फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   why people cry

आपकी आंखों में क्यों आंसू आते हैं?

Sun, 05 Jun 2016 02:20 PM IST
बीबीसी/एडम रदरफोर्ड
बीबीसी/एडम रदरफोर्ड Updated Sun, 05 Jun 2016 02:20 PM IST
विज्ञापन
why people cry
Demo pic - फोटो : bbc

क्या आपको पता है कि आप क्यों रोते हैं? कम रोते हैं या ज्यादा रोते हैं। कुछ लोग बातों की वजह से रोने लगते हैं। तो कुछ फिल्में देखकर आंसू बहाते हैं। सबके रोने की वजह अलग-अलग होती है। तो आप किस दर्जे में आते हैं? आखिर आपकी आंखों में आंसू क्यों आते हैं? बहुत सी फिल्में होती हैं जो लोगों को रुलाने के लिए बनती हैं। मसलन, केविन कोस्टनर की फिल्म, 'फील्ड ऑफ ड्रीम्स'। 

विज्ञापन


जिसमें एक बेसबाल खिलाड़ी को जन्नत से वापस लाने के लिए केविन कोस्टनर अपने मक्के के खेत के बीच में बेसबाल पिच बनाते हैं। लेकिन वहां उनकी अपने पिता से मुलाकात होती है, वो भी जवानी के दिनों में। बहुत से लोग ये फिल्म देखकर रोते हैं। मैं हॉलीवुड फिल्म 'द फोर्स अवेकेन्स' देखने के लिए अपनी बेटी के साथ गया था। पूरी फिल्म में मैं अपनी दस साल की बेटी का हाथ पकड़कर रोता रहा। वैसे आम तौर पर मर्दों का रोना खराब माना जाता है। मगर बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो बहुत रोते हैं। खुद को रोता हुआ देखकर मैंने रोने की वजह की पड़ताल करनी शुरू कर दी।
विज्ञापन


पहला सवाल तो ये कि अगर मर्द कम रोते हैं तो इसकी क्या वजह है? रोने से क्या फायदा होता है? और सबसे बड़ा सवाल ये कि आखिर इंसान रोते ही क्यों हैं? वैसे तमाम तजुर्बे ये साबित करते हैं कि मर्दों के मुकाबले औरतें ज्यादा रोती हैं। मनोवैज्ञानिक विलियम फ्रे के 1982 के रिसर्च के मुताबिक, महिलाएं औसतन महीने में पांच से ज़्यादा बार रोती हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं उनके मुकाबले महीने में रोने का मर्दों का औसत डेढ़ बार भी नहीं है। जब कोई महिला रोती है तो औसतन पांच से छह मिनट रोती है। उनके मुकाबले आदमी रोने में दो से तीन मिनट ही खर्च करते हैं। हॉलैंड के मनोवैज्ञानिक एड विंगरहोएट्स ने रोने पर खूब रिसर्च की है। वो बताते हैं कि औरतों और मर्दों के बीच रोने का ये फर्क बचपन से ही आ जाता है। हालांकि जब बच्चा पैदा होता है तो लड़की हो या लड़का, दोनों ही बराबर रोते हैं। 

नवजात बच्चे इसलिए रोते हैं ताकि अपने मां-बाप का ध्यान अपनी तरफ खींच सकें। वैसे हम आपको ये कोई नई बात नहीं बता रहे। फिर आखिर क्या होता है कि बड़े होने पर औरतों और मर्दों के रोने में इतना फर्क आ जाता है। इसमें अलग अलग समाज के माहौल का भी असर पड़ता है। जहां पर रोने को बुरा नहीं मानते, उन देशों में लोग खूब रोते हैं। वहीं जहां रोना बुरा माना जाता है वहां पर, लोग कम रोते हैं। 

अमीर देशों में ज्यादा रोते हैं लोग

why people cry
demo pic - फोटो : bbc

विंगरहोएट्स के रिसर्च में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। वो ये कि अमीर देशों में लोग ज्यादा रोते हैं। हालांकि विंगरहोएट्स ये मानते हैं कि समाज के साथ साथ टेस्टोस्टेरोन नाम के हारमोन का भी हमारे रोने से गहरा ताल्लुक है। वो ये बताते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर के शिकार लोगों को इलाज के वक्त जो दवाएं दी जाती हैं। उनसे टेस्टोस्टेरोन कम निकलता है। इसी वजह से प्रोस्टेट कैंसर के मरीज ज्यादा रोते हैं।

हालांकि आप ये भी कह सकते हैं कि वो इसलिए ज्यादा रोते हैं क्योंकि उन्हें कैंसर हो गया होता है। मगर, सवाल वही है, हम क्यों रोते हैं? तो इसका जवाब ये है कि हमें नहीं पता! तमाम जीवों में इंसान ही है जो इमोशनल होकर रोता है। पहले कहा जाता था कि हाथी भी रोते हैं। मगर अब तक इसका कोई पक्का सबूत नहीं खोजा गया है। हमें नहीं पता कि हम तकलीफ में भी रोते हैं और कई बार खुशी में भी हमारे आंसू निकल आते हैं।

कुछ लोग कहते हैं कि इंसान सामाजिक प्राणी है। इसलिए कई बार वो रोकर अपने एहसास बयां करता है। मगर, इसका भी कोई पक्का सुबूत नहीं। शायद जरूरत से ज्यादा इमोशनल हो जाने पर लोग रोने लगते हैं। विंगरहोएट्स अपने तजुर्बे से बताते हैं कि लोग रोने के बाद बेहतर महसूस करते हैं। 2015 में उन्होंने कुछ लोगों से कुछ खास फिल्में देखने को कहा। फिल्म देखने से पहले का उनका मूड पूछा गया। फिर फिल्म देखने के बाद के उनके एहसास बयां करने को कहा गया। इनमें से एक बहुत ही इमोशनल फिल्म थी। तो दूसरी कॉमेडी फिल्म। फिल्म देखने के बीस मिनट बाद लोगों से एक फॉर्म भराया गया। यही फॉर्म उनसे दो घंटे बाद भी भरने को कहा गया।

इस तजुर्बे के नतीजे एकदम साफ थे। जो लोग फिल्म देखते वक्त नहीं रोए। उनकी दिमागी हालत में कोई फर्क नहीं दिखा। वहीं रोने वालों के फॉर्म में बीस मिनट बाद और दो घंटे बाद के हालात में काफी बदलाव दिखा। वो रोने के बाद अच्छा महसूस कर रहे थे।कुल मिलाकर, रोने का रहस्य अभी भी रहस्य ही है। इस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। शायद तब हमें रोने की वजह मालूम हो। तब तक, जब जी चाहे रोइए। इससे आप बाद में बेहतर ही महसूस करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed