आखिर ओजस रात-रात भर कहां गायब रहता है
ओजस एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। परिवार में सभी लोग उसे बहुत प्यार करते थे। वह हर महीने अपनी कमाई का एक हिस्सा अपने पास रखता, बाकी पैसे मां-पिताजी को दे देता। वह समय का बहुत पाबंद था। हर रोज ऑफिस से समय पर घर आ जाता था
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ओजस एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। परिवार में सभी लोग उसे बहुत प्यार करते थे। वह हर महीने अपनी कमाई का एक हिस्सा अपने पास रखता, बाकी पैसे मां-पिताजी को दे देता। वह समय का बहुत पाबंद था। हर रोज ऑफिस से समय पर घर आ जाता था। लेकिन, सर्दियां आते ही देर से घर लौटने लगा था। कभी-कभी तो खाना भी नहीं खाता, बिना खाए ही सो जाता था। पिताजी को उसका यह व्यवहार खटकने लगा। आखिर ओजस रात-रात भर कहां गायब रहता है। ओजस कहीं किसी बुरी संगत में तो नहीं पड़ गया। उसके पिता को बार-बार यह डर सताए जा रहा था। एक दिन उन्होंने ओजस का पीछा करने का फैसला किया। ओजस की छुट्टी का टाइम होते ही उसके पिता उसके ऑफिस के पास पहुंच गए। हल्का-हल्का अंधेरा हो चुका था। ओजस अपने ऑफिस से निकला। उसके हाथ में एक बड़ा सा थैला था। ओजस ने एक ऑटो रुकवाया और उसमें बैठ गया। अब अंधेरा घना हो चुका था। उसके पिता दूसरे ऑटो में बैठकर उसका पीछा करने लगे। उन्होंने देखा कि रास्ते भर ओजस बार-बार ऑटो रुकवा रहा था। उसे फुटपाथ पर सर्दी में ठिठुरते कोई भी दिख जाता, तो उसे अपने थैले से कंबल निकालकर ओढ़ा देता। ऐसे ही उसने 5-7 लोगों को कंबल ओढ़ाया। ओजस के पिता यह सब देख बहुत गौरवान्वित हुए। लेकिन उन्हें खुद पर काफी अफसोस हुआ कि उन्होंने अपने बेटे पर शक किया। अचानक ऑटो चालक बोला, “भगवान इस लड़के को लंबी उमर दे। साहब आप इस गरीबों के मसीहा का पीछा क्यों कर रहे हैं।”ओजस के पिता के चहरे पर गौरव से भरी मुस्कान थी...
ललित शौर्य, पिथौरागढ़