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Parenting Tips: बच्चों को रोमांटिक और हिंसक फिल्में दिखाना सही या गलत? जानिए सच

Tue, 16 Dec 2025 12:09 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Tue, 16 Dec 2025 12:09 PM IST
सार

Parenting Tips: बच्चा स्क्रीन पर किस तरह का कंटेंट देख रहा है, ये उसका व्यवहार पर असर डालता है। कम उम्र के बच्चे अगर रोमांटिक या हिंसक फिल्में देखते हैं तो उनके मन की जिज्ञासा उन्हें गलत सीख दे सकती है। ऐसे में माता पिता तय करें कि बच्चे को किस उम्र में किस तरह की फिल्में दिखानी हैं।

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Parenting Tips Should Children Watch Romantic or Violent Movies How it impacts kids emotion
parenting tips - फोटो : freepik.com

विस्तार

Parenting Tips: बच्चे स्कूल के पाठ या माता पिता के ज्ञान से उतना नहीं सीख पाते, जितना वह देखकर समझते और सीखते हैं। आज के बच्चों की परवरिश में स्क्रीन की भूमिका बहुत बढ़ चुकी है। वह स्क्रीन से ही दुनिया को देखते, समझते और अपनाते हैं। अक्सर बच्चे मनोरंजन के लिए फिल्में देखते हैं जो कि उनके मन व मस्तिष्क पर प्रभाव डालती है। 

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कई बार छोटे बच्चे अपनी मधुर आवाज में किसी फिल्म का मशहूर डायलाॅग बोलते हैं तो माता पिता खुश हो जाते हैं। ये डायलाॅग हीरो का एग्रेशन हो सकता है तो फिर रोमांटिक अंदाज भी हो सकता है। हालांकि वह सिर्फ डायलाॅग नहीं रटते, बल्कि फिल्म में दिखाया जा रहा रोमांस और एक्शन भी उनको प्रभावित करता है, जो बच्चों के मन में कई सवाल पैदा करते हैं। 
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ऐसे में हर माता-पिता के मन में ये सवाल जरूर आता होगा कि क्या बच्चे रोमांटिक या मारधाड़ यानी हिंसक फिल्म देख सकते हैं? इस तरहकी फिल्मों के लिए क्या बच्चा मानसिक रूप से तैयार होता है? इसका जवाब उम्र, समझ और मार्गदर्शन में छुपा है। परंपरागत पालन पोषण कहता है कि जो उम्र से पहले सीखा, वह दिमाग पर जहर की तरह बढ़ जाता है।  आइए जानते हैं किस उम्र के बच्चे रोमांटिक और एक्शन फिल्मे देख सकते हैं और इसका क्या असर होता है।
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किस उम्र में क्या देखना सही है?
 

  • 6 साल तक के बच्चे

6 साल की उम्र तक के बच्चों को रोमांस और हिंसक दृस्यों से दूर रखना चाहिए। इस उम्र में बच्चा बातें समझता नहीं, सिर्फ नकल करता है। लड़ाई-झगड़े वाले दृश्य डर, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या पैदा करते हैं। फिल्म ही नहीं उन्हें ऐसे कार्टून से भी दूर रखें। इस उम्र के बच्चों को मनोरंजक कार्टून, कविताओं और भजन आदि के वीडियो दिखाएं। 

 

  • 7 से 10 साल के बच्चे

इस उम्र के बच्चों को बहुत सीमित और माता-पिता की मौजूदगी में ही फिल्में देखनी चाहिए। ऐसी फिल्मे देख सकते हैं जिसमें हल्की भावनात्मक कहानियां हों लेकिन हिंसा और रोमांटिक सीन अब भी नुकसानदेह हैं।
 

  • 11 से 14 साल के बच्चे

इस उम्र का बच्चा किशोर हो रहा होता है। उसमें हार्मोनल बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। ऐसे में 11 से 14 साल के बच्चों के लिए रोमांटिक फिल्में भ्रम पैदा कर सकती हैं। हिंसक फिल्मों से बच्चे में गुस्सा और आक्रामक व्यवहार बढ़ सकता है। ऐसे में कंटेंट फिल्टर जरूरी है। 
 

  • 15 साल से ऊपर के बच्चे

इस उम्र में बच्चों संग समझदारी के साथ चर्चा जरूरी है। क्योंकि अब बच्चा सही–गलत पर बात कर सकता है। इसलिए अब रोक मत लगाएं, बल्कि संवाद करें ताकि वह अगर ऐसी फिल्में देखे तो उससे कुछ गलत सीखने के बजाए, मनोरंजन को समझे।


रोमांटिक फिल्मों का बच्चों पर असर

अगर बच्चा अपनी समझ और उम्र से पहले रोमांटिक फिल्में देखते हैं तो रिश्तों को लेकर अवास्तविक उम्मीदें बना लेते हैं। जिससे जल्दी भावनात्मक जुड़ाव और भ्रम की स्थिति बन जाती है। उनका ध्यान पढ़ाई से भटककर कम उम्र में रिलेशनशिप की जिज्ञासा में लग जाता है। फिल्मों का ग्लैमर बच्चों को यह नहीं सिखाता कि रिश्ते मेहनत से चलते हैं, सीन से नहीं।


मारधाड़ और हिंसक फिल्मों का असर

एक्शन फिल्मों से बच्चों के मन में गुस्सा और आक्रामक व्यवहार पनपता है। उन्हें डरावने सपने और एंग्जायटी महसूस हो सकती है। साथ ही बच्चा इससे दूसरों को चोट पहुंचाने की प्रवृत्ति अपनाता है और बच्चे के मन में सहानुभूति कम हो सकती है। जो बच्चा रोज़ मार देखता है, उसे मार गलत नहीं लगती।




अभिभावक क्या करें?

माता पिता को चाहिए कि वह उम्र के अनुसार बच्चे क्या देखें और क्या नहीं, ये तय करें। OTT प्लेटफॉर्म पर Parental Control चालू रखें। अगर बच्चा टीवी देख रहा है तो साथ बैठकर देखें और समझाएं। जब बच्चा कोई फिल्म या सीन देखें तो उससे पूछें कि वह इससे क्या सीखा या समझा है। इसके अलावा उनका स्क्रीन टाइम सीमित रखें और किताबों, खेल व बातचीत को बढ़ावा दें। 

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