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ज्यादा अफेयर, यानी रिश्तों में ईमानदारी की गारंटी

Mon, 04 Jul 2016 12:33 PM IST
बीबीसी/मेलिसा होगेनबूम
बीबीसी/मेलिसा होगेनबूम Updated Mon, 04 Jul 2016 12:33 PM IST
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- फोटो : thoughtcatalog.com

कहते हैं जोड़ियां ऊपर से बनती हैं। जोड़ियां यानी जीवन साथियों के जोड़े। मगर क्या जरूरी है कि प्यार सिर्फ एक से हो? जिंदगी सिर्फ एक के साथ बिताई जाए? कुदरती नियम भी इसके खिलाफ है कि सिर्फ एक से रिश्ता हो। लेकिन कमोबेश हर देश में एक ही जीवनसाथी के साथ जिंदगी बिताने को अच्छा माना जाता है।

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हालांकि हर समाज में आपको रिश्तों में छल देखने को मिलेगा। लोग एक साथी से संतुष्ट नहीं होते। होते भी हैं तो नए तजुर्बे की नीयत से दूसरा साथी तलाश लेते हैं। बेवफाई, अफेयर आम है। तो, ऐसा क्यों न हो कि एक साथ कई लोगों से मुहब्बत का रिश्ता रखा जाए। इससे कम से कम रिश्तों में ईमानदारी तो रहेगी।
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ब्रिटेन के रहने वाले फ्रैंकलिन व्यू ऐसे ही शख्स हैं। वो बताते हैं कि बचपन में उनकी स्कूल टीचर एक राजकुमारी का किस्सा सुनाती थीं, जिसके दो प्रेमी थे और उसे दोनों में से एक को चुनना था। तभी फ्रैंकलिन सोचते थे कि राजकुमारी को आखिर एक को ही क्यों चुनना है? वो दोनों के साथ राजी-खुशी क्यों नहीं रह लेती।
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शायद ये फ्रैंकलिन के किरदार का शुरुआती संकेत था। वो अपनी जिंदगी में कभी भी एक वक्त में एक साथी के साथ नहीं रहे। अपनी पहली डेट पर वो दो लड़कियों को एक साथ लेकर गए थे। पहली बार जब उन्होंने सेक्स किया तो तीन साथी थे।

फ्रैंकलिन की गर्लफ्रैंड दूसरे ब्वॉयफ्रैंड के साथ रहती है।

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आज वो अपनी गर्लफ्रैंड के साथ रहते हैं, जो अपने दूसरे ब्वॉयफ्रैंड के साथ रहती है। कभी कभार उसकी बेटी भी आ जाती है साथ रहने के लिए। यही नहीं, फ्रैंकलिन इस वक्त चार लंबी दूरी के प्रेम संबंध भी निभा रहे हैं। उन सबसे वो वक्त और जरूरत के मुताबिक मिलते रहते हैं।

वो सबके प्रति ईमानदार हैं। सबको अपनी दूसरी मोहब्बतों के बारे में बता चुके हैं। एक साथ कई मोहब्बत करने वाले फ्रैंकलिन और उनकी गर्लफ्रैंड, इकलौते जोड़े नहीं। बहुत से ऐसे लोग हैं, दुनिया में। हालांकि ये बात खुलकर मानने वालों की तादाद कम है।

लेकिन जब से दुनिया भर में समलैंगिकों को सामाजिक और कानूनी मान्यता मिलने लगी है, कई मोहब्बतें करने वाले लोग भी अपने हक के लिए आवाज उठाने लगे हैं। समाज में ऐसे लोगों को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता। आम तौर पर ये कहा जाता है कि आपको किसी के साथ प्यार हुआ तो उससे शादी रचाइये और फिर उसके साथ ही पूरी जिंदगी बिताइये।

हालांकि कुदरती तौर पर ऐसा चलन नहीं है। चाहे दूसरे जानवर हों या फिर इंसान के भाई-बिरादर, जैसे चिंपांजी या बोनोबो, सबके बीच पॉलीगैमी या कई साथियों के साथ जिंदगी बिताने का चलन है। खुद आदि मानव भी पहले एक साथ कई साथी रखते था। लेकिन, जैसे-जैसे समाज का चलन बढ़ा, लोग एक जीवनसाथी के साथ जिंदगी बिताने को तरजीह देने लगे।

समाजों में बहुविवाह या कई लोगों से संबंध की इजाजत है।

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इसकी वजह साफ थी। इससे उनके ऊपर खर्च का बोझ कम रहता था और आने वाली पीढ़ी के बीच संपत्ति, जैसे जमीन का बंटवारा आसान हो जाता था। लेकिन, आम मान्यता के उलट, दुनिया भर में 83 फीसद समाजों में बहुविवाह या कई लोगों से संबंध की इजाजत है। पिछले दो दशक में एक साथ कई लोगों से प्यार करने के चलन पर लोगों का ध्यान गया है। अंग्रेजी में इसके लिए शब्द गढ़ा गया है, 'पॉलीएमरी'।

जिसका मतलब है कई लोगों से प्यार करना। लैटिन भाषा से लिया गया ये शब्द जाहिर करता है कि आप एक ही वक्त में कई लोगों से मोहब्बत करते हैं। हालांकि ऐसे रिश्तों के भी कई रंग होते हैं। ये कहें कि कई लोगों से एक साथ रिश्ते रखने के भी कई तरीके होते हैं, तो गलत नहीं होगा।

अब फ्रैंकलिन को ही लीजिए। वो अपनी गर्लफ्रैंड के साथ लिव इन में रह रहे हैं। साथ ही चार दूसरी औरतों से भी रिश्ते निभा रहे हैं। एक साथ कई रिश्ते निभाना बहुत चुनौती भरा काम है। कई लोगों से बात करनी होती है।एक दूसरे के बारे में बेहतर समझ कायम करनी पड़ती है।

