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इस गणेश चतुर्थी दिल्ली के पास दो अनूठे गणेश मंदिरों में करें दर्शन, बेहद रोचक है यहां का इतिहास

Fri, 06 Sep 2019 01:00 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Fri, 06 Sep 2019 01:00 PM IST
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visit ganganesh and moti dungri temple in ganesh chaturthi 2019

यूं तो गणपति बप्पा के कई रूप हैं और देश में उनके अनेक मंदिर हैं। भगवान गणपति के चमत्कारों की कई कहानियां भी पुराणों में प्रसिद्ध हैं।गणेश महोत्सव के इस पावन अवसर पर गणेश जी के दर्शन के लिए सभी उत्सुक रहते हैं। हालांकि, गणेश महोत्सव पर हर मंदिर में भक्तो का जमावड़ा लगा रहता है। लेकिन आज हम आपको गणेश महोत्सव के दौरान भगवान गणेश के अनूठे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका इतिहास बेहद रोचक रहा है। 

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जयपुर शहर अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। लेकिन यहां कई भव्य एंव सुंदर मंदिर देखने को मिलेंगे। अगर आप गणेश चतुर्थी के मौके पर गणेश जी के दर्शन करना चाहते हैं तो आपके लिए जयपुर शहर बेहद ही अच्छा रहेगा। गढ़गणेश मंदिर और मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर के दो प्रसिद्ध मंदिर हैं। इन दोनों ही मंदिरो का इतिहास बेहद धनी रहा है।
 
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गढ़गणेश मंदिर
गढ़गणेश मंदिर नाहरगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित हैं। महाराजा सवाई जयसिंह प्रथम गणेश भगवान के बहुत बड़े भक्त थे। इसीलिए उन्होनें गढ़गणेश मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर से जुड़ी एक रोचक बात यह है कि इस मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह से किया गया जिससे महाराजा जयसिंह आसानी से अपने चन्द्र महल से भगवान गणेश जी के दर्शन कर सकें। महाराजा जयसिंह हर सुबह दूरबीन के द्वारा गणेश भगवान के दर्शन करते थे। इस मदिंर की खास बात यह है कि यहां बिना सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की है।
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मोती डूंगरी के गणपति 
मोती डंगूरी गणपति मदिंर के नाम के पीछे भी एक कहानी है। दरअसल, जयपुर में एक पहाड़ है जो एक मोती जैसा दिखता है। इसी कारण इस पहाड़ का नाम मोती डंगूरी रखा गया। इसी पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की मूर्ती करीब हजार साल पुरानी है। मोती डंगूरी में गणपति जी की मूर्ती को जयपुर नरेश माधोसिंह प्रथम की पटरानी के मायके मावली से लाया गया था। 
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