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि खुद अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक ने की थी। उन्होंने कहा था, "अगर मधुमक्खियां धरती से गायब हो जाती हैं, तो मनुष्य के पास जीवन जीने के लिए केवल चार साल होंगे। जब मधुमक्खियां नहीं रहेंगी, तो न पोलिनेशन (परागण) होगा, न पौधे, न पशु और न ही मनुष्य बचेगा।"
World Earth Day 2019: खत्म होती जा रही हैं मधुमक्खियां, जानिए इनके बिना कैसा होगा जीवन
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अब सवाल है कि ऐसा क्यों होगा? इस सवाल का उत्तर जानने से पहले, यह जानना महत्वपूर्ण है कि मधुमक्खियां 70 फीसदी फसलों को परागण करती हैं। दूसरे शब्दों में कहें, तो उपभोग किए जाने वाले भोजन का एक तिहाई हिस्सा हमें मधुमक्खियों के परागण से ही मिलता है। अगर मधुमक्खियां नहीं होंगी, तो तीन महीने के भीतर दुनिया भर में फसल की पैदावार घट जाएगी। आपकी किराने की दुकान इसकी उपज का लगभग आधा हिस्सा खो देगी। वहीं, छह महीने के भीतर अधिकांश खेतों को गेहूं और मकई के खेतों में बदलना होगा, क्योंकि गेहूं और मक्के का परागण हवा द्वारा ही होता है। हमारे आहार को नुकसान होगा। कम विविध और कम पौष्टिक भोजन होगा। कुपोषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा होंगी और चिकित्सा लागत उनके साथ बढ़ेगी। खाद्य और दवा के आसमान छूते दामों के रूप में हमारी अर्थव्यवस्था गंभीर रूप धारण करेगी।
मशहूर कीटविज्ञानी मारला स्पिवाक मधुमक्खियों के तेजी से खत्म होने और उनकी हमारी जिंदगी में उपयोगिता पर दुनिया भर में लगातार बात कर रही हैं। कहती हैं, बचनी चाहिए मधुमक्खियां। "दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से कीटनाशकों का तेजी से इस्तेमाल बढ़ा। हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एक शोध से हमें पता चला कि नियोनिकोटिनॉइडस (रासायनिक तौर पर ये निकोटिन के जैसे होते हैं) कीटनाशक असल में मधुमक्खियों के विनाश का कारण हैं। नियोनिकोटिनॉइडस का मधुमक्खियों पर ऐसे असर पड़ता है, मानो अचानक अल्जाइमर हो गया हो। इसी वजह से मधुमक्खियां अचानक अपना छत्ता खाली कर देती हैं और भटकते हुए मर जाती हैं। इसे कॉलोनी कॉलेप्स डिसऑर्डर नाम से जाना जाता है। यहां हमें यह भी ध्यान देना होगा कि कीटनाशक मधुमक्खियों के विनाश का बड़ा कारण हैं, लेकिन इसके अलावा और भी कई कारण हैं, जिनका असर मधुमक्खियों के जीवन पर पड़ रहा है और आखिर में यह हमारे जीवन को प्रभावित करने वाला है।