फ्रैंकलिन की एक दूर रहने वाली साथी ईव रिकर्ट कहती हैं कि ऐसे रिश्ते बेहद चुनौती भरे होते हैं। अमरीका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के टेरी कॉनले ने इस बारे में काफी रिसर्च किया है। वो कहती हैं कि समाज में 'पॉलीएमरी' को लेकर बहुत बुरी राय है। यहां तक कि टेरी को इस बारे में अपनी किताब छपवाने में भी अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ी।

'पॉलीएमरी' के कई फायदे हैं।

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वैसे 'पॉलीएमरी' के कई फायदे हैं। टेरी ने अपने तजुर्बे में पाया है कि कई लोगों से रिश्ते रखने वाले लोग, दोस्ती को अच्छे से निभाते हैं। उनके ज्यादा दोस्त होते हैं। वो प्रेम संबंध टूटने के बाद भी अपने पूर्व साथियों से दोस्ती का रिश्ता कायम रखते हैं।

उनके मुकाबले मोनोगैमी या एक साथी के साथ जीवन बिताने वाले, लोग प्रेम संबंध टूटने के बाद पूरी तरह से दूरी बना लेते हैं। कई लोगों से मोहब्बत होने के बावजूद इनके अंदर जलन की भावना कम होती है। अपने रिश्तों से इन्हें ज्यादा तसल्ली रहती है।

टेरी कहती हैं कि जो लोग एक जीवनसाथी के साथ जिंदगी बसर करते हैं, वो इन 'पॉलीएमरी' लोगों से काफी कुछ सीख सकते हैं। इससे उनकी जिंदगी आसान हो जाएगी। हालांकि समाज में एक वक्त में कई मोहब्बतें करने वालों को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता।


आम तौर पर माना जाता है कि वो ज्यादा सेक्स संबंधों के लिए ऐसा करते हैं। हालांकि हमेशा सेक्स के लिए ही 'पॉलीएमरी' हो, ऐसा जरूरी नहीं। इसके लिए कई लोगों से प्यार करना जरूरी नहीं। ये तो एक-दूसरे के प्रति ईमानदारी का नमूना है कि लोग, तमाम रिश्तों के प्रति खुलापन रखते हैं।

कई रिश्ते रखने वालों के बच्चे खराब परवरिश के शिकार होते हैं।

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ये भी माना जाता है कि कई लोगों से रिश्ते रखने वालों के बच्चे भी खराब परवरिश के शिकार होते हैं। उनका बचपन भी गलत संगत में गुजरता है। लेकिन ये ख्याल भी ठीक नहीं। ऑस्ट्रेलिया की मारिया पलोटा-शियारोली ने इस बारे में रिसर्च की तो इसके उल्टे नतीजे सामने आए। उन्होंने पाया कि 'पॉलीएमरी' रिश्तों में रहने वालों के बच्चों को परवरिश का बेहतर माहौल मिला।

उनकी देखभाल के लिए कई लोग थे। उनके साथ वक्त बिताने के लिए, उनसे बातें करने के लिए, सीख देने के लिए कई लोग थे। ऐसे में उनका बचपन काफी अच्छा बीता। उन्होंने अच्छी आदतें सीखीं। साथ ही अलग-अलग तरह के लोगों से तालमेल की आदत भी उनमें अच्छे से आ गई।

हालांकि कई लोगों से प्यार करने वालों की जिंदगी इतनी आसान भी नहीं होती, एक साथ कई रिश्ते निभाने की चुनौती, उनका अच्छा खासा वक्त ले लेती है। ऐसे संबंधो को मान्यता देने की मांग उठ रही है, जिसमें एक साथ कई लोगों के साथ शादी को कानूनी जामा पहनाया जा सके।

समलैंगिकता कि तरह इसे भी एक तरह की यौन आदत माना जाए

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समलैंगिक रिश्तों को मान्यता मिलने के बाद ये मांग जोर पकड़ रही है। 'पॉलीएमरी' रिश्ते निभाने वाले 76 फीसद लोगों की राय है कि मौका मिलने पर वो अपने तमाम साथियों के साथ शादी के रिश्ते में बंधना चाहेंगे। हालांकि बहुविवाह को कानूनी जामा पहनाना आसान काम नहीं। बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी से लेकर संपत्ति के बंटवारे तक, कई पेचीदगियां इसमें हैं।

पहली शर्त तो ये कि समलैंगिकता कि तरह इसे भी एक तरह की यौन आदत माना जाए। इससे 'पॉलीएमरी' रिश्ते रखने वालों की अलग पहचान बनेगी। बहुविवाह की वकालत करने वाले मानते हैं कि ये आदत उनमें क़ुदरती तौर पर है। ये उनका चुना हुआ विकल्प नहीं। वो कहते हैं कि अपने साथी से बेवफाई करने से अच्छा है कि अपने तमाम रिश्तों को शीशे की तरह साफ रखा जाए।

कम से कम साथी से बेवफाई का आरोप तो नहीं लगेगा। वैसे भी इंसान, एक वक्त के बाद एक रिश्ते से उकता जाता है। दूसरे साथी की तलाश करने लगता है। तलाक के बढ़ते मामले इस बात के सबूत हैं। तो बेहतर यही है कि तमाम मोहब्बतों के बारे में ईमानदारी बरती जाए। वैसे इंसानी रिश्तों के इतने पहलू हैं, इनमें इतनी तहे हैं कि कोई एक पैमाना तय नहीं किया जा सकता। हर इंसान के लिए मुहब्बत के मानी अलग होते हैं।

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