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भारत की पहली हाउस सर्जन है ये महिला, एक डॉक्टर से शादी के लिए रखी थी 'अनोखी' शर्त

Thu, 20 Aug 2020 12:02 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 20 Aug 2020 12:02 PM IST
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Muthulakshmi Reddy first woman house surgeon of India first woman legislator
मुथुलक्ष्मी रेड्डी - फोटो : Social media

मुथुलक्ष्मी रेड्डी को 'कई पहलें करने वाली' महिला कहा जाता है। वह पहली हाउस सर्जन, भारत की पहली महिला विधायक और मद्रास विधान परिषद की पहली महिला उपाध्यक्ष बनी थीं। मुथुलक्ष्मी रेड्डी का जन्म 30 जुलाई 1886 में तमिलनाडु के पुडुकोट्टई में हुआ था। उनके पिता नारायण स्वामी अय्यर महाराजा कॉलेज में प्राध्यापक थे और उनकी मां चंद्रामाई देवदासी समुदाय से थीं। मैट्रिक तक उनके पिता और कुछ शिक्षकों ने उन्हें घर पर ही पढ़ाया और वो परीक्षा में टॉपर भी रहीं। हालांकि, लड़की होने के कारण महाराजा हाई स्कूल ने उन्हें दाखिला देने से मना कर दिया। समाज के रूढ़िवादी तबके ने उन्हें स्कूल में पढ़ाने को लेकर बहुत हंगामा किया। लेकिन, पढ़ाई में उनकी रुचि को देखते हुए पुडुकोट्टई के मार्तंड भैरव थोंडामन राजा मुथुलक्ष्मी को वजीफा दिलाकर हाई स्कूल में दाखिला दिलाया। वो उस समय अपने स्कूल में अकेली लड़की थीं। 

Muthulakshmi Reddy first woman house surgeon of India first woman legislator
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media

शादी में रखी शर्त

मुथुलक्ष्मी रेड्डी मद्रास मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग में पहली भारतीय लड़की थीं। उन्होंने कॉलेज में सर्जरी में टॉप किया और गोल्ड मेडल जीता था। डॉक्टर वी सांता अपनी किताब 'मुथुलक्ष्मी रेड्डी- ए लेजेंड अंटू यॉरसेल्फ' कहती हैं कि वो सिर्फ कई पहलें करने वालीं महिला ही नहीं थीं बल्कि उन्होंने महिलाओं की मुक्ति और सशक्तीकरण के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने अप्रैल 1914 में डॉक्टर टी. सुंदर रेड्डी से एक शर्त के साथ शादी की। शर्त ये थी कि उनके पति उनकी सामाजिक गतिविधियों और जरूरतमंदों की चिकित्सकीय सहायता में दखल नहीं देंगे।

Muthulakshmi Reddy first woman house surgeon of India first woman legislator
मुथुलक्ष्मी रेड्डी - फोटो : Social media

उन्हें इंग्लैंड में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रशिक्षण के लिए चुना गया था। जब उनके माता-पिता ने उन्हें इंग्लैंड जाने से मना कर दिया, तब तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री पानागल राजा ने सरकार को उन्हें एक साल के लिए वित्तीय सहायता देने का निर्देश दिया। मुथुलक्ष्मी ने पाया कि महिलाओं के उत्थान के लिए सिर्फ स्वास्थ्य के स्तर पर काम करना काफी नहीं था। इसलिए वो एनी बेसेंट के मार्गदर्शन में महिलाओं के आंदोलन में कूद गईं। उन्हें 1926 में महिला भारतीय संघ (डब्लयूआईए) द्वारा मद्रास विधान परिषद के लिए नामांकित किया गया था। वो 1926-30 तक परिषद में रहीं। शुरुआत में वो परिषद में सेवाएं देने के लिए हिचकिचा रही थीं। उन्हें डर था कि कहीं उनका चिकित्सा से जुड़ा काम प्रभावित ना हो जाए। हालांकि, उन्हें लगता था कि महिलाओं को अपनी घर निर्माण की क्षमता को राष्ट्र निर्माण में भी इस्तेमाल करना चाहिए।  

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Muthulakshmi Reddy first woman house surgeon of India first woman legislator
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

महत्वपूर्ण कानूनों में योगदान

मुथुलक्ष्मी ने बाल विवाह रोकथाम कानून, मंदिरों से देवदासी प्रथा खत्म करने, वेश्यालय बंद करने और महिलाओं व बच्चों की तस्करी रोकने के लिए कानून बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिषद में विवाह के लिए लड़कियों की सहमति की उम्र को बढ़ाकर 14 करने वाले विधेयक को प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने कहा था, सती प्रथा में कुछ ही देर की पीड़ा होती है जबकि लड़की के बाल विवाह की प्रथा में उसे जन्म से लेकर मृत्यु तक एक बाल पत्नी, बाल मां और बाल विधवा के तौर पर जिंदगी भर की पीड़ा मिलती है।' उन्होंने अपनी किताब 'माय एक्सपीरियेंस एज लेजिस्लेचर' में इसका जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि जब उनका विधेयक बाल विवाह रोकथाम कानून स्थानीय प्रेस में प्रकाशित हुआ तो कट्टरपंथियों ने खुली बैठकों और प्रेस के जरिए उन पर हमला बोला। इसमें यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट्स भी शामिल थे।  

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Muthulakshmi Reddy first woman house surgeon of India first woman legislator
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

देवदासी प्रथा के खिलाफ कानून

मुथुलक्ष्मी देवदासी प्रथा को खत्म करने के लिए कानून पास करवाने में अगुआ रहीं। उन्हें इस प्रक्रिया में भी कट्टर समूहों से विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस प्रस्ताव को मद्रास विधान परिषद ने सर्वसम्मति से समर्थन दिया और केंद्र सरकार को इसकी सिफारिश की। ये विधेयक 1947 में आखिरकारी कानून बन गया। देवदासी प्रथा में युवा लड़कियों या महिलाओं को भगवान की शरण में दे दिया जाता है। मद्रास विधान परिषद के समक्ष प्रस्ताव पेश करते हुए मुथुलक्ष्मी रेड्डी ने कहा था, 'देवदासी प्रथा सती का सबसे खराब रूप है और ये एक धार्मिक अपराध है।'  

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