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कुंभ जा रहे हैं तो खुसरो बाग और आनंद भवन भी घूम आएं

Thu, 17 Jan 2019 04:37 PM IST
shubham लाइफस्टाइल डेस्क, उमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, उमर उजाला Published by: shubham Updated Thu, 17 Jan 2019 04:37 PM IST
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Kumbh Mela 2019:these two places in prayagraj you should visit
दूसरा शाही स्नान अगले महीने 4 फरवरी को पड़ने वाली मौनी अमालस्या के दिन है

मकर संक्रांति से प्रयागराज में कुंभ 2019 की शुरुआत हो गई है। 15 जनवरी को पहला शाही स्नान था। हिंदुओं का यह सबसे बड़ा धार्मिक महोउत्सव 3 मार्च तक चलेगा। दूसरा शाही स्नान अगले महीने 4 फरवरी को पड़ने वाली मौनी अमालस्या के दिन है। भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु मोक्ष की कामना लिए पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए गंगा, यमुना और सरस्वती नदी के पावन तट पर लगे कुंभ में जा रहे हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि प्रयागराज में कुंभ के अलावा आप और किन-किन जगहों पर घूम सकते हैं।

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Kumbh Mela 2019:these two places in prayagraj you should visit
खुसरो बाग का निर्माण जहांगीर ने करवाया था

खुसरो बाग
प्रयागराज में कुंभ की धार्मिक यात्रा के बाद आप खुसरो बाग की सैर कर सकते हैं। यह बाग प्रयागराज जंक्शन के पास ही है। बाग को मुगल बादशाह जहांगीर ने अपने बड़े बेटे खुसरो के नाम पर बनाया था। यहां मुगल बादशाह जहांगीर के परिवार के तीन लोगों का मकबरा है। इनमें जहांगीर की पहली पत्नी शाह बेगम, जहांगीर की बेटी राजकुमारी सुल्तान निथार बेगम और बेटा खुसरो शामिल है। 

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जहांगीर के बड़े बेटे को उसके भाई शाहजहां ने मरवा दिया था

Kumbh Mela 2019:these two places in prayagraj you should visit
खुसरो बाग

मकबरों की नक्काशी बेहद खूबसूरत है। इतिहास बताता है कि जहांगीर के बड़े बेटे को उसके भाई शाहजहां ने मरवा दिया था। इसके बाद खुसरो की मां ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद यहां मकबरों को बनाया गया था। खुसरो बाग 40 एकड़ में फैला हुआ है। खुसरो बाग हफ्ते के सातों दिन खुला रहता है। आप अगर कुंभ जा रहे हैं तो खुसरो बाग जा सकते हैं। 

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इस भवन का निर्माण मोतीलाल नेहरू ने करवाया था

आनंद भवन
आनंद भवन नेहरू परिवार का पूर्व आवास है जो अब संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है। इस भवन का निर्माण मोतीलाल नेहरू ने करवाया था। नेहरू परिवार के इस पुस्तैनी घर को स्वराज भवन के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि जब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू ने इस मकान को खरीदा था तो यह बुचड़खाना था। इस भवन का उपयोग भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मुख्यालय के तौर पर किया जाता था।

आनंद भवन को देखने बड़ी तादाद में कला व इतिहास प्रेमी आते हैं। देश-विदेश से पर्यटक यहां आकर गांधी और नेहरू परिवार से जुड़ी वस्तुओं व इतिहास के बारे में जानकारी लेते हैं।

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