मां कहती हैं: मेरी बेटी तुम एक स्पेशल चाइल्ड हो लेकिन इस दुनिया में खुद को किसी से अलग न समझना
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प्यारी आद्या !
कुछ वायदे हैं जो मैं तुमसे करती हूं। तुमसे पहले खुद से करती हूं। मैं कभी भी अपनी किसी नाकाम हसरत का बोझ तुम पर नहीं डालूंगी। तुम एक अलग व्यक्तित्व हो। मैं तुमसे वायदा करती हूं कि तुम्हारी इस आजादी के आड़े खुद को भी नहीं आने दूंगी। जब तक तुम खुद का बचाव करने लायक नहीं हो जाती,मैं तुम्हारी आवाज बनकर रहूंगी।
मेरी बच्ची, तुम्हारी तरफ आती दया और अफसोस भरी हर नजर को पहले मुझसे टकराना होगा। तुम उतना ही प्यार और सम्मान पाओगी जितना कोई भी दूसरा मनुष्य पाने की योग्यता रखता है। मैं किसी को भी,किन्हीं हालातों में भी तुमसे तुम्हारा ये हक नहीं लेने दूंगी। तुम्हें संवेदनशीलता और दया का फ़र्क़ भी समझाऊंगी।
मैं तुम्हारी कंडीशन के बारे में और ज्यादा जानकारी जुटाऊंगी और तुम जरूर बोल पाओगी। इस साल साइन लैंग्वेज सीख लूंगी। अभी कुछ दिन पहले जब हम मूक बधिर बच्चों के एक स्कूल गए थे तो वो बच्चे तुमसे मिलकर कितना खुश हुए थे। इशारों में तुम्हारे बारे में पूछ रहे थे। मैं उदास हुई जब मैं उनकी भाषा नहीं जानती थी। तुम्हारे इन प्यारे दोस्तों की सुन्दर सी दुनिया का हिस्सा बनने के लिए मैं इस भाषा को जरूर सीखूंगी,तुम्हारे और उनके बीच पुल बन जाऊंगी और अपने लिए भी ढेर सारे नए दोस्त बना लूंगी। मैं तुम्हें प्रकृति के और नजदीक ले जाती रहूंगी।
पेड़,पौधे,नदी और पहाड़ सिर्फ दिखने में सुन्दर नहीं होते हैं। इनसे हमें जीने की ऊर्जा भी मिलती है। तुम देखोगी कि कैसे विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी पेड़ तनकर खड़े रहते हैं। फूल किसी से कोई शिकायत ना करते हुए अपने हिस्से की दुनिया को खूबसूरत बनाते हैं।
तुम देखोगी कि अगर उगने की जिद हो तो खड़ी चट्टानों पर भी सुन्दर से पौधे उग आते हैं। अगर जीने का हौसला हो तो बारिश,सर्दी और पाले की मार के बाद भी पौधे लहलहाते हैं। मैं चाहती हूं कि तुम इस धरती की सुंदरता को भरपूर निहारो और अपने मन में एक भरोसा लाओ कि ये दुनिया बहुत खूबसूरत है।
मेरा वायदा है तुमसे कि इस साल तुम्हें बहुत सारे अच्छे लोगों से भी मिलवाऊंगी। ऐसे लोग जो अभी भी जीवन की सुंदरता में यकीन रखते हैं। अपने साथ दूसरों का जीवन भी आसान बनाते हैं। मैं चाहती हूं जब चारों तरफ नफरतों का बोलबाला है,तुम इन प्यार भरी फुहारों से मिलो और महसूस करो कि तमाम बुराइयों के बाद भी बहुत कुछ है जो अभी भी बहुत सुन्दर है,मधुर है।
तुम्हारी मां
दीपिका घिल्डियाल
(यह परवरिश संवाद देहरादून से दीपिका घिल्डियाल ने लिखा है। वो एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं। उनकी छह साल की प्यारी बेटी आद्या को सेरिब्रल पाल्सी है।)
नोट: यह कॉलम अमर उजाला की ओर से मां द्वारा अपने बच्चों के साथ परवरिश संवाद के रूप में तैयार किया गया है। इस कॉलम में बच्चों के लालन-पालन से लेकर उनकी परवरिश से जुड़े सवालों और बच्चों के मन में रहने वाली छोटी-छोटी दुविधाओं को प्रश्न-उत्तर के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया गया है। आप भी अपने बच्चों से इस परवरिश संवाद के जरिए बात कर सकते हैं। अपना संवाद लेख blog@auw.co.in पर साझा कर सकते हैं।