मोबाइल और बच्चे: जैसे ही मैंने 6 साल के बेटे के लिए वो वीडियो ऑन किया- मैं शॉक में थी..!
वर्चुअल दुनिया ने पिछले कुछ समय में पूरी रियल दुनिया को बदल कर रख दिया है। महज एक क्लिक पर सबकुछ आपके सामने खुला होता है। न इस पर कोई खास नियंत्रण है, न ही आप इसके इस्तेमाल को पूरी तरह रोक सकते हैं।
वहीं, सबसे बड़ी समस्या बच्चों के कंटेंट को लेकर है। इसलिए यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि आपके बच्चे क्या देख रहे हैं।
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विस्तार
'मैं शॉक में थी जिस क्षण मैंने अपने 6 साल के बेटे के लिए उसका पसंदीदा कार्टून वीडियो चलाया। उस वीडियो के थम्बनेल पर उसी कार्टून की पिक्चर थी लेकिन जब मैंने उसे ऑन किया तो उसमें बहुत ही अब्यूजीव लैंग्वेज में कंटेंट भरा हुआ था। कुछ क्षण तो मैं समझ ही नहीं पाई कि ये क्या है। मुझे लगा शायद गलती से कोई और वीडियो चल गया। मैंने तुरन्त उस विंडो को बंद कर दिया। वो तो अच्छा रहा कि मेरा बेटा कुछ खास समझ नहीं पाया। उसे बस यही लगा कि मैंने उसका कार्टून बन्द कर दिया है। मैंने उसे बहला दिया और फिर हेडफोन लगाकर उसका कार्टून ढूंढा और चलाया।' कहती हैं निधि।
वह आगे कहती हैं-'ये तो ठीक है कि अभी तो मैं अपने बेटे के साथ हूँ और वो क्या देखेगा इस पर मेरा कंट्रोल है। लेकिन कुछ सालों बाद तो ऐसा करना मुश्किल होगा। मुझे समझ ही नहीं आ रहा कि अगर बच्चों के कार्टून तक को इतने गलत तरीके से परोसा जा सकता है तो बाकी तो कंटेंट क्या ही होगा।'
कंट्रोल से है परे
निधि जैसे कई पैरेंट्स हैं जिनके दिमाग मे इस बात को लेकर तनाव है। खासकर अभी की परिस्थितियों में जब कोरोना की वजह से बच्चे ऑनलाइन दुनिया के ज्यादा टच में हैं। असल में इंटरनेट की दुनिया जितनी फायदेमंद है उतने ही इसके साथ खतरे भी जुड़े हैं। विशेषकर बच्चों के मामले में जिनको आसानी से ब्रेनवॉश किया जा सकता और उनका फायदा उठाया जा सकता है। ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि बच्चे क्या देख रहे हैं, इसका ध्यान रखा जाए।
बातें काम की:
* सबसे पहले तो बच्चे के कम्प्यूटर, मोबाइल, टैबलेट आदि पर समय बिताने के लिए नियम बनाएं। याद रखें इन नियमों का पालन आपको भी करना होगा, तभी बच्चे भी उसकी नकल करेंगे।
* यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर आप किड्स वाला ऑप्शन चुन सकते हैं। लेकिन कई बार इस पर भी गलत कंटेंट आ जाता है या फिर कई बार आपको बच्चों की एक्टिविटी के लिए सामान्य यूट्यूब की ही जरूरत हो सकती है। ऐसे में प्रोग्राम्स पर कंट्रोल करने की कोशिश करें।
* बच्चे को सामान्य शब्दों में यह समझाएं कि किस चीज को देखने से उसे बहुत फायदा होगा या क्या ज्यादा मनोरंजक होगा। इससे उसे प्रोग्राम चुनने में मदद मिलेगी।
* हफ्ते में कम से कम एक बार बच्चा क्या देख रहा है इस बात को चैक जरूर करें। इसके लिए 24 घण्टे बच्चे के पीछे पड़े रहने की जरूरत नहीं है। इस काम को सतर्कता से लेकिन धैर्य के साथ करें।
* यदि बच्चे के व्यवहार में कुछ भी अजीब लग रहा है। जैसे उसकी भाषा खराब हुई है, वह अकेले रहना पसंद करने लगा है, उसकी भूख और नींद पर असर पड़ा है, वह किसी बहाने से आपका डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेना चाहता है, अपने रूम में ही रहना पसंद कर रहा है, तो सतर्क हो जाएं और तुरन्त जांच करें कि कारण क्या हैं।
* अगर कभी गलती से बच्चे के सामने ऐसा कंटेंट आ जाये जो उसके लायक नहीं है, तो एकदम से उसे बंद करने की बजाय धीरे से बच्चे का ध्यान भटकाते हुए उसे बंद करें। अगर बच्चे ने उसे देख लिया है और कोई प्रश्न पूछा है तो उसे न डांटें न ही प्रश्न को टालें। सही तरीके से सामान्य भाषा में बच्चे को बताएं। साथ ही यह भी कहें कि इस बारे में हम और भी बात करते रहेंगे। इससे उनके मन मे यह विश्वास बनेगा कि उन्हें उनके सवाल का जवाब मिलेगा।
* डांटना या मारना किसी समस्या का समाधान नहीं है। आप टीनएजर्स को बहुत ज्यादा कंटोल नहीं कर सकते क्योंकि ये जेनरेशन टेक्नोलॉजी और गैजेट्स के बारे में हमसे ज्यादा जानती है। इसलिए बच्चों को लगातार बातचीत करने को प्रेरित करें।
* बच्चों में अच्छी और क्रिएटिव आदतें विकसित करना आपकी ही जिम्मेदारी है। कोशिश करें कि बच्चे वर्चुअल दुनिया के अलावा असली दुनिया से भी जुडें।