{"_id":"5d7202328ebc3e93c8164cee","slug":"visit-ganganesh-and-moti-dungri-temple-in-ganesh-chaturthi-2019","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"इस गणेश चतुर्थी दिल्ली के पास दो अनूठे गणेश मंदिरों में करें दर्शन, बेहद रोचक है यहां का इतिहास","category":{"title":"Travel","title_hn":"यात्रा","slug":"travel"}}
इस गणेश चतुर्थी दिल्ली के पास दो अनूठे गणेश मंदिरों में करें दर्शन, बेहद रोचक है यहां का इतिहास
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Fri, 06 Sep 2019 01:00 PM IST
विज्ञापन
1 of 4
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
यूं तो गणपति बप्पा के कई रूप हैं और देश में उनके अनेक मंदिर हैं। भगवान गणपति के चमत्कारों की कई कहानियां भी पुराणों में प्रसिद्ध हैं।गणेश महोत्सव के इस पावन अवसर पर गणेश जी के दर्शन के लिए सभी उत्सुक रहते हैं। हालांकि, गणेश महोत्सव पर हर मंदिर में भक्तो का जमावड़ा लगा रहता है। लेकिन आज हम आपको गणेश महोत्सव के दौरान भगवान गणेश के अनूठे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका इतिहास बेहद रोचक रहा है।
2 of 4
जयपुर शहर अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। लेकिन यहां कई भव्य एंव सुंदर मंदिर देखने को मिलेंगे। अगर आप गणेश चतुर्थी के मौके पर गणेश जी के दर्शन करना चाहते हैं तो आपके लिए जयपुर शहर बेहद ही अच्छा रहेगा। गढ़गणेश मंदिर और मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर के दो प्रसिद्ध मंदिर हैं। इन दोनों ही मंदिरो का इतिहास बेहद धनी रहा है।
3 of 4
गढ़गणेश मंदिर
गढ़गणेश मंदिर नाहरगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित हैं। महाराजा सवाई जयसिंह प्रथम गणेश भगवान के बहुत बड़े भक्त थे। इसीलिए उन्होनें गढ़गणेश मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर से जुड़ी एक रोचक बात यह है कि इस मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह से किया गया जिससे महाराजा जयसिंह आसानी से अपने चन्द्र महल से भगवान गणेश जी के दर्शन कर सकें। महाराजा जयसिंह हर सुबह दूरबीन के द्वारा गणेश भगवान के दर्शन करते थे। इस मदिंर की खास बात यह है कि यहां बिना सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 4
मोती डूंगरी के गणपति
मोती डंगूरी गणपति मदिंर के नाम के पीछे भी एक कहानी है। दरअसल, जयपुर में एक पहाड़ है जो एक मोती जैसा दिखता है। इसी कारण इस पहाड़ का नाम मोती डंगूरी रखा गया। इसी पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की मूर्ती करीब हजार साल पुरानी है। मोती डंगूरी में गणपति जी की मूर्ती को जयपुर नरेश माधोसिंह प्रथम की पटरानी के मायके मावली से लाया गया था।
सबसे विश्वसनीयहिंदी न्यूज़वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ेंलाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसेहेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health and fitness news), लाइवफैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्टफूड न्यूज़इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) औरयात्रा (travel news in Hindi) आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।